एक अधूरी धुन, एक पूरा गीत

एक अधूरी धुन, एक पूरा गीत: टकराव और आकर्षण,गलतफहमियां और फैसले

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एक अधूरी धुन, एक पूरा गीत part -1: टकराव और आकर्षण

कैम्पस के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ज़रीन अपनी बीसीए की कोडिंग असाइनमेंट सुलझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका ध्यान लगातार सामने बने कैफ़े की तरफ जा रहा था। कॉलेज का नया सेमेस्टर अभी शुरू ही हुआ था और हवा में एक अजीब सी ताजगी और उत्साह घुला हुआ था, जिसने हर दिल को अपनी गिरफ्त में ले रखा था।

ज़रीन बेहद खूबसूरत, मासूम और अपनी पढ़ाई के प्रति बेहद संजीदा लड़की थी, जिसकी बड़ी-बड़ी आँखों में अपने करियर को लेकर कई बड़े और हसीन ख्वाब तैर रहे थे। उसकी सादगी और शांत स्वभाव ऐसा था कि जो भी उसे एक बार देख लेता, वह उसकी तरफ खींचा चला आता था, लेकिन ज़रीन को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं था।

तभी कैफ़े के पास बुलेट की एक तेज़ आवाज़ गूंजी और पूरे कैम्पस की लड़कियों की निगाहें खुद-ब-खुद उस दिशा में मुड़ गईं जहाँ से वह आवाज़ आ रही थी। वह असद था, कॉलेज का सबसे लोकप्रिय लड़का जो एमसीए फाइनल ईयर का छात्र था और जिसकी एक झलक पाने के लिए जूनियर छात्र हमेशा उत्सुक रहते थे। असद का प्रभावशाली व्यक्तित्व, गहरी संजीदा आँखें और चेहरे पर हमेशा रहने वाला एक आत्मविश्वासी भाव उसे दूसरों से बिल्कुल अलग और आकर्षक बनाता था। वह जितना गंभीर और अपने काम में व्यस्त लगता था, असल में उसका दिमाग कोडिंग और टेक्नोलॉजी की दुनिया में उतना ही शातिर और जीनियस माना जाता था।

ज़रीन ने अपनी आँखें सिकोड़कर उस तरफ देखा और मन ही मन बुदबुदाई कि कुछ लोग सिर्फ अपनी धाक जमाने के लिए ही कॉलेज आते हैं और दूसरों का समय बर्बाद करते हैं। उसने अपनी कॉपियां समेटीं और कंप्यूटर लैब की तरफ बढ़ गई, जहाँ उसे अपनी नई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का एक मुश्किल प्रोजेक्ट समय पर सबमिट करना था।

जैसे ही उसने लैब का भारी दरवाज़ा खोला, अंदर का ठंडा माहौल और कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी ने उसका स्वागत किया, जो उसकी उलझन को थोड़ा कम करने के लिए काफी थी। वह एक कोने वाली सीट पर बैठ गई और पूरी शिद्दत से अपने कोड को टाइप करने में मसरूफ हो गई, जहाँ बाहरी दुनिया का कोई दखल नहीं था।

कुछ ही देर बीती थी कि उसके ठीक बगल वाली चेयर पर कोई आकर बैठ गया और उस शख्स की उपस्थिति ने ज़रीन का ध्यान पूरी तरह से भटका दिया। उसने मुड़कर देखा तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसके बगल में कोई और नहीं बल्कि वही गंभीर और शांत दिखने वाला असद बैठा हुआ था, जो अपनी स्क्रीन पर उंगलियां चला रहा था।

असद ने एक पल के लिए ज़रीन की तरफ देखा और उसकी आँखों में छिपी मासूमियत को भांपकर उसके होंठों पर एक हल्की और गहरी मुस्कान तैर गई, जिसने ज़रीन के दिल की धड़कन को अचानक बढ़ा दिया। ज़रीन ने तुरंत अपना चेहरा घुमा लिया और खुद को सामान्य दिखाने की नाकाम कोशिश करते हुए अपने कीबोर्ड पर ज़ोर-ज़ोर से उंगलियां चलाने लगी।

“अगर इस तरह से कीबोर्ड को पीटोगी तो कोड रन होने से पहले ही यह कंप्यूटर दम तोड़ देगा, जूनियर,” असद की गहरी और नपी-तुली आवाज़ सीधे ज़रीन के कानों से टकराई। ज़रीन ने सकपकाकर उसे देखा और अपनी आवाज़ में थोड़ा सा रुखापन लाते हुए कहा कि उसे किसी सीनियर की अनचाही सलाह की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।

असद को उसका यह तीखा अंदाज़ बेहद पसंद आया, क्योंकि अमूमन लोग उसके सामने आते ही अपनी सहजता खो बैठते थे, पर यह लड़की अलग थी। उसने ज़रीन की स्क्रीन पर एक नज़र डाली, जहाँ सिंटैक्स एरर की वजह से लाल लाइनें चमक रही थीं, और बिना कुछ कहे उसने अपना हाथ ज़रीन के हाथ के पास लाकर माउस पकड़ लिया।

असद का हाथ जब ज़रीन के हाथ के बेहद करीब आया, तो एक अनजान सी छुअन और अनकहे अहसास का करंट ज़रीन के पूरे वजूद में दौड़ गया, जिससे उसकी सांसें थम सी गईं। असद ने कुछ ही सेकंड में उस पेचीदा एरर को ठीक कर दिया और ज़रीन के बेहद करीब झुकते हुए धीमे से कहा कि कोडिंग में ताकत की नहीं बल्कि सही लॉजिक की जरूरत होती है।

ज़रीन को असद की सांसों की गर्माहट अपने करीब महसूस हो रही थी, जिससे उसका चेहरा शर्म और एक अजीब से आकर्षण से लाल हो गया था और वह कुछ बोल नहीं पाई। असद अपनी जादुई मुस्कान बिखेरते हुए वहाँ से उठकर चला गया, लेकिन ज़रीन के दिल का सुकून हमेशा के लिए अपने साथ ले गया।

इस पहली मुलाकात के बाद कैम्पस में दोनों का सामना अक्सर होने लगा, कभी लाइब्रेरी के गलियारों में तो कभी सालाना टेक-फेस्ट की तैयारियों के दौरान जहाँ दोनों की टीमें हिस्सा ले रही थीं। असद जितना ज़रीन के करीब आने की कोशिश करता, ज़रीन खुद को अपनी पढ़ाई और सपनों के पीछे छिपाकर उतना ही उससे दूर भागने का नाटक करती रहती थी।

उनके बीच का यह अनकहा खिंचाव पूरे कॉलेज के लिए एक गॉसिप बन चुका था, जहाँ हर कोई इस खूबसूरत जोड़ी के बारे में बातें कर रहा था। ज़रीन के दोस्त उसे चिढ़ाते थे कि असद जैसा लड़का किसी के लिए इतना संजीदा नहीं हुआ, पर ज़रीन अपने दिल की बढ़ती धड़कनों को मानने से इंकार करती रही।

सर्दियों की एक शाम जब पूरा कैम्पस खाली हो चुका था और आसमान में काले बादल छाए हुए थे, ज़रीन लाइब्रेरी से अपनी भारी किताबें लेकर हॉस्टल की तरफ जा रही थी। अचानक ज़ोरदार बारिश शुरू हो गई और वह खुद को भीगने से बचाने के लिए कैम्पस के एक पुराने शेड के नीचे जाकर खड़ी हो गई, जहाँ हवा के ठंडे झोंके उसे कंपा रहे थे।

तभी सामने से असद अपनी काली जैकेट पहने हुए दौड़ता हुआ आया और सीधे उसी शेड के नीचे ज़रीन के बिल्कुल करीब आकर खड़ा हो गया, जिससे दोनों के बीच की दूरी लगभग खत्म हो गई। पानी की बूंदें असद के बालों से टपककर उसके चेहरे को भिगो रही थीं, जिससे उसकी आँखों की गहराई और भी ज्यादा सम्मोहक लग रही थी।

“तुम हमेशा मुझसे दूर भागने की कोशिश क्यों करती हो ज़रीन, क्या तुम्हें मुझसे डर लगता है या फिर खुद के जज्बातों से?” असद ने ज़रीन की आँखों में सीधे देखते हुए एक ऐसा सवाल किया जिसने ज़रीन की बची-खुची हिम्मत को भी तोड़ कर रख दिया। ज़रीन ने घबराकर अपनी नजरें झुका लीं और कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, वह बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती है और इन फालतू की बातों के लिए उसके पास वक्त नहीं है। असद एक कदम और आगे बढ़ा, जिससे ज़रीन पीछे दीवार से जा लगी और असद ने अपने दोनों हाथ दीवार पर टिकाकर उसे अपने घेरे में ले लिया, जिससे दोनों के बीच की हवा भी थम गई।

इस चरम आकर्षण और रूहानी निकटता के क्षण में ज़रीन को असद के दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं, जो उसके खुद के दिल की रफ्तार से मैच कर रही थीं। असद ने धीरे से अपनी उंगलियों से ज़रीन के चेहरे पर आई गीली जुल्फों को हटाया, और उसकी उंगलियों का वह कोमल स्पर्श ज़रीन की पूरी चेतना में एक सिहरन पैदा कर गया।

दोनों की सांसें एक-दूसरे में उलझ रही थीं और असद की झुकी हुई नजरें ज़रीन के गुलाबी और कांपते हुए होंठों पर टिक गई थीं, जहाँ पवित्र प्रेम और बेइंतहा आकर्षण का एक अनकहा तूफ़ान उमड़ रहा था। ज़रीन ने धीरे से असद की जैकेट को अपनी उंगलियों में भींच लिया, मानो वह इस हसीन पल में खुद को पूरी तरह खो देना चाहती हो।

तभी अचानक आसमान में बिजली कड़की और ज़रीन होश में आते हुए असद को पीछे धकेल कर उस बारिश में ही हॉस्टल की तरफ भाग खड़ी हुई, जिससे असद वहीं खड़ा मुस्कुराता रह गया। उस रात ज़रीन सो नहीं सकी, क्योंकि असद की छुअन और उसकी आँखों की वो रूहानी शिद्दत उसके बंद होते ही पलकों के सामने आ जाती थी और उसे बेचैन कर देती थी।

वह समझ चुकी थी कि जिसे वह सिर्फ एक इत्तेफाक समझ रही थी, वह असल में उसके दिल का सबसे खूबसूरत और गहरा अहसास बन चुका था जिसे झुठलाना नामुमकिन था। लेकिन कॉलेज की जिंदगी जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी होती नहीं, क्योंकि यहाँ सपनों के साथ-साथ ईर्ष्या और कॉम्पिटिशन की एक अंधी दौड़ भी शामिल होती है।

एक अधूरी धुन, एक पूरा गीत part -2 : गलतफहमियां और फैसले

एक अधूरी धुन, एक पूरा गीत

कॉलेज का सालाना ‘नेशनल कोडिंग हैकाथॉन’ शुरू होने वाला था, जो दोनों के करियर के लिए सबसे बड़ा और अहम प्लेटफॉर्म था और इसमें जीतने वाले को विदेश में स्कॉलरशिप मिलने वाली थी। असद अपनी टीम का लीडर था और ज़रीन अपनी बीसीए टीम को लीड कर रही थी, जिससे दोनों के बीच का निजी प्यार अब एक कड़े मुकाबले में तब्दील हो चुका था।

असद ज़रीन की प्रतिभा का कायल था, लेकिन कॉलेज के कुछ जलने वाले लड़कों को यह बात हजम नहीं हो रही थी कि असद एक जूनियर लड़की के सामने थोड़ा नरम पड़ रहा था। उन्होंने दोनों के बीच एक ऐसी दीवार खड़ी करने की साजिश रची जो उनके इस प्योर और मासूम रिश्ते को हमेशा के लिए तबाह कर सकती थी।

हैकाथॉन के ठीक एक दिन पहले ज़रीन का मुख्य कोडिंग प्रोजेक्ट फाइल अचानक कॉलेज के सर्वर से गायब हो गई और पूरा इल्जाम असद की टीम पर आ गया, क्योंकि उस सर्वर का एक्सेस सिर्फ असद के पास था। जब ज़रीन ने यह बात सुनी तो उसका दिल टूट गया, उसे लगा कि असद ने उसे हराने के लिए और खुद को बेहतर साबित करने के लिए उसके साथ यह घिनौना खेल खेला है।

वह गुस्से और आंसुओं से भरी आँखों के साथ सीधे असद के पास पहुंची और सबके सामने उस पर धोखा देने का आरोप लगा दिया, जिससे असद का स्वाभिमान पूरी तरह आहत हो गया। असद ने अपनी बेगुनाही की सफाई देनी चाही, लेकिन ज़रीन के कड़वे शब्दों ने उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया।

“मैंने सोचा था कि तुम दिल के साफ़ हो असद, लेकिन तुमने साबित कर दिया कि जीतने के लिए तुम किसी भी हद तक गिर सकते हो और मेरे भरोसे का कत्ल कर सकते हो,” ज़रीन ने रोते हुए कहा और बिना असद का जवाब सुने वहाँ से पलटकर चली गई। असद की आँखों में उस समय जो दर्द और गुस्सा था, उसने उसे अंदर तक झकझोर दिया, क्योंकि वह ज़रीन से बेइंतहा मोहब्बत करने लगा था और उसकी नज़र में गिरना उसके लिए असहनीय था। उसने ठान लिया कि वह इस साजिश के पीछे के असली चेहरे को सबके सामने लाएगा, चाहे इसके लिए उसे पूरी रात जागकर कोडिंग लॉग्स को ही क्यों न खंगालना पड़े।

पूरी रात असद ने कंप्यूटर लैब में बिना पलक झपकाए गुज़ारी और सुबह होते-होते उसने उस असली हैकर का पता लगा लिया जो असद का ही एक जलनखोर क्लासमेट था, जिसने ज़रीन का प्रोजेक्ट डिलीट किया था ताकि दोनों अलग हो जाएं। असद ने वह सारे सबूत कॉलेज के डीन और ज़रीन के सामने रख दिए, जिससे सच पानी की तरह साफ़ हो गया और ज़रीन के पैरों तले से जमीन खिसक गई।

ज़रीन को अपनी गलती और असद पर किए गए झूठे शक का बेहद अफसोस हुआ, और उसकी आँखें शर्मिंदगी और पछतावे के आंसुओं से भर गईं। उसने असद से माफ़ी मांगनी चाही, लेकिन असद का दिल इस बार इतनी बुरी तरह टूटा था कि उसने ज़रीन की तरफ देखना भी मुनासिब नहीं समझा।

हैकाथॉन का रिजल्ट आया और उम्मीद के मुताबिक असद की टीम ने पहला स्थान हासिल किया, जिसके तहत उसे कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में आगे की पढ़ाई के लिए फुल स्कॉलरशिप का ऑफर मिला। पूरे कॉलेज में जश्न का माहौल था, लेकिन असद और ज़रीन के बीच एक ऐसी खामोशी छा गई थी जिसे कोई भी तोड़ नहीं पा रहा था, और दोनों के रास्ते अब हमेशा के लिए जुदा होने वाले थे।

ज़रीन हर पल असद से बात करने की कोशिश करती, लेकिन असद का रूखा व्यवहार और उसकी खामोशी ज़रीन को अंदर ही अंदर तड़पा रही थी, जो उसके प्यार की असली परीक्षा थी। उसे अहसास हो चुका था कि असद के बिना उसके सारे सपने, सारी डिग्रियां और यह पूरी कामयाबी बिल्कुल बेमानी और अधूरी है।

असद के जाने का दिन आ गया था और उसकी फ्लाइट शाम की थी, पूरा कॉलेज उसे विदा करने के लिए मेन गेट पर इकट्ठा था लेकिन ज़रीन安置 वहाँ कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। असद की नज़रें लगातार भीड़ में उस एक चेहरे को ढूंढ रही थीं जिसे वह अपनी आखिरी सांस तक भूल नहीं सकता था, लेकिन ज़रीन का न आना उसके दिल में एक टीस छोड़ रहा था।

उसने भारी मन से अपना बैग उठाया और टैक्सी में बैठकर एयरपोर्ट की तरफ निकल गया, यह सोचते हुए कि शायद उनकी कहानी का अंत यहीं तक लिखा था। उधर ज़रीन अपने हॉस्टल के कमरे में फूट-फूट कर रो रही थी, तभी उसे असद की छोड़ी हुई एक डायरी मिली जो उसने लैब में उसकी टेबल पर छोड़ दी थी।

ज़रीन ने जब उस डायरी को खोला तो उसमें उसकी कई सारी तस्वीरें थीं जो असद ने छुपकर खींची थीं, और हर पन्ने पर ज़रीन के लिए असद की बेपनाह मोहब्बत के किस्से लिखे हुए थे। आखिरी पन्ने पर लिखा था, ‘नफरत और शक के इस दौर में मेरा प्यार हमेशा सच्चा रहेगा ज़रीन, चाहे मैं तुमसे कितनी भी दूर चला जाऊं, मेरा दिल यहीं रहेगा।’

यह पढ़ते ही ज़रीन के अंदर का सारा डर और झिझक गायब हो गई, उसने घड़ी देखी और उसे अहसास हुआ कि अगर वह अभी नहीं भागी तो वह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी को हमेशा के लिए खो देगी। उसने बिना कुछ सोचे-समझे एक ऑटो लिया और बिना किसी परवाह के एयरपोर्ट की तरफ दौड़ पड़ी, जहाँ ट्रैफ़िक का एक बड़ा तूफ़ान उसका रास्ता रोके खड़ा था।

एयरपोर्ट के लाउंज में असद बोर्डिंग पास लेकर अपनी फ्लाइट की अनाउंसमेंट का इंतज़ार कर रहा था, उसका चेहरा उदास था और वह बार-बार अपने फोन को देख रहा था। अचानक पीछे से किसी ने उसका नाम ज़ोर से पुकारा, और जब उसने मुड़कर देखा तो वह दंग रह गया क्योंकि ज़रीन हांफती हुई, बिखरे बालों और भीगी आँखों के साथ उसके सामने खड़ी थी।

ज़रीन ने सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना दौड़कर खुद को असद की बाहों में सौंप दिया, और उसे इतनी कसकर गले लगाया मानो अगर वह छोड़ेगी तो असद हवा में गायब हो जाएगा। इस भावुक मिलन और शुद्ध प्रेम के क्षण में वहाँ मौजूद हर शख्स की निगाहें उन पर टिक गईं, और वक्त जैसे हमेशा के लिए थम गया।

“मुझे माफ़ कर दो असद, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती, प्लीज मुझे छोड़कर मत जाओ, मेरा वजूद तुम्हारे बिना कुछ भी नहीं है,” ज़रीन ने असद के सीने पर अपना सिर रखकर रोते हुए अपनी मोहब्बत का सरेआम इज़हार कर दिया। असद ने ज़रीन के आंसुओं को पोंछते हुए उसे अपने और करीब खींच लिया, जहाँ दोनों के दिलों की धड़कनें एक हो चुकी थीं और सारा पुराना शिकवा-शिकायत पिघल चुका था।

उसने ज़रीन के माठे पर एक गहरा, पवित्र और आत्मीय चुंबन अंकित किया और मुस्कुराते हुए कहा कि वह कहीं नहीं जा रहा है, क्योंकि उसने अपनी स्कॉलरशिप को ऑनलाइन मोड में ट्रांसफर करवा लिया है ताकि वह अपनी ज़रीन के पास रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके।

कैम्पस का यह कॉलेज रोमांस जो एक तीखी नोक-झोंक और कॉम्पिटिशन से शुरू हुआ था, वह अब एक परिपक्व और अटूट प्रेम की दास्तान में बदल चुका था जिसने हर दिल को छू लिया। दोनों हाथ में हाथ डाले जब वापस कॉलेज के उसी पुराने बरगद के पेड़ के नीचे आए, तो हवाओं में एक नया तराना गूंज रहा था जो उनकी अधूरी धुन को पूरा कर रहा था। ज़रीन और असद ने साबित कर दिया था कि जिंदगी में चाहे कितनी भी गलतफहमियां और मुश्किलें क्यों न आएं, अगर प्यार सच्चा, गहरा और रूहानी हो तो वह हर तूफान को पार करके अपनी मंजिल पा ही लेता है।

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