रक्त और राख Part 1
आदित्य मेहरा दिल्ली की एक बड़ी टेक कंपनी में लीड सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट था, जो स्वभाव से बेहद सीधा और अपने काम से प्यार करने वाला इंसान था। उसकी जिंदगी में सब कुछ परफेक्ट चल रहा था जब उसकी मुलाकात कायरा से हुई, जो उसी के डिपार्टमेंट में एक नई प्रोजेक्ट मैनेजर बनकर आई थी। कायरा बेहद खूबसूरत, मॉडर्न और बात करने में इतनी शातिर थी कि कोई भी उसकी बातों के जाल में आसानी से फंस सकता था। आदित्य जो आज तक सिर्फ कोडिंग और फाइलों में उलझा रहता था, पहली बार किसी के प्यार में इस कदर पागल हुआ कि उसे दुनिया की कोई और चीज दिखाई ही नहीं दे रही थी।
कायरा ने बहुत ही कम समय में आदित्य के सीधेपन का फायदा उठाकर उसके दिल में अपने लिए एक ऐसी जगह बना ली जिसे मिटाना नामुमकिन था। उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं, वन-सिडेड लव धीरे-धीरे एक पैशनेट और इंटीमेट रिलेशनशिप में बदल गया जहां आदित्य अपना सब कुछ उस पर लुटाने को तैयार था। आदित्य को लगता था कि कायरा भी उससे उतना ही प्यार करती है, लेकिन वह इस बात से पूरी तरह अनजान था कि वह सिर्फ उसकी कामयाबी और उसके बनाए गए एक मिलियन-डॉलर के एआई सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर को हड़पने का जरिया मात्र था।
इसी कहानी में एंट्री होती है कबीर सिंघानिया की, जो उसी कंपनी का वाइस प्रेसिडेंट था और एक बेहद रईस, अय्याश और घमंडी किस्म का आदमी था। कबीर और कायरा असल में पहले से ही एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे और उन दोनों ने मिलकर आदित्य को बर्बाद करने का एक खौफनाक मास्टरप्लान तैयार किया था। कायरा रात में आदित्य के साथ बेड शेयर करती थी, उसके सबसे करीब होने का नाटक करती थी और दिन में वही सारी सीक्रेट इंफॉर्मेशन और कोडिंग फाइल्स कबीर को सौंप देती थी ताकि वे दोनों मिलकर उस सॉफ्टवेयर को अपने नाम पर पेटेंट करा सकें।
एक रात जब आदित्य कायरा को सरप्राइज देने के लिए उसके फ्लैट पर बिना बताए पहुंचा, तो जो मंजर उसने देखा उसने उसके पैरों तले से जमीन खिसका दी। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था, जहां कायरा और कबीर एक साथ इंटीमेट हो रहे थे और हंस-हंसकर आदित्य के सीधेपन और उसकी बेवकूफी का मजाक उड़ा रहे थे। कायरा कबीर की बांहों में लेटकर कह रही थी कि आदित्य कितना बड़ा गधा है जो प्यार के चक्कर में अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी इन्वेंशन खोने जा रहा है और उसे भनक तक नहीं है।
आदित्य का दिल पूरी तरह टूट चुका था, उसका सदमा गुस्से और नफरत की एक ऐसी आग में बदल गया जिसे बुझाना अब किसी के बस की बात नहीं थी। लेकिन इससे पहले कि वह कमरे के अंदर जाकर उनसे सवाल करता, कबीर के पाले हुए बाउंसरों ने उसे पीछे से दबोच लिया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। कबीर ने हंसते हुए आदित्य के मुंह पर लात मारी और कहा कि कॉर्पोरेट की दुनिया में सीधे लोगों की कोई जगह नहीं होती और अब यह सॉफ्टवेयर कबीर के नाम से मार्केट में लॉन्च होगा।
इतना ही नहीं, अपनी पावर और पैसे के दम पर कबीर और कायरा ने आदित्य पर कंपनी का डेटा चोरी करने और कायरा के साथ जबरदस्ती करने का एक झूठा और संगीन केस दर्ज करवा दिया। पुलिस ने बिना सच जाने आदित्य को अरेस्ट कर लिया और मीडिया में उसकी छवि को एक सनकी आशिक और धोखेबाज क्रिमिनल के रूप में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे तीन साल की सख्त सजा सुनाई, और जब वह जेल की काल कोठरी में बंद था, तब कबीर और कायरा उस सॉफ्टवेयर को बेचकर अरबों रुपये कमा रहे थे।
जेल की सलाखों के पीछे बिताया गया हर एक दिन आदित्य के लिए किसी नरक से कम नहीं था, जहां रात के अंधेरे में वह सिर्फ कायरा के धोखे और कबीर के ठहाकों को याद करता था। उसने जेल के अंदर रोना और खुद पर रहम खाना पूरी तरह बंद कर दिया और अपने अंदर के सीधे-साधे आदित्य को हमेशा के लिए मार डाला। उसने जेल में बंद कुछ शातिर अपराधियों, हैकर्स और व्हाइट-कॉलर क्रिमिनल्स से दोस्ती की, उनसे अंडरवर्ल्ड के तौर-तरीके सीखे और अपने दिमाग को एक खतरनाक हथियार में बदल दिया।
तीन साल बाद जब आदित्य जेल से बाहर निकला, तो वह पहले जैसा कमजोर और लाचार लड़का बिल्कुल नहीं था, बल्कि उसकी आंखों में एक अजीब सा सन्नाटा और चेहरे पर खौफनाक शांति थी। उसका शरीर अब कसरत की वजह से मजबूत हो चुका था और उसका दिमाग कबीर और कायरा की सल्तनत को जड़ से उखाड़ फेंकने की एक-एक चाल को पेपर पर लिख चुका था। उसने दिल्ली के एक पॉश इलाके में एक गुमनाम नाम से एक डार्क वेब ऑपरेशंस सेंटर सेटअप किया और अपने पहले मोहरे को चलने की तैयारी की।
रक्त और राख Part 2
आदित्य ने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली थी और अब वह ‘रेवन’ के नाम से डार्क वेब और कॉर्पोरेट जगत के काले कारनामों के बीच एक जाना-माना इन्वेस्टर बन चुका था। उसने सबसे पहले कायरा की जिंदगी में एक अमीर और हैंडसम बिजनेस टाइकून बनकर एंट्री करने के लिए अपने एक ट्रेंड अंडरकवर एजेंट को भेजा। कायरा जो हमेशा से पैसे और अय्याशी की भूखी थी, कबीर के साथ रहते हुए भी बोर हो चुकी थी और वह तुरंत उस नए जाल में फंस गई क्योंकि कबीर अब उसे उतनी तवज्जो नहीं दे रहा था।
आदित्य ने अपनी हैकिंग स्किल्स का इस्तेमाल करके कबीर की कंपनी के सारे फाइनेंशियल लूपहोल्स और टैक्स चोरी के काले चिट्ठों को धीरे-धीरे एक्सेस करना शुरू कर दिया था। उसने कबीर के पर्सनल फोन को क्लोन कर लिया था, जिससे उसे पता चला कि कबीर ड्रग सिंडिकेट्स और मनी लॉन्ड्रिंग के अवैध धंधों में भी अपनी कंपनी का पैसा इनवेस्ट कर रहा था। आदित्य ने बहुत ही सफाई से कबीर के अकाउंट्स से करोड़ों रुपये ऐसे डार्क वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिए जो सीधे इंटरनेशनल टेरर फंडिंग से जुड़े हुए थे।
इधर कायरा को पूरी तरह अपने जाल में फंसाने के बाद, आदित्य ने एक रात उसे एक सुनसान और आलीशान पेंटहाउस में एक सीक्रेट डेट पर बुलाया जहां सिर्फ मोमबत्तियां जल रही थीं। कायरा जब वहां पहुंची तो उसे लगा कि उसका नया अमीर बॉयफ्रेंड उसे प्रपोज करने वाला है, लेकिन जैसे ही लाइट जली, उसके सामने व्हीलचेयर पर बैठा हुआ आदित्य दिखाई दिया। कायरा के चेहरे का रंग उड़ गया और वह डर से कांपने लगी, क्योंकि आदित्य की आंखों में उसे अपनी मौत साफ नजर आ रही थी।
आदित्य ने मुस्कुराते हुए कायरा के सामने एक बड़ी स्क्रीन ऑन की, जिस पर कबीर और कायरा के सारे प्राइवेट बेडरूम वीडियोज और उनकी सीक्रेट बातचीत लाइव स्ट्रीम हो रही थी। उसने कायरा को बताया कि उसने उन वीडियोज को डार्क वेब पर और उनके सारे कॉर्पोरेट क्लाइंट्स को मेल कर दिया है, जिससे उसका करियर और इज्जत एक पल में राख हो चुके हैं। कायरा रोते हुए उसके पैरों में गिर पड़ी और अपनी पुरानी मोहब्बत की भीख मांगने लगी, लेकिन आदित्य ने उसे लात मारकर दूर हटा दिया।
तभी उस पेंटहाउस का दरवाजा टूटता है और कबीर अपने हाथों में गन लिए गुस्से से पागल होकर अंदर घुसता है, क्योंकि उसे पता चल चुका था कि उसका बिजनेस बर्बाद हो चुका है। कबीर ने आदित्य पर गोली चलानी चाही, लेकिन आदित्य ने पहले से ही वहां मौजूद हिडन गैस चैंबर को एक्टिवेट कर दिया था जिससे कबीर के हाथ से गन छूट गई। आदित्य व्हीलचेयर से खड़ा हुआ, जो कि सिर्फ एक नाटक था, और उसने कबीर को इतनी बेरहमी से पीटना शुरू किया कि कबीर के जबड़े और पसलियां टूट गईं।
आदित्य ने कबीर के बालों को पकड़कर उसे स्क्रीन की तरफ देखने पर मजबूर किया, जहां टीवी पर न्यूज चल रही थी कि कबीर सिंघानिया की कंपनी को देशद्रोही और टेरर फंडिंग के आरोप में सील कर दिया गया है। पुलिस की गाड़ियां उसी वक्त उस बिल्डिंग के नीचे सायरन बजाते हुए पहुंच रही थीं, क्योंकि आदित्य ने सारे सबूत पहले ही सीबीआई को अनाम सोर्स से भेज दिए थे। कबीर और कायरा जो कभी आसमान पर उड़ रहे थे, अब एक दूसरे को अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानकर आपस में ही लड़ने और रोने लगे थे।
आदित्य ने अपनी गन निकाली लेकिन उसने उन दोनों को गोली नहीं मारी, क्योंकि उसका मानना था कि मौत तो बहुत आसान सजा है, असली मजा तो उन्हें घुट-घुट कर जीने देने में है। उसने कमरे के सारे सबूत समेटे, अपनी ब्लैक लेदर जैकेट पहनी और कबीर-कायरा को उसी बंद कमरे में पुलिस के हवाले होने के लिए छोड़ दिया। जब पुलिस कमरे के अंदर घुसी, तो उन्होंने देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट क्रिमिनल्स को खून से लथपथ और पागलों की तरह रोते हुए पाया, जबकि उनका साम्राज्य पूरी तरह खत्म हो चुका था।
इस पूरे खौफनाक खेल के बाद आदित्य ने उस शहर को हमेशा के लिए छोड़ दिया और एक नई पहचान के साथ किसी शांत समंदर के किनारे अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की। उसका प्रतिशोध अब पूरा हो चुका था, लेकिन इस सफर ने उसके मासूम दिल को एक कभी न पिघलने वाले पत्थर में बदल दिया था। उसने साबित कर दिया था कि जब एक सीधे और सच्चे इंसान को हद से ज्यादा प्रताड़ित किया जाता है, तो उसका बदला किसी भी बॉलीवुड या हॉलीवुड की स्क्रिप्ट से कहीं ज्यादा खतरनाक और मुकम्मल होता है।
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