मायावी साया part-1
न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतों के बीच घिरा हुआ शिखर का आलीशान अपार्टमेंट उसकी सफलता का प्रतीक था, लेकिन उसके भीतर का सन्नाटा कुछ और ही बयां करता था। वह वॉल स्ट्रीट का एक बेहद होनहार और प्रतिष्ठित क्वांटिटेटिव एनालिस्ट था, जिसके दिमाग की बुनावट जटिल गणितीय सूत्रों और डेटा पैटर्न्स को सुलझाने में माहिर थी।
भारत के एक छोटे से शहर से निकलकर अमेरिका के इस वित्तीय गढ़ में अपनी सल्तनत खड़ी करने वाले शिखर की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती थी, अंदर से उतनी ही खोखली और रहस्यमयी हो चुकी थी। पिछले कुछ महीनों से उसे लगातार ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई उसकी हर हरकत पर पैनी नजर रख रहा है, जो उसकी सोच से भी परे था। उसके घर की खिड़कियों के पर्दे जब हवा के बिना भी धीरे से हिलते, तो उसका दिल किसी अनजान डर से जोर-जोर से धड़कने लगता था।
शिखर की रातों की नींद पूरी तरह उड़ चुकी थी और वह अपनी डायरी में अजीबोगरीब घटनाओं का ब्यौरा दर्ज करने लगा था, जिन्हें वह किसी से साझा नहीं कर सकता था। उसे अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर कुछ ऐसे कोड दिखाई देते थे जो उसने कभी खुद लिखे ही नहीं थे, जिससे उसका तनाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था।
जब भी वह अपने भव्य लिविंग रूम के शीशे के सामने खड़ा होता, उसे अपनी ही परछाई में एक अजीब सा अजनबीपन और क्रूरता का अहसास होने लगता था। उसने अपनी इस बढ़ती हुई मानसिक अस्थिरता को दूर करने के लिए डॉ. एवलिन वेंस नाम की एक मशहूर और बेहद ठंडी फेशियल एक्सप्रेशन वाली मनोचिकित्सक से मिलना शुरू किया। डॉ. एवलिन ने उसकी बातों को बहुत ही ध्यान से सुना और उसे आश्वासन दिया कि यह सब अत्यधिक काम के दबाव और न्यू यॉर्क की अकेली जीवनशैली का नतीजा है।
मायावी साया part-2
शिखर का रोज का जीवन अब एक ऐसी भूलभुलैया बन चुका था, जहां हकीकत और मतिभ्रम के बीच का अंतर पूरी तरह से मिटता जा रहा था। एक शाम जब वह अपने कार्यालय से थका-हारा घर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पसंदीदा कॉफी टेबल पर एक पुरानी भारतीय तांबे की अंगूठी रखी हुई थी।
वह अंगूठी हूबहू वैसी ही थी जैसी उसकी मां ने उसे बचपन में दी थी, जो सालों पहले भारत में एक रहस्यमयी कार दुर्घटना में खो गई थी। इस अप्रत्याशित चीज को देखकर शिखर के माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं और उसका पूरा शरीर डर के मारे बुरी तरह कांपने लगा। उसने तुरंत अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड को फोन किया, लेकिन गार्ड ने दृढ़ता से कहा कि उस दिन उसके फ्लोर पर कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं आया था।
अगले ही दिन शिखर को उसके निजी ईमेल पर एक अनाम यूजर से एक छोटा सा वीडियो क्लिप मिला, जिसने उसकी बची-कुची मानसिक शांति को भी पूरी तरह से तबाह कर दिया। उस वीडियो में कोई और नहीं बल्कि खुद शिखर ही था, जो रात के घने अंधेरे में अपने ही अपार्टमेंट में सोती हुई अवस्था में चल रहा था।
वीडियो में उसका चेहरा बिल्कुल भावहीन था और वह दीवार पर किसी अनजान भाषा में उंगलियों से कुछ अजीब से निशान बना रहा था। इस खौफनाक दृश्य को देखकर शिखर का खुद पर से विश्वास पूरी तरह उठ गया और उसे लगने लगा कि उसका अपना शरीर ही उसके खिलाफ कोई गहरी साजिश रच रहा है। उसने डॉ. एवलिन को फोन करके तुरंत मिलने का समय मांगा, क्योंकि अब वह इस भयानक मानसिक प्रताड़ना को अकेले बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं था।
डॉ. एवलिन के क्लिनिक का माहौल हमेशा की तरह बेहद शांत, धुंधली रोशनी से भरा हुआ और किसी हद तक रीढ़ में सिहरन पैदा करने वाला था। शिखर ने कांपते हुए हाथों से वह वीडियो क्लिप डॉक्टर को दिखाई और अपने भीतर बढ़ते हुए इस असहनीय पागलपन के डर को पूरी तरह से बयां किया। डॉक्टर ने बिना किसी विशेष भाव के वीडियो को देखा और फिर चश्मा उतारकर शिखर की आंखों में सीधे देखते हुए एक बेहद अजीब सी बात कही।
उन्होंने कहा कि कभी-कभी हमारा अवचेतन मन उन अनसुलझे रहस्यों और अपराधबोध को बाहर निकालता है, जिन्हें हम अपने सचेतन दिमाग से पूरी तरह मिटा चुके होते हैं। शिखर को डॉक्टर की बातों में एक अजीब सा हेरफेर और छिपा हुआ मकसद महसूस हुआ, जिसने उसकी घबराहट को शांत करने के बजाय और ज्यादा बढ़ा दिया।
उस रात जब शिखर अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था, तो उसे अपने बेडरूम के वेंटिलेशन शाफ्ट से किसी के फुसफुसाने की बेहद धीमी और डरावनी आवाजें सुनाई देने लगीं। वह आवाज बार-बार उसका नाम पुकार रही थी और उसे याद दिला रही थी कि उसने अतीत में जो कुछ भी किया था, उसका हिसाब देने का समय अब आ चुका है।
शिखर तकिये को अपने कानों पर दबाकर उस आवाज से बचने की कोशिश करने लगा, लेकिन वह आवाज उसके दिमाग के अंदर तक गहराई से गूंज रही थी। वह उठकर पूरे घर की लाइटें जलाने लगा, लेकिन तभी अचानक पूरे अपार्टमेंट की बिजली गुल हो गई और वह पूरी तरह से घने, अभेद्य अंधेरे में डूब गया। उसे महसूस हुआ कि अंधेरे में कोई उसके बेहद करीब खड़ा है और उसकी गर्म सांसें उसकी गर्दन पर साफ महसूस हो रही थीं।
सुबह होते ही शिखर ने इस रहस्य की तह तक जाने का फैसला किया और उसने अपने अपार्टमेंट में गुप्त रूप से कई आधुनिक मोशन-डिटेक्टर कैमरे फिट करवा दिए। वह जानना चाहता था कि जब वह सो रहा होता है, तो वास्तव में उस बंद कमरे के भीतर कौन सी अदृश्य ताकतें सक्रिय हो जाती हैं।
उसने अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली और खुद को पूरी तरह से उस आलीशान फ्लैट के भीतर कैद कर लिया, जो अब एक जेल जैसा लग रहा था। उसने अपने भोजन की डिलीवरी भी पूरी तरह से बंद कर दी और केवल सीलबंद डिब्बाबंद खाना और पानी पीना शुरू किया, ताकि कोई उसे जहर न दे सके। उसका यह बढ़ता हुआ पागलपन और अपरिचितों के प्रति गहरा संदेह अब उसके व्यक्तित्व को पूरी तरह से निगलने लगा था।
तीसरे दिन की सुबह जब उसने कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच की, तो उसके पैरों तले की जमीन पूरी तरह से खिसक गई और वह स्तब्ध रह गया। फुटेज में साफ दिख रहा था कि रात के ठीक दो बजे डॉ. एवलिन वेंस उसके बेडरूम का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हुई थीं और उसके बिस्तर के पास खड़ी थीं।
उन्होंने शिखर को एक खास तरह का इंजेक्शन दिया, जिसके बाद शिखर सम्मोहन की स्थिति में उठ खड़ा हुआ और उनके निर्देशों का पालन करने लगा। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि डॉ. एवलिन के पास उसके घर की डिजिटल चाबी थी, जिसे केवल शिखर का बेहद करीबी ही हासिल कर सकता था। शिखर का दिमाग अब तेजी से काम करने लगा और उसे समझ आ गया कि वह किसी बहुत बड़ी और बेहद खतरनाक मनोवैज्ञानिक साजिश का शिकार बन चुका है।
मायावी साया part-3

शिखर ने बिना कोई समय गंवाए डॉ. एवलिन के अतीत के बारे में न्यूयॉर्क के कुछ भूमिगत और अवैध डेटा ब्रोकर नेटवर्क के जरिए गहराई से छानबीन शुरू कर दी। जांच के दौरान जो तथ्य निकलकर सामने आए, उन्होंने शिखर के होश उड़ा दिए और उसके पूरे अस्तित्व को हिलाकर रख दिया। डॉ. एवलिन का असली नाम दरअसल एवलिन वेंस नहीं था, बल्कि वह भारत के उसी शहर से ताल्लुक रखती थी जहां शिखर का बचपन बीता था।
वह शिखर के पिता के पुराने बिजनेस पार्टनर जगन्नाथ की इकलौती बेटी अंजलि थी, जिसका पूरा परिवार एक वित्तीय घोटाले के बाद पूरी तरह बर्बाद हो गया था। उस घोटाले के पीछे किसी और का नहीं बल्कि खुद शिखर के पिता का हाथ था, जिन्होंने जगन्नाथ को धोखा देकर सारी संपत्ति अपने नाम कर ली थी।
शिखर को अब याद आया कि बचपन में उसके पिता ने किस तरह एक मासूम परिवार को सड़क पर आने के लिए मजबूर कर दिया था, जिसके गम में जगन्नाथ ने आत्महत्या कर ली थी। अंजलि यानी डॉ. एवलिन उसी भयानक और दर्दनाक अतीत का बदला लेने के लिए इतने सालों से एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रही थी।
उसने अमेरिका आकर अपनी पहचान बदली, मनोविज्ञान की उच्च शिक्षा हासिल की और शिखर के जीवन में सही वक्त पर एक मसीहा बनकर दाखिल हुई। उसका मकसद शिखर को शारीरिक रूप से मारना नहीं था, बल्कि उसे मानसिक रूप से पूरी तरह से पागल घोषित करके उसकी सारी संपत्ति और प्रतिष्ठा को जमींदोज करना था। वह उसे एक ऐसे मनोरोगी के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहती थी जो खुद अपनी जान लेने पर आमादा हो।
इस खौफनाक सच्चाई का पता चलते ही शिखर के भीतर का डर अचानक एक बेहद ठंडे और खतरनाक गुस्से में तब्दील हो गया। उसने समझ लिया कि अगर वह पुलिस के पास जाएगा, तो डॉ. एवलिन अपने प्रभाव और चिकित्सा दस्तावेजों के बल पर उसे ही मानसिक रूप से विक्षिप्त साबित कर देगी। इसलिए उसने इस मनोवैज्ञानिक शतरंज के खेल को डॉक्टर के ही खिलाफ खेलने का एक बेहद शातिर और अचूक प्लान तैयार करने का मन बना लिया।
उसने अगले सत्र के लिए डॉ. एवलिन के क्लिनिक जाने का नाटक किया, जैसे कि उसे अभी तक किसी भी सच्चाई की भनक नहीं लगी हो। उसने डॉक्टर के सामने अपनी मानसिक हालत के और ज्यादा बिगड़ने का ढोंग रचा, जिससे डॉक्टर के चेहरे पर एक छिपी हुई संतुष्टि की मुस्कान तैर गई।
शिखर ने डॉक्टर से कहा कि अब उसे हर जगह केवल खून के धब्बे और अपने मरे हुए पिता की आत्मा दिखाई देती है जो उसे अपनी जान लेने के लिए उकसाती है। डॉ. एवलिन ने उसकी इस बात का फायदा उठाते हुए उसे एक नई और बेहद शक्तिशाली एंटी-साइकोटिक दवा की भारी खुराक लेने की सलाह दी।
शिखर ने वह दवा ले ली, लेकिन उसने उसे निगलने के बजाय अपनी जीभ के नीचे छुपा लिया और क्लिनिक से बाहर आते ही उसे थूक दिया। वह जान चुका था कि वह दवा वास्तव में उसके सोचने-समझने की क्षमता को हमेशा के लिए पूरी तरह से नष्ट करने के लिए दी गई थी। उसने अपने अपार्टमेंट में लौटकर एक ऐसा जाल बुना, जो डॉ. एवलिन के पूरे वजूद को हमेशा-हमेशा के लिए मिटाने की ताकत रखता था।
उसने अपने अपार्टमेंट के सभी खुफिया कैमरों को सीधे एक सुरक्षित क्लाउड सर्वर से जोड़ दिया और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग अपने कुछ भरोसेमंद वकीलों को फॉरवर्ड कर दी। अगली रात उसने नाटक किया कि वह दवा के ओवरडोज के कारण पूरी तरह से बेहोश और असहाय अवस्था में अपने लिविंग रूम के फर्श पर पड़ा हुआ है।
उम्मीद के मुताबिक, डॉ. एवलिन उसकी इस हालत का अंतिम रूप से फायदा उठाने और इस खेल को खत्म करने के लिए उसके अपार्टमेंट में दाखिल हुई। उसके हाथ में एक सुसाइड नोट था, जिसे वह शिखर के जाली हस्ताक्षरों के साथ वहां छोड़कर इसे एक अवसाद के कारण की गई आत्महत्या का रूप देना चाहती थी। वह फर्श पर पड़े शिखर के पास आई और उसके चेहरे को देखकर एक ठंडी, डरावनी और हिंसक हंसी हंसने लगी।
डॉ. एवलिन ने शिखर के कान के पास झुककर कहा कि तुम्हारे पिता ने मेरे हंसते-खेलते परिवार को श्मशान बना दिया था, और आज मैं तुम्हें इस मुकाम पर लाकर अपना बदला पूरा कर रही हूं। उसने जैसे ही शिखर की बांह में जहर का आखिरी इंजेक्शन लगाने के लिए सिरिंज उठाई, शिखर ने अचानक फुर्ती से उसकी कलाई को पूरी ताकत से पकड़ लिया।
उसकी आंखें पूरी तरह से खुली हुई थीं और उनमें पागलपन के बजाय एक बेहद ठंडी, सधी हुई और जानलेवा बुद्धिमत्ता चमक रही थी। डॉक्टर के चेहरे का रंग उड़ गया और उसने खुद को छुड़ाने की पूरी कोशिश की, लेकिन शिखर की पकड़ किसी लोहे के शिकंजे की तरह मजबूत थी। उसने डॉक्टर को ऊपर देखने का इशारा किया, जहां दीवार के कोने में लगा रेड-लाइट कैमरा उनकी हर एक हरकत और कबूलनामे को लाइव रिकॉर्ड कर रहा था।
शिखर ने बेहद शांत और धीमी आवाज में कहा कि खेल अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है डॉक्टर, या मुझे तुम्हें अंजलि कहकर पुकारना चाहिए। उसी वक्त अपार्टमेंट का मुख्य दरवाजा भारी आवाज के साथ खुला और न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के जासूसों की एक पूरी टीम हथियारों के साथ अंदर दाखिल हो गई।
डॉ. एवलिन को अपनी इस करारी और अप्रत्याशित हार का अहसास हो गया और उसके हाथ से वह सुसाइड नोट और सीरिंज फर्श पर गिर गए। उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और जब उसे हथकड़ी पहनाकर ले जाया जा रहा था, तो उसने मुड़कर शिखर को एक बेहद नफरत भरी नजर से देखा। शिखर खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया और न्यू यॉर्क की टिमटिमाती रोशनी को देखने लगा, जहां अब उसके दिमाग का साया पूरी तरह से छंट चुका था।
सपनों के गलियारे और धड़कनों की गूँज
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