नैतिक कहानियां

नैतिक कहानियां-बदला लेना या क्षमा करना

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नैतिक कहानियां-बदला लेना या क्षमा करना

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक बहुत ही बुद्धिमान बूढ़ा व्यक्ति रहता था। वह अपनी गहरी समझ और सही सलाह के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध था। लोग अपनी हर समस्या लेकर उसके पास आते थे और वह उनका समाधान करता था।

एक दिन एक युवा व्यक्ति उसके पास आया और बोला कि किसी ने उसके साथ अन्याय किया है और वह उसका बदला लेना चाहता है। उसने पूछा कि उसे क्या करना चाहिए ताकि उसे अपने अपमान का जवाब मिल सके।

बूढ़े व्यक्ति ने उसे शांत होकर समझाया कि बदला लेने से भले ही कुछ समय के लिए संतोष मिल जाए, लेकिन इससे सच्ची खुशी और शांति कभी नहीं मिलती। उसने कहा कि पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या बदला लेना सच में जरूरी है या नहीं।

युवक ने पूछा कि अगर वह बदला नहीं लेगा तो लोग उसे कमजोर समझेंगे। इस पर बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि असली ताकत बाहर की नहीं बल्कि भीतर की होती है। जो व्यक्ति क्षमा कर सकता है, वही सबसे अधिक मजबूत होता है।

बूढ़े व्यक्ति ने समझाया कि जिसने तुम्हें दुख दिया है, उसे माफ करना बहुत बड़ा साहस है। युवक ने उसकी बात समझी और बदले का विचार छोड़ दिया। वह वहाँ से लौटते समय पहले से कहीं अधिक शांत और संतुष्ट महसूस कर रहा था।

मिट्टी का बोझ (The Weight of Soil)

एक समय की बात है, एक बहुत ही चालाक और लालची ज़मींदार था, जिसके पास पूरे गाँव की बड़ी ज़मीन थी। वह जरूरतमंद लोगों को थोड़ा-थोड़ा पैसा उधार देता, लेकिन उस पर इतना ज्यादा ब्याज जोड़ देता कि लोग कर्ज में डूब जाते और अपनी जमीन उसे सौंप देते।

अब उसकी नजर एक अकेली बूढ़ी महिला की जमीन पर पड़ी। वह महिला अपने खेत खुद संभालती थी और उसी जमीन पर पूरी जिंदगी बिताई थी। ज़मींदार को समझ नहीं आ रहा था कि उसकी जमीन कैसे छीनी जाए, इसलिए उसने एक सरकारी अधिकारी को रिश्वत देकर फर्जी कागज बनवा लिए और जमीन पर अपना दावा कर दिया।

अधिकारी के साथ वह बूढ़ी महिला के पास गया और उसे जमीन खाली करने का आदेश दिया। महिला हैरान रह गई। उसने कहा कि यह जमीन उसके पूर्वजों की है, उसके अपने लोगों की यादें इसी मिट्टी में हैं और वह यहीं जन्मी और बड़ी हुई है। वह न्याय के लिए अदालत भी गई, लेकिन वहाँ भी रिश्वत और फर्जी कागजों के कारण फैसला ज़मींदार के पक्ष में आ गया।

दिल टूटने के बाद वह बूढ़ी महिला जमीन छोड़ने को तैयार हो गई। जाते समय उसने ज़मींदार से विनती की कि उसे इस मिट्टी से बहुत लगाव है, इसलिए उसे बस एक टोकरी मिट्टी अपने साथ ले जाने दी जाए ताकि वह अंतिम समय तक अपनी जमीन की खुशबू महसूस कर सके।

ज़मींदार ने हँसते हुए उसे अनुमति दे दी। महिला ने टोकरी में मिट्टी भर ली, लेकिन जानबूझकर उसे इतना भर दिया कि वह बहुत भारी हो गई। फिर उसने ज़मींदार से मदद मांगी कि वह उसे सिर पर रखवा दे।

जब ज़मींदार ने मदद की, तभी बूढ़ी महिला ने कहा कि अगर वह एक टोकरी मिट्टी भी नहीं ले जा सकती, तो इंसान मरने के बाद पूरी जमीन कैसे ले जाएगा? यह सुनकर ज़मींदार चुप हो गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तुरंत उसकी जमीन वापस कर दी और माफी मांग ली।

तेनाली रामा और व्यापारी

विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय को घोड़ों से बहुत लगाव था। उनके अस्तबल में दुनिया के सबसे बेहतरीन घोड़ों का संग्रह था। एक दिन अरब से एक घोड़ा व्यापारी राजा के दरबार में आया और उसने दावा किया कि उसके पास बहुत ही उम्दा नस्ल के अरबियन घोड़े हैं। उसने राजा को एक घोड़ा दिखाया और कहा कि अगर राजा को वह पसंद आए, तो वह बाकी घोड़े भी मंगवा देगा।

राजा को वह घोड़ा बहुत पसंद आया और उन्होंने तुरंत ही 5000 सोने के सिक्के अग्रिम भुगतान के रूप में दे दिए। व्यापारी ने वादा किया कि वह दो दिन में बाकी घोड़ों के साथ वापस आ जाएगा।

लेकिन दो दिन बीत गए, फिर दो हफ्ते, और व्यापारी वापस नहीं आया। राजा धीरे-धीरे चिंतित होने लगे। एक शाम वे अपने मन को शांत करने के लिए बगीचे में टहल रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि तेनाली रामा कुछ लिख रहे हैं।

राजा ने उनसे पूछा कि वह क्या लिख रहे हैं, लेकिन तेनाली ने पहले कोई जवाब नहीं दिया। बार-बार पूछने पर तेनाली ने बताया कि वह विजयनगर के सबसे बड़े मूर्ख लोगों के नाम लिख रहे हैं।

यह सुनकर राजा ने वह कागज छीन लिया और देखा कि उसमें सबसे ऊपर उनका ही नाम लिखा था। राजा बहुत क्रोधित हो गए और इसका कारण पूछा।
तेनाली रामा ने शांत होकर कहा कि जो व्यक्ति किसी अनजान व्यापारी को बिना जांचे 5000 सोने के सिक्के दे दे, वह मूर्ख ही माना जाएगा। राजा ने तुरंत पूछा कि अगर व्यापारी वापस आ जाए और घोड़े ले आए तो?
तेनाली ने मुस्कुराकर जवाब दिया कि तब वह व्यापारी मूर्ख होगा और राजा का नाम हटाकर उसका नाम सूची में डाल दिया जाएगा।

यह सुनकर राजा को अपनी गलती समझ में आ गई और उन्होंने तेनाली की बुद्धिमानी की सराहना की।

प्रतिक्रिया देना या प्रतिक्रिया करना (To Respond or React)

एक बार एक रेस्टोरेंट में कुछ लोग बैठकर खाना खा रहे थे। तभी अचानक कहीं से एक कॉकरोच उड़कर आया और एक महिला पर बैठ गया। डर के मारे वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी और घबराकर दोनों हाथों से उसे हटाने की कोशिश करने लगी। उसकी घबराहट इतनी तेज थी कि पास बैठे लोग भी डर गए और अफरा-तफरी मच गई।

किसी तरह उसने कॉकरोच को खुद से हटाया, लेकिन वह उड़कर पास बैठी दूसरी महिला पर जा बैठा। अब दूसरी महिला भी डरकर चिल्लाने लगी और वही स्थिति फिर से दोहराई जाने लगी। पूरे समूह में घबराहट और हंगामा फैल गया।

तभी वेटर तुरंत उनकी मदद के लिए आया। लेकिन बाकी लोगों की तरह घबराने के बजाय वह शांत रहा। उसने ध्यान से देखा कि कॉकरोच उसकी शर्ट पर है और सही समय का इंतज़ार किया। फिर उसने बिना किसी हड़बड़ी के उसे पकड़ा और बाहर फेंक दिया।

यह सब देखकर एक व्यक्ति जो पास बैठा था, सोचने लगा कि असली समस्या कॉकरोच नहीं था, बल्कि लोगों की घबराहट थी। वेटर इसलिए सफल हो सका क्योंकि उसने डर के बजाय शांति से स्थिति को संभाला।

चरवाहा लड़का और भेड़िया (The Shepherd Boy and the Wolf)

एक बार एक चरवाहा लड़का अपने मालिक की भेड़ों को गाँव के पास स्थित जंगल के किनारे चराया करता था। उसकी ज़िंदगी बहुत नीरस थी और समय काटने के लिए वह कभी अपने कुत्ते से बातें करता, कभी बाँसुरी बजाता था।

एक दिन उसे शरारत सूझी। उसने सोचा कि अगर वह “भेड़िया! भेड़िया!” चिल्लाएगा तो गाँव वाले दौड़कर आएंगे और फिर वह उनका मज़ाक उड़ा सकता है। उसने ऐसा ही किया, जबकि वहाँ कोई भेड़िया था ही नहीं।

गाँव वाले उसकी आवाज़ सुनकर घबरा गए और भेड़ों को बचाने के लिए दौड़ पड़े, लेकिन वहाँ पहुँचकर देखा कि लड़का हँस रहा था। वह समझ गए कि उसने झूठ बोला है। कुछ दिन बाद लड़के ने फिर वही शरारत दोहराई, और गाँव वाले फिर से बेवकूफ बन गए।
लेकिन एक दिन सच में जंगल से एक भेड़िया निकल आया और उसने भेड़ों पर हमला कर दिया। लड़के ने डर के मारे फिर से गाँव की ओर दौड़कर “भेड़िया! भेड़िया!” चिल्लाया, लेकिन इस बार किसी ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।

गाँव वालों ने सोचा कि यह फिर से झूठ बोल रहा है, इसलिए कोई मदद के लिए नहीं आया। भेड़िये ने कई भेड़ों को मार दिया और जंगल में वापस चला गया।

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नैतिक कहानियाँ मनोरंजन के साथ जीवन की अनमोल सीख देती हैं। ये कहानियाँ ईमानदारी, मेहनत, दया, सत्य, अनुशासन और अच्छे संस्कारों का महत्व समझाकर बच्चों और बड़ों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।

रचनाकार:  नैतिक कहानियाँ
 प्रस्तुति: Saying Central Team

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