दादी माँ की कहानियाँ-.ऋतु और रोहन
एक छोटे से सुंदर गाँव में ऋतु और उसका बड़ा भाई रोहन अपने माता-पिता के साथ रहते थे। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। ऋतु बहुत चंचल और नटखट थी, जबकि रोहन समझदार और बहादुर था। दोनों हर समय साथ खेलते, साथ स्कूल जाते और साथ ही बगीचे में घूमने जाते थे। गाँव के लोग भी उनकी प्यारी जोड़ी को देखकर खुश हो जाते थे। उनके घर के पास एक बड़ा-सा बगीचा था, जहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे। वहाँ तितलियाँ उड़ती रहतीं और पेड़ों पर चिड़ियाँ मीठे गीत गाती थीं। ऋतु और रोहन को वह बगीचा बहुत पसंद था।
एक दिन शाम के समय दोनों बगीचे में खेल रहे थे। ऋतु फूलों के पीछे भाग रही थी और रोहन पेड़ के नीचे बैठकर उसके लिए छोटी-सी लकड़ी की नाव बना रहा था। तभी अचानक आसमान पर काले बादल छा गए। ठंडी हवा चलने लगी और बगीचे का माहौल डरावना-सा हो गया। दोनों कुछ समझ पाते, उससे पहले एक दुष्ट जादूगरनी वहाँ प्रकट हुई। उसका चेहरा बहुत भयानक था, आँखें लाल थीं और हाथ में लंबी काली छड़ी थी। उसकी हँसी इतनी डरावनी थी कि ऋतु डरकर रोहन के पीछे छिप गई।
जादूगरनी बच्चों को देखकर बोली, “आज मुझे दो छोटे बच्चे मिल गए। अब ये हमेशा मेरे साथ रहेंगे।” इतना कहकर उसने अपनी जादुई छड़ी घुमाई और देखते ही देखते दोनों बच्चे हवा में उठ गए। ऋतु और रोहन डर के मारे चिल्लाने लगे, लेकिन वहाँ उनकी मदद करने वाला कोई नहीं था। जादूगरनी उन्हें अपने जंगल के बीच बने पुराने और डरावने घर में ले गई। वह घर चारों तरफ से बड़े-बड़े पेड़ों से घिरा हुआ था। अंदर अँधेरा था और हर जगह मकड़ी के जाले लगे हुए थे।
जादूगरनी ने दोनों बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। कमरे की खिड़कियों पर लोहे की सलाखें लगी थीं और दरवाजा बहुत भारी था। कई दिनों तक ऋतु और रोहन वहीं बंद रहे। वे अपने मम्मी-पापा को याद करके रोते रहते। दूसरी ओर उनके माता-पिता भी बहुत परेशान थे। उन्होंने पूरे गाँव में बच्चों को ढूँढा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। गाँव के लोग भी बच्चों को खोजने में मदद कर रहे थे, पर किसी को नहीं मालूम था कि वे कहाँ हैं।
रोहन हमेशा अपनी छोटी बहन को हिम्मत देता। वह कहता, “डरो मत ऋतु, हम यहाँ से जरूर निकलेंगे।” एक रात जादूगरनी जल्दी सो गई। रोहन ने देखा कि उसने कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया है। उसने धीरे से दरवाजा खोला और ऋतु का हाथ पकड़कर बाहर निकल आया। दोनों बहुत सावधानी से कदम रखते हुए घर से बाहर भागने लगे। जंगल में चारों ओर अँधेरा था और पेड़ों की शाखाएँ हवा में डरावनी आवाजें कर रही थीं, लेकिन दोनों अपने घर पहुँचने की उम्मीद में दौड़ते रहे।
कुछ देर बाद जादूगरनी की नींद खुली। जब उसने कमरे को खाली देखा तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह जोर-जोर से चिल्लाई और अपनी जादुई छड़ी लेकर बच्चों के पीछे भागी। ऋतु और रोहन जितनी तेज दौड़ सकते थे, दौड़ रहे थे, लेकिन जादूगरनी हवा की तरह उनके करीब आती जा रही थी।
उसी समय आसमान से एक सुंदर परी वहाँ उतरी। उसके चमकदार पंख थे और उसके हाथ में चाँदी की जादुई छड़ी थी। उसने बच्चों को डरा हुआ देखा तो उसे उन पर दया आ गई। परी ने तुरंत कहा, “बच्चों, घबराओ मत। मैं तुम्हारी मदद करूँगी। तुम दोनों यहीं खड़े रहो।”
परी ने अपनी जादुई छड़ी घुमाई और बच्चों के चारों ओर आग का एक बड़ा चक्र बना दिया। आग की लपटें ऊँची-ऊँची उठने लगीं। तभी जादूगरनी वहाँ पहुँची, लेकिन आग देखकर रुक गई। वह गुस्से से चीखी और बोली, “तुम मुझे रोक नहीं सकती!” उसने जोर से फूँक मारी और कुछ ही क्षणों में आग बुझ गई।
अब परी ने अपनी दूसरी शक्ति का प्रयोग किया। उसने बच्चों के चारों ओर काँच की एक बहुत ऊँची और चमकदार दीवार खड़ी कर दी। दीवार इतनी चिकनी थी कि उस पर चढ़ना असंभव था। जादूगरनी ने उसे तोड़ने की बहुत कोशिश की। उसने लकड़ी से मारा, पत्थर फेंके और अपने हाथों से भी दीवार पर प्रहार किया, लेकिन दीवार नहीं टूटी।
जादूगरनी बहुत क्रोधित हो गई। उसने सोचा कि अब अपनी सबसे बड़ी जादुई शक्ति का उपयोग करना पड़ेगा। उसने अपनी आँखें बंद कीं, हाथ ऊपर उठाए और मंत्र पढ़ने लगी। वह पूरी ताकत से ध्यान लगाने लगी ताकि दीवार को तोड़ सके।
लेकिन जैसे ही जादूगरनी ने आँखें बंद कीं, परी मुस्कुराई।
उसने तुरंत अपनी जादुई छड़ी घुमाई और अगले ही पल ऋतु और रोहन वहाँ से गायब हो गए। जब जादूगरनी ने मंत्र पूरा करके आँखें खोलीं तो वहाँ न काँच की दीवार थी और न ही बच्चे। चारों तरफ केवल खाली जंगल था। जादूगरनी हैरान रह गई। उसने बच्चों को बहुत ढूँढा, लेकिन उसे कभी पता नहीं चल पाया कि वे कहाँ गए।
दरअसल परी ने अपनी जादुई शक्ति से दोनों बच्चों को सीधे उनके घर पहुँचा दिया था। जब ऋतु और रोहन अचानक अपने घर के सामने पहुँचे तो उनके माता-पिता उन्हें देखकर खुशी से रो पड़े। उन्होंने दोनों बच्चों को गले से लगा लिया। पूरे गाँव में यह खबर फैल गई कि बच्चे सुरक्षित लौट आए हैं। सभी बहुत खुश हुए।
ऋतु और रोहन ने अपने माता-पिता को सारी बात बताई—जादूगरनी के बारे में, डरावने जंगल के बारे में और उस दयालु परी के बारे में जिसने उनकी जान बचाई थी। उस दिन के बाद दोनों बच्चों ने कभी अकेले दूर जाने की गलती नहीं की। वे हमेशा अपने माता-पिता की बात मानते और उस बहादुर परी को याद करते, जिसने मुश्किल समय में उनकी मदद की थी।
गुलाब के फूल का बेटा

बहुत समय पहले एक घने जंगल के किनारे एक रहस्यमयी घर था। उस घर में एक जादूगरनी रहती थी। लोग उससे बहुत डरते थे, क्योंकि उसका स्वभाव बहुत कठोर और क्रूर था। कोई भी उसके घर के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था। उसके घर के सामने एक बहुत बड़ा और सुंदर बाग था।
उस बाग में तरह-तरह के फूल खिले रहते थे। लाल, पीले, सफेद और नीले फूलों की खुशबू दूर-दूर तक फैलती थी, लेकिन उन सबमें सबसे सुंदर गुलाब के फूल थे। वे इतने खूबसूरत थे कि उन्हें देखकर किसी का भी मन खुश हो जाता। जादूगरनी को अपने फूलों से बहुत प्रेम था और उसने सख्त आदेश दे रखा था कि कोई भी उसके बाग के फूलों को हाथ नहीं लगाएगा।
एक दिन पास के गाँव की एक महिला मंदिर जाने के लिए उसी रास्ते से गुजर रही थी। वह बहुत सरल और धार्मिक स्वभाव की थी। उसके हाथ में पूजा की थाली थी और वह भगवान को चढ़ाने के लिए फूल ढूँढ रही थी। जैसे ही उसकी नजर उस बाग पर पड़ी, वह ठिठक गई। उसने इतने सुंदर गुलाब पहले कभी नहीं देखे थे। सुबह की धूप में वे फूल मोतियों की तरह चमक रहे थे। महिला ने सोचा कि यदि वह भगवान को इनमें से एक गुलाब चढ़ाएगी तो पूजा और भी सुंदर हो जाएगी।
वह धीरे-धीरे बाग के पास गई और एक गुलाब तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाया। लेकिन जैसे ही उसकी उँगलियाँ फूल को छूने वाली थीं, अचानक तेज हवा चलने लगी और काले धुएँ के बीच जादूगरनी उसके सामने आ खड़ी हुई। उसकी आँखें गुस्से से लाल थीं। वह जोर से चिल्लाई, “रुक जा मूर्ख महिला! तूने मेरे फूल को छूने की हिम्मत कैसे की? यहाँ किसी को भी मेरे फूलों को हाथ लगाने की अनुमति नहीं है। अब तुझे अपनी गलती की सज़ा जरूर मिलेगी। मैं तुझे भी गुलाब का फूल बना दूँगी!”
महिला डर के मारे काँपने लगी। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसने हाथ जोड़कर विनती की, “मुझे क्षमा कर दो। मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मेरा ऐसा कोई बुरा इरादा नहीं था। मैं तो बस भगवान को फूल चढ़ाना चाहती थी। कृपया मुझ पर दया करो।”
महिला का रोना सुनकर जादूगरनी कुछ देर सोचने लगी। फिर उसने कठोर स्वर में कहा, “मैं अपनी बात कभी वापस नहीं लेती।
जो मैंने कहा है, वह होकर रहेगा। लेकिन मैं तेरी सज़ा थोड़ी कम कर सकती हूँ। दिनभर तू इस बाग में गुलाब का फूल बनकर रहेगी और रात होने पर अपने असली रूप में अपने घर जा सकेगी। लेकिन सुबह सूरज निकलने से पहले तुझे वापस यहाँ आना होगा। यदि तू ऐसा नहीं करेगी, तो अपने घर पर ही फूल बन जाएगी और पौधे से अलग होने के कारण जल्दी सूख जाएगी। हाँ, यदि कोई तुझे इन फूलों के बीच पहचान ले, तो मेरा जादू टूट जाएगा और तू हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगी।”
इतना कहते ही जादूगरनी ने अपनी जादुई छड़ी घुमाई। अगले ही पल वह महिला एक सुंदर लाल गुलाब में बदल गई और बाग के एक पौधे से जुड़ गई। पूरा दिन वह धूप और हवा में वहीं खड़ी रही। उसे बहुत तकलीफ हो रही थी, लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी। रात होते ही जादू टूट गया और वह फिर अपने असली रूप में लौट आई। थकी हुई और दुखी महिला देर रात अपने घर पहुँची।
घर पहुँचते ही उसके परिवार वाले उसे देखकर खुश हो गए, क्योंकि वे पूरे दिन से उसकी चिंता कर रहे थे। महिला ने अपने बेटे को सारी घटना बताई। उसका बेटा बहुत समझदार और बुद्धिमान था। उसने अपनी माँ की बात ध्यान से सुनी और फिर आत्मविश्वास से बोला, “माँ, आप चिंता मत करो। आप सुबह फिर वहाँ चली जाना। मैं थोड़ी देर बाद बाग में आऊँगा और आपको पहचान लूँगा।”
महिला को अपने बेटे की बात पर विश्वास तो था, लेकिन उसके मन में डर भी था। अगले दिन सूरज निकलने से पहले ही वह फिर जादूगरनी के बाग में पहुँच गई और गुलाब का फूल बनकर पौधे से जुड़ गई। कुछ समय बाद उसका बेटा वहाँ पहुँचा। उसने देखा कि पूरे बाग में गुलाब के सैकड़ों फूल खिले हुए हैं। हर फूल लगभग एक जैसा दिखाई दे रहा था। जादूगरनी दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी। उसे विश्वास था कि लड़का अपनी माँ को कभी पहचान नहीं पाएगा।
लेकिन लड़के ने हार नहीं मानी। वह धीरे-धीरे हर फूल को ध्यान से देखने लगा। वह एक पौधे से दूसरे पौधे तक गया। काफी देर तक देखने के बाद अचानक उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने एक गुलाब की ओर इशारा करते हुए कहा, “यही मेरी माँ है!”
इतना सुनते ही जादूगरनी चौंक गई। अगले ही पल वह फूल चमकने लगा और महिला अपने असली रूप में वापस आ गई। वह खुशी से अपने बेटे को गले लगाकर रोने लगी। उसकी आँखों में खुशी और गर्व दोनों थे।
महिला ने आश्चर्य से पूछा, “बेटा, तूने मुझे पहचाना कैसे?”
लड़का मुस्कुराकर बोला, “माँ, यह बहुत आसान था। रातभर जो फूल यहाँ बाग में रहे थे, उन सभी पर सुबह की ओस की बूंदें जमी हुई थीं। लेकिन आप तो रात को घर पर थीं, इसलिए आपके ऊपर ओस की एक भी बूंद नहीं थी। बस इसी से मैं समझ गया कि आप कौन-सा फूल हैं।”
अपने बेटे की बुद्धिमानी सुनकर महिला बहुत खुश हुई। जादूगरनी भी यह सब देख रही थी। उसने पहली बार किसी बेटे का अपनी माँ के प्रति इतना सच्चा प्रेम और लगाव देखा था। उसका कठोर दिल पिघल गया। उसे अपनी गलतियों का एहसास हुआ। उसने सोचा कि जो लोग एक-दूसरे से इतना प्रेम करते हैं, उन्हें दुख देना गलत है।
उस दिन के बाद जादूगरनी ने लोगों को परेशान करना छोड़ दिया। अब वह पहले जैसी क्रूर नहीं रही। उसने अपने जादू का उपयोग लोगों की मदद करने में करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे लोग उससे डरना छोड़ने लगे और वह पूरे गाँव में एक अच्छी और दयालु जादूगरनी के रूप में प्रसिद्ध हो गई।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो अन्य ज्ञानवर्धक और नैतिक कहानियाँ भी ज़रूर पढ़ें।
दादी माँ की कहानियाँ प्यार, संस्कार, अनुभव और जीवन की अनमोल सीख से भरपूर होती हैं। ये रोचक कथाएँ बच्चों और बड़ों को मनोरंजन के साथ नैतिक मूल्य, पारिवारिक प्रेम और अच्छे आचरण की प्रेरणा देती हैं।
दादी माँ की कहानियाँ
प्रस्तुति: Saying Central Team