एक अधूरी दास्तान Part-1
आकाश अपनी खिड़की से बाहर देखते हुए चाय की चुस्की ले रहा था, जहाँ नेपाल की पहाड़ियों पर कोहरा धीरे-धीरे उतर रहा था। काठमांडू की यह ठंडी सुबह हमेशा की तरह बेहद शांत और सुकून देने वाली थी, जो उसके मन को एक अजीब सी तसल्ली दे रही थी। पिछले कुछ महीनों से उसने इस खूबसूरत शहर में अपना एक नया ठिकाना बना लिया था, ताकि वह अपने अतीत की कड़वी यादों से थोड़ा दूर रह सके।
तभी उसके फोन की घंटी बजी, जिसकी स्क्रीन पर ‘अमित’ का नाम चमक रहा था, जो हरियाणा के रोहतक में रहने वाला उसका सबसे पुराना और भरोसेमंद दोस्त था। अमित की आवाज में एक अजीब सी घबराहट और हड़बड़ाहट थी, जिसे सुनकर आकाश के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। अमित ने बिना किसी भूमिका के सीधे कहा कि उसे तुरंत भारत वापस लौटना होगा, क्योंकि कुछ ऐसा हुआ था जिसे फोन पर बताना मुमकिन नहीं था।
आकाश ने अपनी गहरी सांस छोड़ी, क्योंकि वह जानता था कि हरियाणा के उस पुराने पुश्तैनी मकान से जुड़ी यादें उसे कभी पूरी तरह से पीछा नहीं छोड़ने देंगी। उसने बिना कोई वक़्त गंवाए अपना बैग पैक किया और रक्सौल बॉर्डर के रास्ते भारत में दाखिल होने के लिए अपनी गाड़ी निकाल ली। रास्ते भर उसके दिमाग में पुरानी बातें घूमती रहीं, जैसे कोई अनदेखा साया उसे लगातार पीछे से पुकार रहा हो।
हरियाणा की सीमा में दाखिल होते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका था, जहाँ नेपाल की ठंडी हवाओं की जगह अब धूल भरी गर्म हवाएं चल रही थीं। जब वह रोहतक की उस जानी-पहचानी गली में पहुँचा, तो उसे सब कुछ बदला-बदला सा लगा, जैसे वक़्त वहाँ थम गया हो। अमित अपने घर के दरवाजे पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था, लेकिन उसकी आँखों में वह पुरानी गर्मजोशी गायब थी।
अमित उसे सीधे घर के अंदर ले गया और कमरे का दरवाजा बंद करते हुए एक पुरानी डायरी और कुछ तस्वीरें टेबल पर रख दीं। उसने आकाश की तरफ देखते हुए बड़े ही रहस्यमयी लहजे में कहा कि जो सच वह आज तक छुपाता आया था, अब उसका सामना करने का वक़्त आ गया है। आकाश ने कांपते हाथों से उन तस्वीरों को उठाया, जिनमें उसकी अपनी ही तस्वीरें थीं, लेकिन उनके पीछे कुछ अजीब सी तारीखें लिखी हुई थीं।
उन तस्वीरों में आकाश किसी ऐसी जगह पर खड़ा था जहाँ वह अपनी जिंदगी में कभी गया ही नहीं था, और उन पर दर्ज तारीखें उस समय की थीं जब वह नेपाल में रह रहा था। अमित ने फुसफुसाते हुए कहा कि पुलिस पिछले एक हफ्ते से उसे ढूंढ रही है, क्योंकि दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर एक भयानक हादसा हुआ था। उस हादसे की जगह से पुलिस को जो पहचान पत्र मिला था, उस पर किसी और का नहीं बल्कि खुद आकाश का नाम और पता छपा हुआ था।
आकाश को लगा जैसे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई हो, क्योंकि वह पिछले छह महीनों से नेपाल की वादियों से बाहर कदम तक नहीं रखा था। उसने अमित को समझाने की कोशिश की कि यह कोई बहुत बड़ी गलतफहमी है या फिर कोई उसकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन अमित की आँखों में साफ तौर पर अविश्वास की एक गहरी परत देखी जा सकती थी, जो आकाश को और डरा रही थी।
तभी कमरे के बाहर किसी की कदमों की आहट सुनाई दी, जिससे दोनों दोस्त एकदम से शांत हो गए और बाहर की तरफ देखने लगे। दरवाजे के शीशे से जो परछाई नजर आ रही थी, उसकी कद-काठी हूबहू आकाश जैसी ही थी, जिससे कमरे का तापमान अचानक गिर गया। अमित ने धीरे से अपनी जेब से एक पिस्तौल निकाली और उसे आकाश की तरफ तानते हुए कहा कि वह असल में जानता है कि वह कौन है।
आकाश असमंजस में पड़ गया कि उसका सबसे पक्का दोस्त, जो उसके लिए अपनी जान दे सकता था, आज उस पर बंदूक क्यों तान रहा था। उसने चिल्लाकर कहा कि अमित पागल मत बनो, मैं तुम्हारा वही पुराना दोस्त आकाश हूँ जिसके साथ तुमने बचपन बिताया है। लेकिन अमित ने ठंडे लहजे में जवाब दिया कि असली आकाश की मौत तो तीन साल पहले ही नेपाल के एक पहाड़ी रास्ते पर सड़क हादसे में हो चुकी थी।
इस बात ने आकाश के दिमाग के परखच्चे उड़ा दिए, क्योंकि उसे अपनी पूरी जिंदगी, अपनी यादें और अपना अस्तित्व बिल्कुल असली लग रहे थे। उसने खुद को छूकर देखा, अपने चेहरे को छुआ, अपनी सांसों की गति को महसूस किया, जो पूरी तरह से एक जीवित इंसान जैसी ही थीं। उसने अमित से कहा कि अगर वह मर चुका था, तो फिर इस वक्त उसके सामने खड़ा होकर बातें कौन कर रहा था।
अमित ने दीवार पर टंगे एक बड़े से आईने की तरफ इशारा किया, जो कमरे के कोने में धूल खा रहा था और बेहद पुराना लग रहा था। आकाश ने जब उस आईने के सामने जाकर खुद को देखने की कोशिश की, तो उसके होश उड़ गए क्योंकि आईने में कोई अक्स ही नहीं था। वह सिर्फ एक खाली दीवार को देख पा रहा था, जबकि वह खुद उस आईने के ठीक सामने पूरी ताकत से खड़ा हुआ था।
एक अधूरी दास्तान Part-2

इस खौफनाक मंजर को देखकर आकाश का सिर चकराने लगा और उसके दिमाग में पुरानी यादों का एक बहुत बड़ा बवंडर अचानक से उठ खड़ा हुआ। उसे याद आने लगा कि कैसे तीन साल पहले वह नेपाल के पोखरा से काठमांडू की तरफ अपनी कार से बेहद तेज रफ्तार में जा रहा था। उस रात मौसम बहुत खराब था, चारों तरफ घना कोहरा छाया हुआ था और अचानक उसकी गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया था।
गाड़ी सीधे गहरी खाई में जा गिरी थी, लेकिन उसे लगा था कि वह किसी चमत्कार के कारण उस भयानक हादसे में सुरक्षित बच गया था। तब से वह खुद को जीवित समझकर काठमांडू के एक छोटे से किराए के मकान में अपनी जिंदगी सामान्य रूप से बिता रहा था। लेकिन अब उसे समझ आ रहा था कि वह कोई इंसान नहीं, बल्कि अपनी अधूरी इच्छाओं के कारण भटकती हुई एक रूह थी।
अमित ने रोते हुए कहा कि उसे इस बात का अहसास तब हुआ जब उसने नेपाल के पुलिस रिकॉर्ड्स में आकाश के शव की शिनाख्त की तस्वीरें देखी थीं। वह पिछले तीन सालों से हर रात आकाश की आत्मा को अपने इस पुश्तैनी घर के आसपास मंडराते और पुरानी चीजों को छूते हुए देखता था। इसलिए उसने आज हिम्मत जुटाकर आकाश की इस भटकती हुई आत्मा को बुलाने के लिए यह पूरा नाटक रचा था ताकि उसे मुक्ति मिल सके।
आकाश को अब सब कुछ साफ दिखने लगा था कि क्यों नेपाल में कोई भी दुकानदार उससे पैसे नहीं लेता था और क्यों लोग उसे देखकर अनदेखा कर देते थे। वह सोचता था कि लोग कितने अच्छे और शांत हैं, लेकिन सच यह था कि जीवित इंसानों को वह कभी दिखाई ही नहीं देता था। उसकी आत्मा अपनी अधूरी यादों के सहारे एक काल्पनिक दुनिया बनाकर उसी में लगातार जी रही थी और खुद को दिलासा दे रही थी।
तभी अचानक कमरे की बत्तियां टिमटिमाईं और खिड़की के शीशे हवा के भारी दबाव के कारण एक झटके के साथ चकनाचूर हो गए। अमित जमीन पर बैठ गया और हाथ जोड़कर आकाश की आत्मा से प्रार्थना करने लगा कि वह अब इस दुनिया का मोह छोड़ दे और शांति से चला जाए। आकाश ने अपनी बंद मुट्ठी को देखा, जिसमें अब भी वही पुरानी डायरी थी, जो धीरे-धीरे धुएं में तब्दील हो रही थी।
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट आना अभी बाकी था, जिसने इस पूरी रूहानी हकीकत को एक झटके में पूरी तरह से पलट कर रख दिया। जैसे ही आकाश ने खुद को पूरी तरह गायब होने के लिए तैयार किया, कमरे के कोने से एक ज़ोरदार ठहाके की आवाज गूंज उठी। वह आवाज किसी और की नहीं, बल्कि खुद अमित की थी, जिसका चेहरा अब पूरी तरह से एक क्रूर और शातिर इंसान जैसा लग रहा था।
कमरे की बत्तियां वापस जल गईं और आईने के पीछे लगा एक बड़ा सा पर्दा अचानक से नीचे गिर गया, जिसके पीछे एक हाई-टेक प्रोजेक्टर लगा था। अमित ने अपनी पिस्तौल को नीचे किया और ताली बजाते हुए कहा कि प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा और आकाश ने उसकी हर बात पर यकीन कर लिया। आकाश ने चौंककर देखा कि आईने पर एक विशेष किस्म की कोटिंग की गई थी, जो केवल सामने वाले के अक्स को गायब कर देती थी।
अमित ने हँसते हुए बताया कि आकाश मरा नहीं है, बल्कि वह एक बहुत बड़े वैज्ञानिक प्रयोग और गहरी साजिश का हिस्सा बन चुका था। अमित असल में हरियाणा के एक गुप्त न्यूरो-साइंस रिसर्च सेंटर का हेड था, जो इंसानी दिमाग के भ्रम और यादों को नियंत्रित करने पर काम कर रहा था। उसने आकाश को नेपाल में एक विशेष नशीली दवा दी थी, जिससे उसका दिमाग पिछले तीन सालों से पूरी तरह उसके वश में था।
सच्चाई यह थी कि आकाश भारत का एक बेहद अमीर बिजनेसमैन था, जिसकी सारी संपत्ति हड़पने के लिए अमित ने यह पूरा भ्रमजाल बुना था। उसने आकाश को यह विश्वास दिला दिया था कि वह एक भूत है, ताकि वह खुद अपनी सारी संपत्ति और वसीयत अमित के नाम पर साइन कर दे। जो पहचान पत्र पुलिस को मिला था, वह अमित ने खुद प्लांट किया था ताकि आकाश को पूरी तरह से डराकर इस घर में कैद किया जा सके।
आकाश ने जब टेबल पर रखे वसीयत के कागजात देखे, तो उसे समझ आ गया कि सम्मोहन और दवाइयों के असर के कारण वह क्या करने जा रहा था। उसके दिमाग का भ्रम अब पूरी तरह से टूट चुका था, और उसका असली गुस्सा और चेतना पूरी ताकत के साथ वापस लौट आई थी। उसने अमित की तरफ देखा, जिसकी आँखों में अब अपनी साजिश के कामयाब होने का एक घिनौना और लालची घमंड साफ दिखाई दे रहा था।
लेकिन अमित यह भूल गया था कि जब किसी इंसान के दिमाग को हद से ज्यादा प्रताड़ित किया जाता है, तो उसका सबकॉन्शियस माइंड एक नया रूप ले लेता है। आकाश ने पूरी ताकत से अमित पर हमला किया, लेकिन जैसे ही उसका हाथ अमित के गले तक पहुँचा, उसका हाथ अमित के शरीर के आर-पार निकल गया। आकाश दंग रह गया, क्योंकि इस बार कोई प्रोजेक्टर या भ्रम नहीं था, उसका हाथ वाकई हवा में तैर रहा था।
तभी कमरे का असली दरवाजा खुला और डॉक्टर की सफेद पोशाक में कुछ लोग अंदर आए, जिन्होंने अमित के शरीर को एक स्ट्रेचर पर रखा हुआ था। डॉक्टर ने रोहतक के सरकारी अस्पताल के स्टाफ से कहा कि इस मरीज अमित को पिछले तीन साल से अपनी ही मौत का गहरा सदमा लगा हुआ है। अमित असल में वह वैज्ञानिक था जिसकी मौत तीन साल पहले नेपाल के उसी सड़क हादसे में हो चुकी थी, जहाँ वह आकाश के साथ सफर कर रहा था।
हादसे में आकाश तो बच गया था, लेकिन अपने सबसे अच्छे दोस्त अमित की मौत के गम में वह खुद को अमित समझने की मानसिक बीमारी का शिकार हो गया था। यह पूरी बातचीत, यह कमरा, यह वैज्ञानिक प्रयोग और खुद को भूत समझना, सब कुछ अस्पताल के एक विशेष वॉर्ड के अंदर चल रहा था। आकाश, जो खुद को अमित समझकर बातें कर रहा था, शीशे के पीछे खड़े डॉक्टरों को देखकर पागलों की तरह हंसने लगा, क्योंकि अब वह खुद नहीं जानता था कि वह आकाश था या अमित।