एकतरफा सुकून

एकतरफा सुकून: दिल की अधूरी दास्तान |

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एकतरफा सुकून Part 1

राहुल के लिए दिल्ली की वह सुबह हमेशा की तरह बेहद मसरूफ और भागदौड़ से भरी थी, लेकिन उस नए प्रोजेक्ट के किक-ऑफ सेशन ने उसकी पूरी जिंदगी को एक अलग ही मोड़ दे दिया था। वह पिछले तीन सालों से उस नामी एडवरटाइजिंग एजेंसी में बतौर सीनियर क्रिएटिव डायरेक्टर काम कर रहा था, जहां उसका पूरा ध्यान सिर्फ अपने काम और डेडलाइंस पर रहता था। तभी कॉन्फ्रेंस रूम का दरवाजा खुला और वहां सुप्रिया ने कदम रखा, जो कंपनी की नई वाइस प्रेसिडेंट बनकर आई थीं और उम्र में राहुल से करीब बारह साल बड़ी थीं।

सुप्रिया के चेहरे पर एक गजब का ठहराव, आंखों में गहरा तजुर्बा और उनकी बातचीत में एक ऐसा सलीका था जो राहुल को पहली ही नजर में पूरी तरह से अपना दीवाना बना गया। राहुल जो अब तक प्यार-मोहब्बत की बातों को सिर्फ ब्रांडिंग और विज्ञापनों तक ही सीमित समझता था, उस दिन पहली बार खुद को किसी की तरफ इस कदर खिंचता हुआ महसूस कर रहा था।

शुरुआती कुछ हफ्तों में राहुल ने अपने इस नए अहसास को महज एक क्रश या फिर अपने से बड़ी और सीनियर महिला के प्रति एक गहरा अट्रैक्शन समझने की कोशिश की थी। वह हर रोज ऑफिस सिर्फ इसलिए जल्दी आने लगा ताकि सुप्रिया को कैंटीन में अपनी ब्लैक कॉफी का इंतजार करते हुए चुपके से देख सके और उनकी मुस्कान से अपने दिन की शुरुआत कर सके।

उनके बीच बातचीत का दायरा सिर्फ नए क्लाइंट्स की ब्रीफिंग, क्रिएटिव पिचेस और ऑफिस की मीटिंग्स तक ही सीमित था, लेकिन राहुल हमेशा सुप्रिया की कही हर छोटी बात पर जरूरत से ज्यादा गौर करता था। सुप्रिया की आवाज में जो एक मैच्योरिटी और सलीका था, वह राहुल के दिल पर इस तरह हावी होने लगा था कि उसे अब रात में सोते हुए भी सिर्फ सुप्रिया के साथ बिताए गए ऑफिस के पल ही याद आते थे।

एक शाम जब पूरा ऑफिस खाली हो चुका था और बाहर तेज बारिश हो रही थी, सुप्रिया ने राहुल को अपने केबिन में एक अर्जेंट प्रेजेंटेशन के सिलसिले में रुकने के लिए कहा। उस सुनसान केबिन में सिर्फ उनके लैपटॉप की रोशनी चमक रही थी और बाहर गिरती बारिश की बूंदों की आवाज के बीच राहुल के दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।

काम के दौरान जब सुप्रिया ने राहुल की बनाई हुई एक टैगलाइन की तारीफ करते हुए अपना हाथ धीरे से उसके कंधे पर रखा, तो राहुल के पूरे बदन में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वह सुप्रिया के उस क्लोज प्रॉक्सिमिटी को सह नहीं पा रहा था, क्योंकि वह उनसे बेइंतहा मोहब्बत करने लगा था, एक ऐसी मोहब्बत जिसका कोई भविष्य उसे दिखाई नहीं दे रहा था।

जैसे-जैसे महीने बीतते गए, राहुल का यह एकतरफा प्यार उसके लिए एक मीठा दर्द और मानसिक कशमकश का सबब बनता चला गया, जिसे वह किसी से शेयर भी नहीं कर सकता था। सुप्रिया एक तलाकशुदा महिला थीं जो अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ अपनी बेटी की परवरिश और अपने करियर को संवारने में लगा चुकी थीं, और उनके दिल में किसी नए रिश्ते के लिए कोई जगह नहीं थी।

राहुल इस बात को अच्छी तरह जानता था कि उन दोनों के बीच बारह साल का एक बड़ा एज गैप है और सोसाइटी के कायदे-कानून इस रिश्ते को कभी कबूल नहीं करेंगे, फिर भी उसका दिल सुप्रिया के लिए धड़कने से बाज नहीं आ रहा था। वह हर रोज सुप्रिया के चेहरे के बदलते हाव-भाव को पढ़ता, उनके सुख-दुख में बिना कहे उनके साथ खड़ा रहता और बदले में सिर्फ उनकी एक छोटी सी मुस्कान की उम्मीद रखता था।

ऑफिस की एक एनुअल पार्टी के दौरान राहुल ने सुप्रिया को एक बेहद खूबसूरत ब्लैक साड़ी में देखा, जिसे देखकर उसकी सांसें मानो कुछ पलों के लिए पूरी तरह से थम सी गईं। पार्टी के शोर-शराबे से दूर सुप्रिया जब बालकनी में अकेली खड़ी होकर चांद को देख रही थीं, तब राहुल अपनी पूरी हिम्मत बटोरकर उनके पास गया और उनसे बातचीत शुरू की।

बातों-बातों में सुप्रिया ने अपनी जिंदगी के उस अकेलेपन और संघर्षों का जिक्र किया जिसे उन्होंने पिछले कई सालों से अपने दिल के किसी कोने में दबाकर रखा हुआ था। राहुल ने उस वक्त सिर्फ उनकी बातों को सुना और महसूस किया कि वह सुप्रिया के इस अकेलेपन को दूर करना चाहता है, चाहे उसके लिए उसे अपनी पूरी जिंदगी ही क्यों न दांव पर लगानी पड़े।

एकतरफा सुकून Part 2

एकतरफा सुकून

वक्त अपनी रफ्तार से चलता रहा और राहुल का यह वन-sided लव अब एक गहरे और पवित्र जुनून की शक्ल अख्तियार कर चुका था, जहां उसे सुप्रिया को पाने की चाहत से ज्यादा उनके खुश रहने की फिक्र थी। एजेंसी को मुंबई में एक बहुत बड़ा इंटरनेशनल अकाउंट मिला, जिसके चलते सुप्रिया और राहुल को एक हफ्ते के लिए मुंबई के एक आलीशान होटल में शिफ्ट होना पड़ा ताकि वे क्लाइंट मीटिंग्स को पर्सनली हैंडल कर सकें।

मुंबई की वो रातें बेहद थका देने वाली थीं, जहां दोनों दिन भर क्लाइंट्स के नखरे झेलते और रात को होटल के बिजनेस सेंटर में बैठकर अगली सुबह की स्ट्रेटेजी तैयार करते थे। राहुल इस पूरे सफर के दौरान सुप्रिया की सेहत का, उनके खाने-पीने का और उनकी हर छोटी जरूरत का इस कदर ख्याल रख रहा था कि सुप्रिया भी उसके इस बदले हुए केयरिंग बिहेवियर को नोटिस किए बिना नहीं रह सकीं।

प्रोजेक्ट के आखिरी दिन जब उनकी पिच पूरी तरह से कामयाब रही और क्लाइंट ने उनके साथ एक मल्टी-मिलियन डॉलर की डील साइन कर ली, तो सुप्रिया की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उस रात दोनों ने होटल के सुइट में ही इस बड़ी कामयाबी का जश्न मनाने का फैसला किया, जहां हल्की म्यूजिक बज रही थी और शहर की लाइट्स खिड़की से बेहद खूबसूरत लग रही थीं।

जश्न के माहौल में दोनों ने थोड़ी ड्रिंक की, जिसके बाद सुप्रिया काफी इमोशनल हो गईं और उन्होंने अपनी जिंदगी के उन खाली पन्नों को राहुल के सामने खोलना शुरू कर दिया जिन्हें उन्होंने हमेशा दुनिया से छुपाया था। सुप्रिया ने रोते हुए कहा कि इस कामयाबी और ऊंचाइयों के बावजूद जब वह रात को घर लौटती हैं, तो उन्हें संभालने वाला और बिना किसी शर्त के प्यार करने वाला कोई नहीं होता।

सुप्रिया की आंखों में आंसू देखकर राहुल खुद पर काबू नहीं रख सका और उसने आगे बढ़कर सुप्रिया के हाथों को अपने हाथों में ले लिया और अपनी जिंदगी का वह सबसे बड़ा राज उगल दिया जो उसने बरसों से छुपाया था। राहुल ने कांपती आवाज में कहा कि वह पिछले दो सालों से उनसे बेइंतहा मोहब्बत करता है, और इस प्यार में उम्र का फासला या दुनिया की बातें उसके लिए कोई मायने नहीं रखतीं।

सुप्रिया राहुल के मुंह से यह सब सुनकर पूरी तरह से स्तब्ध रह गईं, उनकी आंखों में एक अजीब सा अहसास उमड़ आया जिसमें हैरानगी भी थी और एक लंबे समय बाद किसी के द्वारा चाहे जाने का सुकून भी था। शराब का नशा, बरसों का अकेलापन, और उस रात का वह बेहद जज्बाती माहौल दोनों को एक ऐसे मुकाम पर ले आया जहां उनके बीच की सारी दीवारें और हिचक एक पल में ढह गईं।

उस रात के उस जादुई और बेहद नाजुक मोड़ पर, उन दोनों के बीच की शारीरिक दूरियां पूरी तरह से मिट गईं और वे एक-दूसरे के जिस्म और रूह में पूरी तरह से खो गए। वह प्यार की एक ऐसी इंटेंस और मुकम्मल रात थी जहां राहुल ने सुप्रिया के हर जख्म को अपने होठों से छूकर मिटाने की कोशिश की और सुप्रिया ने भी उस रात खुद को पूरी तरह से राहुल के हवाले कर दिया।

उन दोनों के बीच का वह फिजिकल इंटीमेसी सिर्फ एक शारीरिक अट्रैक्शन नहीं था, बल्कि वह दो अकेली रूहों का एक-दूसरे से मिलने और अपने सारे दर्दों को भुला देने का एक बेहद खूबसूरत जरिया था। सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में आई, तो राहुल ने सुप्रिया को अपनी बांहों में सोया हुआ पाया, और उसे लगा कि शायद उसका यह एकतरफा प्यार अब अपनी मंजिल को पा चुका है।

लेकिन हकीकत की सुबह हमेशा रात के ख्वाबों से बहुत अलग और बेरहम होती है, और सुप्रिया के जागते ही कमरे का पूरा माहौल एकदम से बदल गया। सुप्रिया की आंखों में रात का वह सुरूर अब गायब हो चुका था और उसकी जगह एक गहरा गिल्ट, पछतावा और एक सीनियर होने की वो कड़क गरिमा वापस लौट आई थी।

उन्होंने राहुल से नजरें चुराते हुए बेहद संजीदगी से कहा कि जो कुछ भी रात को हुआ वह एक बहुत बड़ी गलती थी, जिसे वे दोनों शराब के नशे और जज्बात के बहाव में आकर कर बैठे थे। सुप्रिया ने राहुल को साफ शब्दों में समझाते हुए कहा कि वह उम्र के जिस पड़ाव पर हैं और उनकी जो पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं, उनके चलते वे इस रिश्ते को कभी कोई नाम नहीं दे सकतीं और न ही राहुल को एक परमानेंट पार्टनर के रूप में स्वीकार कर सकती हैं।

सुप्रिया के मुंह से निकले ये शब्द राहुल के दिल को पूरी तरह से छलनी कर गए, क्योंकि उसने तो उस रात को अपने प्यार की मुकम्मल शुरुआत समझा था, लेकिन सुप्रिया के लिए वह सिर्फ एक कमजोर पल था। सुप्रिया ने राहुल से कहा कि उनके बीच का यह एज गैप और ऑफिस का डेकोरम उन्हें कभी एक साथ खुश रहने की इजाजत नहीं देगा, और बेहतर यही होगा कि वे इस बात को यहीं भूल जाएं।

राहुल को उस वक्त समझ आया कि प्यार का मतलब हमेशा सामने वाले को पा लेना नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उसके फैसले का सम्मान करते हुए उसे चुपचाप छोड़ देना ही सच्चा प्यार है। राहुल ने भारी मन से सुप्रिया की बात को स्वीकार किया, क्योंकि वह उनके चेहरे पर उस गिल्ट और तनाव को और ज्यादा बढ़ते हुए नहीं देख सकता था जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचे।

इस घटना के ठीक दो हफ्ते बाद राहुल ने उस एडवरटाइजिंग एजेंसी से अपना इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उसे पता था कि सुप्रिया के सामने हर रोज सामान्य बनकर काम करना दोनों के लिए मानसिक रूप से बेहद तकलीफदेह होगा। सुप्रिया ने जब उसका इस्तीफा मंजूर किया, तो उनकी आंखों में एक छिपा हुआ आंसू और राहुल के लिए एक गहरा सम्मान साफ देखा जा सकता था, जो यह बयां कर रहा था कि राहुल ने उनके फैसले की कितनी कद्र की थी।

राहुल ने दिल्ली छोड़ दिया और एक नई शुरुआत के लिए बेंगलुरु चला गया, जहां उसने अपने काम को एक नई ऊंचाई दी और धीरे-धीरे अपने इस गहरे दर्द को अपनी सबसे बड़ी क्रिएटिव ताकत में बदल लिया। राहुल का वह एकतरफा प्यार भले ही अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया और उनका रिश्ता कभी मुकम्मल नहीं हुआ, लेकिन उस एक रात की याद और सुप्रिया के प्रति उसका वह निश्छल प्यार हमेशा के लिए उसके दिल में जिंदा रहा जिसने उसे एक परिपक्व इंसान बना दिया था।

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