कोहरा

कोहरा | छिपे हुए रहस्य|

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कोहरा part-1

नव्या अपने जीवन के पच्चीसवें वर्ष में कदम रख चुकी थी, परंतु उसके मन के किसी कोने में एक ऐसा अंधकार था जो उसे कभी चैन से जीने नहीं देता था। वह अक्सर सोते-सोते चौंक कर उठ जाती थी और उसकी आंखों के सामने एक धुंधली सी आकृति तैरने लगती थी। उसे लगता था कि उसका अतीत कोई सामान्य बीता हुआ समय नहीं, बल्कि एक ऐसा भयावह रहस्य है जिसे उससे जानबूझकर छुपाया गया है।

उसके माता-पिता, देवराज और सुमित्रा, हमेशा उसकी इस घबराहट को उसका वहम कहकर टाल देते थे और उसे मानसिक शांति की दवाइयां खाने की सलाह देते थे। परंतु नव्या जानती थी कि दवाइयों के इस चक्रव्यूह के पीछे कोई बहुत बड़ी सच्चाई छुपी हुई है।

एक दिन नव्या को अपने घर के पुराने और कबाड़ से भरे बेसमेंट में जाने का मौका मिला, जहां सामान्यतः किसी को जाने की अनुमति नहीं थी। वहां धूल से सने हुए डिब्बों और टूटे हुए सामानों के बीच उसे एक लोहे का पुराना संदूक मिला, जिस पर एक अजीब सा ताला लटका हुआ था। उसने किसी तरह एक पुराने पेचकश की मदद से उस ताले को तोड़ा और उसके भीतर रखी चीजों को देखकर उसकी सांसें थम गईं। संदूक के अंदर कुछ पुरानी तस्वीरें थीं जिनमें एक छोटी बच्ची थी, जो हूबहू नव्या जैसी दिखती थी, लेकिन उस बच्ची के साथ एक और महिला खड़ी थी जो उसकी मां सुमित्रा नहीं थी।

उस अज्ञात महिला की आंखों में एक अजीब सा खौफ और बेबसी साफ देखी जा सकती थी, जिसने नव्या के दिल में बेचैनी पैदा कर दी। तस्वीरों के नीचे एक छोटी सी डायरी दबी हुई थी, जिसके पन्ने पीले पड़ चुके थे और उन पर खून जैसे गहरे कत्थई रंग के कुछ धब्बे थे। नव्या ने कांपते हाथों से उस डायरी को खोला और उसके पहले पन्ने पर लिखा नाम पढ़ा—’अनामिका’।

यह नाम नव्या ने अपने पूरे जीवन में कभी नहीं सुना था, लेकिन इसे पढ़ते ही उसके दिमाग में बिजली सी कौंधी और एक तीव्र दर्द का अहसास हुआ। उसने महसूस किया कि यह नाम सीधे तौर पर उसके उस अतीत से जुड़ा हुआ है जिसे वह भूल चुकी है।

नव्या ने डायरी के पन्नों को पलटना शुरू किया, जिसमें लिखी हर एक पंक्ति उसके पैरों तले की जमीन खिसका रही थी। डायरी में लिखा था कि देवराज और सुमित्रा की अपनी कोई संतान नहीं थी और वे समाज में अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। अनामिका नाम की वह महिला कोई और नहीं बल्कि नव्या की सगी मां थी, जिसे एक बेहद सोची-समझी साजिश के तहत इस घर में बंदी बनाकर रखा गया था।

नव्या को यह समझ में आने लगा कि जिसे वह अपना खुशहाल परिवार मानती थी, वह वास्तव में झूठ और फरेब की एक ऐसी मजबूत बुनियाद पर खड़ा था जिसकी कल्पना भी रूह कंपा देने वाली थी।

डायरी में आगे जो खुलासे थे, वे नव्या के अस्तित्व को झकझोर देने के लिए पर्याप्त थे क्योंकि उसमें लिखा था कि देवराज ने अनामिका को धोखा देकर उसका सब कुछ छीन लिया था। अनामिका एक अनाथ लड़की थी जिसके पास संपत्ति के नाम पर एक विशाल जमीन का टुकड़ा था, जिसे देवराज अपनी व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं के लिए हड़पना चाहता था।

उसने अनामिका को प्रेम के जाल में फंसाया, उससे विवाह का ढोंग किया और जब नव्या का जन्म हुआ, तो उसने अनामिका को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की योजना बना डाली। नव्या को समझ में आ गया कि उसकी धुंधली यादों में जो चीखें सुनाई देती थीं, वे वास्तव में उसकी असली मां की थीं।

कोहरा part-2

कोहरा

नव्या अभी उस डायरी के आखिरी पन्नों को पढ़ ही रही थी कि अचानक बेसमेंट की सीढ़ियों पर किसी के कदमों की आहट सुनाई दी, जिससे उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने फुर्ती से डायरी को अपनी कुर्ती के भीतर छुपाया और संदूक को वैसे ही बंद कर दिया जैसे वह पहले था। जब उसने मुड़कर देखा, तो सामने उसके पिता देवराज खड़े थे, जिनकी आंखों में हमेशा रहने वाली सौम्यता की जगह एक अजीब सी क्रूरता और संदेह की भावना साफ झलक रही थी। देवराज ने नव्या के चेहरे के उड़ते हुए रंग को भांप लिया और बेहद ठंडे स्वर में पूछा कि वह इस अंधेरे और कबाड़ से भरे बेसमेंट में क्या ढूंढ रही है।

नव्या ने अपनी घबराहट को छुपाने का पूरा प्रयास करते हुए कहा कि वह बस अपनी कुछ पुरानी किताबें ढूंढने आई थी, लेकिन देवराज की नजरें उस टूटे हुए ताले पर जा टिकीं। माहौल में एक ऐसा सन्नाटा पसर गया जो किसी बड़े तूफान के आने से पहले की खामोशी जैसा महसूस हो रहा था। देवराज धीरे-धीरे नव्या की तरफ बढ़ने लगा और उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान तैर गई जिसे देखकर नव्या के बदन में सिहरन दौड़ गई। उसने नव्या के कंधे पर हाथ रखा और कहा कि कुछ यादों को दफन ही रहने देना चाहिए क्योंकि उन्हें खोदने से केवल तबाही और दर्द ही बाहर आता है।

उस रात नव्या अपने कमरे में खुद को बंद करके फूट-फूट कर रोई, क्योंकि उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिन माता-पिता की उसने पूजा की थी, वे असल में अपराधी थे। उसने तय किया कि वह इस सच्चाई की तह तक जाएगी और अपनी मां अनामिका के साथ हुए अन्याय का पूरा सच सामने लेकर आएगी, चाहे इसके लिए उसे कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

उसने आधी रात को डायरी के बचे हुए पन्नों को पढ़ना शुरू किया, जिसमें अनामिका के अंतिम दिनों का अत्यंत दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला विवरण लिखा हुआ था। डायरी के अंतिम पन्नों में सुमित्रा के उस क्रूर चेहरे का वर्णन था जिसने नव्या को पूरी तरह से भीतर तक हिलाकर रख दिया।

डायरी के अनुसार, सुमित्रा केवल देवराज की मूक दर्शक नहीं थी, बल्कि वह अनामिका को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने की इस पूरी साजिश की मुख्य सूत्रधार थी। सुमित्रा ने ही अनामिका को ऐसी दवाइयां देना शुरू किया था जिससे वह धीरे-धीरे अपनी सुध-बुध खोने लगी और समाज की नजरों में उसे एक मानसिक रोगी घोषित कर दिया गया।

नव्या को अब समझ में आया कि उसे भी बचपन से जो दवाइयां दी जा रही थीं, उनका मकसद उसकी याददाश्त को हमेशा के लिए दबाए रखना था। वह समझ गई कि उसके माता-पिता उसे पागल नहीं बना रहे थे, बल्कि वे उसके भीतर छिपी हुई उस चश्मदीद गवाह को मार रहे थे जो उनके पापों का घड़ा फोड़ सकती थी।

डायरी का आखिरी पन्ना आधा फटा हुआ था, लेकिन उस पर लिखा था कि अगर कोई यह डायरी पढ़े, तो वह घर के पिछले हिस्से में मौजूद उस पुराने कुएं के पास जाए जहां सब कुछ खत्म कर दिया गया था। नव्या के शरीर में एक अजीब सा साहस जाग उठा और उसने उसी अंधेरी रात में हाथ में एक छोटी टॉर्च लेकर घर के पिछले हिस्से की तरफ बढ़ने का फैसला किया।

वहां चारों तरफ घनी झाड़ियां और सन्नाटा था, और हवा की सरसराहट में उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसकी मां की आत्मा उसे अपनी तरफ पुकार रही हो। वह जैसे ही उस सूखे और बंद पड़े कुएं के पास पहुंची, उसे झाड़ियों में किसी के छिपे होने का आभास हुआ।

वह कोई और नहीं बल्कि सुमित्रा थी, जो हाथ में एक भारी लोहे की रॉड लिए खड़ी थी और उसकी आंखों में ममता का नामोनिशान तक नहीं था, केवल एक हिंसक पशु जैसी क्रूरता थी। सुमित्रा ने हंसते हुए कहा कि उसे पहले ही शक हो गया था कि नव्या को सच का पता चल चुका है, और उसने इतने साल जिस राज को छुपाकर रखा, उसे वह बर्बाद नहीं होने देगी।

सुमित्रा ने खुलासा किया कि अनामिका की हत्या करके उसकी लाश को इसी कुएं के नीचे पत्थरों के बीच दबा दिया गया था, ताकि कभी कोई सबूत बाहर न आ सके। नव्या यह सुनकर स्तब्ध रह गई कि उसकी मां की अस्थियां इतने सालों से उसी जमीन के नीचे दबी हुई थीं जिस पर वह खेल कर बड़ी हुई थी।

तभी अंधेरे में से देवराज भी बाहर निकल आया और उसने नव्या से कहा कि अगर वह चुपचाप वह डायरी उसके हवाले कर दे और सब कुछ भूल जाए, तो वे उसे अपनी बेटी बनाकर रखते रहेंगे। नव्या ने चिल्लाकर कहा कि वह ऐसे हत्यारों को अपने माता-पिता कभी नहीं मान सकती और वह पुलिस को सब कुछ बता देगी, जिससे देवराज के चेहरे पर गुस्सा भड़क उठा।

देवराज ने सुमित्रा को इशारा किया और दोनों नव्या की तरफ उसे उसी कुएं में धकेलने के इरादे से बढ़ने लगे ताकि इस आखिरी गवाह को भी हमेशा के लिए खामोश किया जा सके। नव्या ने पीछे हटने का प्रयास किया, लेकिन उसका पैर एक पत्थर से टकराया और वह जमीन पर गिर पड़ी, जिससे उसका फोन दूर जा गिरा।

जैसे ही देवराज ने नव्या को उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, नव्या ने पूरी ताकत से जमीन पर पड़ी धूल और कंकड़ उसकी आंखों में फेंक दिए, जिससे देवराज दर्द से चिल्ला उठा। सुमित्रा ने नव्या पर रॉड से हमला करने की कोशिश की, लेकिन नव्या ने फुर्ती से खुद को बचाया और सुमित्रा का हाथ पकड़कर उसे पीछे की तरफ ढकेल दिया, जिससे सुमित्रा का संतुलन बिगड़ गया।

सुमित्रा सीधे उस पुराने कुएं के जर्जर हो चुके सड़े हुए लकड़ी के ढांचे पर जा गिरी, जो उसका वजन नहीं संभाल सका और वह चीखते हुए उस गहरे अंधेरे कुएं में गिर गई। कुएं के भीतर से एक भयानक चीख गूंजी और फिर चारों तरफ एक गहरा, डरावना सन्नाटा पसर गया जो सुमित्रा के अंत की घोषणा कर रहा था।

देवराज अपनी आंखों को मलते हुए जब तक कुछ समझ पाता, नव्या ने उसका गिरा हुआ फोन उठाया और पहले से डायल किए गए पुलिस के नंबर पर बात करना शुरू कर दिया, जो उसने चुपके से ऑन कर रखा था। पुलिस की गाड़ियां कुछ ही मिनटों में वहां पहुंच गईं क्योंकि नव्या ने घर से निकलने से पहले ही स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक गुप्त संदेश भेज दिया था।

देवराज को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया, और जब कुएं की तलाशी ली गई तो वहां सुमित्रा के शव के साथ-साथ कई साल पुराने कंकाल के अवशेष भी मिले, जो अनामिका के थे। इस प्रकार उस घर के भीतर बरसों से छुपा हुआ वह भयानक और काला रहस्य पूरी दुनिया के सामने आ गया।

नव्या ने अपनी मां अनामिका के अवशेषों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया और उस संपत्ति को एक अनाथालय के नाम कर दिया, जिसे हथियाने के लिए उसकी मां की जान ली गई थी। वह अब उस कटीली यादों और फरेब के जाल से पूरी तरह मुक्त हो चुकी थी, हालांकि उसके दिल पर लगे घाव कभी पूरी तरह नहीं भर सकते थे।

उसने सीखा कि सच को चाहे कितने भी गहरे अंधेरे में दफना दिया जाए, वह एक दिन उजाले में अवश्य आता है और पापियों को उनके कर्मों की सजा भुगतनी ही पड़ती है। नव्या ने एक नए शहर में, अपनी असली पहचान और अपनी मां की यादों को सीने से लगाकर, एक स्वतंत्र और नए जीवन की शुरुआत की।

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