इश्क का नया सिलेबस Part-1
आरके ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस का कैंपस हमेशा की तरह वाइब्रेंट और शोर से भरा हुआ था। कैंटीन से लेकर कॉरिडोर तक हर तरफ बस असाइनमेंट्स, बंक प्लान्स और अपकमिंग फेस्ट की बातें चल रही थीं। इसी भीड़ के बीच बीसीए सेकंड ईयर की वर्षा अपने दोस्तों के साथ बैठी अपनी कोडिंग फाइल पूरी करने में जुटी थी। वर्षा स्वभाव से थोड़ी चुलबुली, बेहद खूबसूरत और अपने सपनों को लेकर क्लियर थी, लेकिन कोडिंग उसके पल्ले नहीं पड़ती थी। तभी अचानक पूरी लैब में एक सन्नाटा पसर गया और सबकी नजरें दरवाजे की तरफ टिक गईं, जहां से कैंपस का सबसे चर्चित चेहरा अंदर आ रहा था।
वो थे करण आहुजा, कॉलेज के नए डेटा स्ट्रक्चर्स के प्रोफेसर जो सिर्फ अट्ठाईस साल के थे और अपनी हॉटनेस के लिए पूरे कॉलेज में मशहूर थे। करण जितने हैंडसम और फिट थे, उतने ही अपने काम को लेकर स्ट्रिक्ट और डिसिप्लिंड भी थे, जिससे स्टूडेंट्स खौफ खाते थे। उनकी गहरी आंखें और सलीके से संवारी गई दाढ़ी किसी भी लड़की का ध्यान भटकाने के लिए काफी थी, और वर्षा भी उनसे अछूती नहीं थी। करण ने पोडियम पर अपना लैपटॉप रखा और अपनी गहरी आवाज में पूरी क्लास को अटेंशन मोड में ला दिया, जिससे वर्षा की धड़कनें अचानक तेज हो गईं।
करण सर का पहला ही लेक्चर इतना इंटेंस था कि वर्षा का दिमाग पूरी तरह से ब्लैंक हो चुका था, क्योंकि उसका ध्यान कोडिंग से ज्यादा करण के बोलने के अंदाज पर था। लेक्चर खत्म होते ही करण ने सबको अगले हफ्ते एक बड़ा प्रोजेक्ट सबमिट करने का अल्टीमेटम दे दिया, जिसने पूरी क्लास की हवा टाइट कर दी। वर्षा ने अपनी सहेली रिया की तरफ देखा जो खुद करण सर के लुक्स पर फिदा थी, लेकिन प्रोजेक्ट के प्रेशर ने उसके भी होश उड़ा दिए थे। वर्षा को समझ आ गया था कि इस बार सिर्फ मुस्कुराने से काम नहीं चलने वाला, क्योंकि करण सर उन प्रोफेसर्स में से नहीं थे जो लीनियंट मार्किंग करें।
शाम को कॉलेज के बास्केटबॉल कोर्ट के पास जब वर्षा अकेली बैठी अपनी कोडिंग एरर्स को सुलझाने की कोशिश कर रही थी, तभी वहां से करण गुजरे। उन्होंने वर्षा को परेशान देखा और उसके पास आकर खड़े हो गए, जिससे उनके महंगे परफ्यूम की खुशबू वर्षा के सेंस को ट्रिगर कर गई। करण ने उसकी स्क्रीन पर देखा और बिना किसी मुस्कुराहट के बेहद कड़क आवाज में कहा कि अगर लॉजिक ही गलत होगा तो आउटपुट कभी सही नहीं आएगा। वर्षा ने सहमकर उनकी तरफ देखा, जहां उनकी आंखों की सख्ती के पीछे एक अजीब सा अट्रैक्शन छुपा हुआ था जो दोनों को महसूस हुआ।
उस रात वर्षा अपने कमरे में बैठकर सिर्फ करण सर के बारे में ही सोचती रही, उनके बात करने का तरीका और उनका वो स्ट्रिक्ट बिहेवियर उसे और ज्यादा अट्रैक्ट कर रहा था। उसने तय किया कि वो इस प्रोजेक्ट में अपनी पूरी जान लगा देगी ताकि वो करण की नजरों में अपनी एक अलग पहचान बना सके। अगले कुछ दिन वर्षा ने लाइब्रेरी और लैपटॉप के बीच बिताए, जहां वो हर कोडिंग कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने की कोशिश कर रही थी। जब भी वो क्लास में करण को देखती, तो उसे अपने अंदर एक अलग सा कॉम्पिटिटिव स्पिरिट और एक अनजाना सा रोमांस महसूस होता था।
प्रोजेक्ट सबमिशन के दिन जब वर्षा की बारी आई, तो उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था क्योंकि करण हर एक स्टूडेंट के कोड को बारीकी से चेक कर रहे थे। जब वर्षा ने अपना प्रोजेक्ट स्क्रीन पर रन किया, तो करण के चेहरे पर एक हल्का सा सरप्राइज आया, जो उनकी आम तौर पर रहने वाली सख्ती से बिल्कुल अलग था। उन्होंने वर्षा की तरफ देखा और कहा कि कोड अच्छा है लेकिन इसमें थोड़ा और परफेक्शन हो सकता था, जिसके बाद उन्होंने वर्षा को शाम को फैकल्टी केबिन में आने को कहा। इस बात ने वर्षा के पेट में अजीब सी तितलियां उड़ा दीं क्योंकि केबिन में अकेले मिलने का ख्याल ही बेहद थ्रिलिंग था।
शाम को जब कॉलेज खाली हो चुका था और हर तरफ एक शांत माहौल था, वर्षा धड़कते दिल के साथ करण सर के केबिन के बाहर खड़ी थी। उसने दरवाजा खटखटाया और अंदर गई तो देखा कि करण अपनी शर्ट के स्लीव्स को थोड़ा ऊपर रोल किए हुए कुछ पेपर्स चेक कर रहे थे, जिसमें वो बेहद हॉट लग रहे थे। करण ने उसे बैठने का इशारा किया और फिर लैपटॉप उसकी तरफ घुमाते हुए बहुत करीब आकर कोडिंग के कुछ एडवांस्ड लॉजिक्स समझाने लगे। उनके इतने करीब होने से वर्षा की सांसें अटकने लगीं और उसका ध्यान पूरी तरह से करण के चेहरे और उनके होंठों पर चला गया।
करण को भी शायद इस बात का अहसास हो गया था कि वर्षा का ध्यान पढ़ाई से ज्यादा उन पर है, इसलिए उन्होंने अचानक बात करना बंद कर दिया और सीधे वर्षा की आंखों में देखा। केबिन की मद्धम रोशनी में दोनों के बीच का तनाव साफ महसूस किया जा सकता था, जहां टीचर और स्टूडेंट की बाउंड्रीज धीरे-धीरे धुंधली हो रही थीं। करण ने बेहद धीमी लेकिन गहरी आवाज में पूछा कि क्या तुम्हें सच में कोडिंग समझ आ रही है या कुछ और बात है, वर्षा। वर्षा के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था, उसने बस अपनी नजरें झुका लीं जो उसकी खामोश रजामंदी को बयां कर रही थीं।
करण ने धीरे से वर्षा के चेहरे को अपनी उंगलियों से ऊपर उठाया और उनकी इस छुअन से वर्षा के पूरे बदन में एक करंट सा दौड़ गया। इस पल में कोई स्ट्रिक्टनेस नहीं थी, कोई रूल्स नहीं थे, बस दो लोगों के बीच का बेपनाह अट्रैक्शन था जो काफी समय से पनप रहा था। करण ने आगे बढ़कर वर्षा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, और यह किस इतनी पैशनेट और इंटेंस थी कि वर्षा खुद को पूरी तरह से भूल गई। केबिन के बंद दरवाजे के पीछे शुरू हुई यह दास्तान अब सिर्फ एक क्रश नहीं थी, बल्कि एक मुकम्मल और बिना किसी बंदिश वाले प्यार की शुरुआत बन चुकी थी।
इश्क का नया सिलेबस Part-2
उस शाम के बाद से वर्षा और करण की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी, जहां कॉलेज में वे एक सख्त प्रोफेसर और स्टूडेंट थे, वहीं कॉलेज के बाहर उनकी अपनी एक अलग दुनिया थी। वे अक्सर शहर के दूर-दराज के कैफे में मिलते, जहां करण का वो स्ट्रिक्ट अंदाज पूरी तरह से गायब हो जाता और वो एक केयरिंग और बेहद रोमांटिक पार्टनर बन जाते थे।
दोनों के बीच की इंटीमेसी और प्यार हर गुजरते दिन के साथ और भी गहरा और इंटेंस होता जा रहा था, जिसमें समाज के स्टीरियोटाइप्स की कोई जगह नहीं थी। वर्षा को करण के साथ वह फ्रीडम महसूस होती थी जो उसने पहले कभी नहीं जी थी, और करण के लिए वर्षा उनकी नीरस जिंदगी में रंगों की तरह थी।
कॉलेज का माहौल तब और भी बदल गया जब एनुअल फेस्ट और स्पोर्ट्स मीट की अनाउंसमेंट हुई, जिसने पूरे कैंपस में एक नई एनर्जी भर दी। वर्षा इस बार फेस्ट की कोर कमिटी में थी, जिसका सीधा मतलब था कि उसे फैकल्टी इंचार्ज यानी करण के साथ काफी वक्त बिताने का मौका मिलने वाला था। कॉलेज के बाकी स्टूडेंट्स को लगता था कि करण सर वर्षा को ज्यादा काम देकर परेशान कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह उन दोनों का एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का एक सीक्रेट जरिया था। देर रात तक कॉलेज के एम्प्टी ऑडिटोरियम में इवेंट्स की प्लानिंग करना और उस बीच चोरी-छिपे एक-दूसरे को चूमना उनके रूटीन का हिस्सा बन गया था।
फेस्ट के आखिरी दिन कॉलेज में एक ग्रैंड पार्टी का आयोजन किया गया था, जहां हर कोई बेहद स्टाइलिश और मॉडर्न कपड़ों में नजर आ रहा था। वर्षा ने एक बेहद खूबसूरत और बोल्ड ब्लैक ड्रेस पहनी थी, जिसमें उसकी खूबसूरती देखकर हर किसी की नजरें उस पर ही टिक गई थीं। जब करण ने पार्टी में एंट्री ली, तो वो भी वर्षा को देखकर अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे थे, हालांकि उन्हें अपनी प्रोफेशनल डिग्निटी को मेंटेन रखना था। जब डांस फ्लोर पर सभी डांस कर रहे थे, तब करण ने चुपके से वर्षा को बैकस्टेज आने का मैसेज भेजा, जहां चारों तरफ अंधेरा और सिर्फ उन दोनों की धड़कनें थीं।
बैकस्टेज के उस छोटे से केबिन में करण ने वर्षा को अपनी बांहों में कसकर भींच लिया और उसकी गर्दन पर अपनी पैशनेट किस से एक अलग ही आग लगा दी। दोनों के बीच का रोमांस उस रात अपनी चरम सीमा पर था, जहां कॉलेज का शोर बाहर था और अंदर वे दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह खोए हुए थे। इस बेबाक और बिना किसी बाउंडेशन वाले प्यार ने उन्हें एक ऐसी इंटीमेसी का अहसास कराया जो रूह तक को छू लेती थी। लेकिन इस हसीन रात के बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आने वाला था, जिसके बारे में दोनों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
पार्टी के कुछ हफ्तों बाद जब कॉलेज के फाइनल एग्जाम्स करीब आ रहे थे, वर्षा की तबीयत अचानक खराब रहने लगी और उसे लगातार चक्कर और कमजोरी महसूस होने लगी। जब उसने अपनी सहेली रिया की मदद से मेडिकल टेस्ट करवाया, तो जो सच सामने आया उसने वर्षा के पैरों तले से जमीन खिसका दी; वह प्रेग्नेंट थी। वर्षा पूरी तरह से डर गई क्योंकि वह अभी सिर्फ ग्रेजुएशन सेकंड ईयर में थी और उसका करियर अभी शुरू भी नहीं हुआ था। उसने तुरंत करण को फोन किया और रोते हुए उन्हें पूरी बात बताई, जिसके बाद करण ने उसे तुरंत अपने पर्सनल फ्लैट पर आने को कहा।
फ्लैट पर पहुंचकर जब वर्षा ने करण को देखा, तो वह फूट-फूटकर रो पड़ी और कहने लगी कि अब सब कुछ खत्म हो गया है और कॉलेज में उनकी बदनामी हो जाएगी। लेकिन करण ने उसे संभाला, अपनी बांहों में लिया और बेहद मैच्योरिटी के साथ कहा कि वे इस सिचुएशन से भागेंगे नहीं बल्कि इसका सामना मिलकर करेंगे। करण का यह सपोर्ट देखकर वर्षा को अहसास हुआ कि उनका प्यार सिर्फ फिजिकल अट्रैक्शन नहीं था, बल्कि एक लाइफ-चेंजिंग कमिटमेंट था जो हर मुश्किल से बड़ा था। करण ने फैसला किया कि वो वर्षा की पढ़ाई खराब नहीं होने देंगे और शादी का फैसला सही वक्त पर पूरे सम्मान के साथ लेंगे।
कॉलेज का थर्ड ईयर शुरू होते ही वर्षा के लिए चीजें थोड़ी मुश्किल होने लगीं, लेकिन करण ने पर्दे के पीछे रहकर उसका पूरा ख्याल रखा और उसके नोट्स से लेकर हेल्थ तक का ध्यान रखा। कॉलेज के कुछ लोगों को उनके बीच कुछ अलग होने का शक होने लगा था, जिससे कैंपस में तरह-तरह की गॉसिप्स और गलतफहमियां फैलने लगीं। कुछ प्रोफेसर्स ने करण के बिहेवियर पर सवाल उठाए, लेकिन करण ने हमेशा अपने काम और वर्षा की डिग्निटी को टॉप पर रखा और किसी को उंगली उठाने का मौका नहीं दिया। इस कंपटीशन और स्ट्रेस के बीच भी दोनों का प्यार कमजोर पड़ने के बजाय और भी ज्यादा मजबूत और मैच्योर होता चला गया।
आखिरकार वह दिन भी आ गया जब कॉलेज का फेयरवेल था और वर्षा अपने बैच की टॉपर बनकर स्टेज पर अपनी डिग्री लेने के लिए खड़ी थी। जब करण ने अपने हाथों से वर्षा को उसकी डिग्री सौंपी, तो दोनों की आंखों में बीते हुए कल के सारे संघर्ष, रोमांस और आने वाले कल के हसीन सपने साफ तैर रहे थे।
वर्षा का बेबी बंप अब थोड़ा विजिबल था, लेकिन अब उसे दुनिया के किसी स्टीरियोटाइप या जजमेंट का कोई डर नहीं था क्योंकि उसका पार्टनर उसके साथ खड़ा था। करण ने माइक पर खड़े होकर पूरी क्लास के सामने अनाउंस किया कि वह कॉलेज से अपना रेजिग्नेशन दे रहे हैं क्योंकि वह अब अपनी लाइफ की एक नई और बेहद खूबसूरत जर्नी शुरू करने जा रहे हैं।
फेयरवेल की शाम जब पूरी क्लास अपनी यादों को समेट रही थी, करण और वर्षा कॉलेज के उसी पुराने बास्केटबॉल कोर्ट के पास एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े थे। करण ने वर्षा की उंगली में एक खूबसूरत सी रिंग पहनाई और उसे अपने दिल से लगाते हुए कहा कि यह सफर तो बस एक शुरुआत थी, असली जिंदगी का सिलेबस तो अब शुरू होगा। वर्षा ने मुस्कुराते हुए करण के सीने पर अपना सिर रख दिया, और इस तरह कॉलेज रोमांस की यह कहानी बिना किसी बंदिश और समाज के झूठे दायरों को तोड़कर अपने सबसे हसीन मुकाम पर पहुंच गई।
अधूरी दास्तां की पूर्णता | एकतरफा प्यार से सच्चे प्रेम तक का सफर |