निकोला टेस्ला और AC करंट की क्रांति
निकोला टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को आधुनिक क्रोएशिया के स्मिलजान गाँव में हुआ था। उनके पिता एक रूढ़िवादी पादरी थे और चाहते थे कि टेस्ला भी धर्म की राह पर चलें, लेकिन टेस्ला की माँ बहुत ही रचनात्मक और बुद्धिमान महिला थीं, जो घर के छोटे-मोटे काम आसान करने के लिए खुद ही नए-नए उपकरण और औजार बना लेती थीं।
टेस्ला ने अपनी माँ से ही यह अनोखी रचनात्मकता और दिमागी ताकत विरासत में पाई थी। बचपन से ही टेस्ला की कल्पनाशक्ति इतनी तीव्र थी कि वे किसी भी मशीन या आविष्कार को बिना कागज पर उतारे, केवल अपने दिमाग में ही पूरी तरह से डिजाइन कर लेते थे और उसे चलता हुआ भी देख सकते थे।
जब वे बड़े हुए, तो उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वहीं पर उन्होंने पहली बार थॉमस एडिसन के डायरेक्ट करंट यानी DC सिस्टम की कमियों को बहुत करीब से देखा और समझा।
साल 1884 में निकोला टेस्ला केवल अपनी जेब में चार सेंट, कुछ कविताएं और एक बेहद खास सिफारिशी पत्र लेकर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर पहुंचे। यह पत्र थॉमस एडिसन के यूरोपियन सहयोगी ने खुद एडिसन के नाम लिखा था, जिसमें लिखा था कि ‘मैं दुनिया के दो महान लोगों को जानता हूँ, एक आप हैं और दूसरा यह युवा लड़का है।’ एडिसन ने तुरंत ही टेस्ला को अपनी कंपनी ‘एडिसन मशीन वर्क्स’ में काम पर रख लिया।
उस समय एडिसन का पूरा साम्राज्य DC करंट पर आधारित था, लेकिन DC करंट में एक सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इसे एक या दो किलोमीटर से ज्यादा दूर तक नहीं भेजा जा सकता था।
दूरी बढ़ने पर बिजली का वोल्टेज बहुत तेजी से गिर जाता था, जिससे तारों में बहुत भारी मात्रा में ऊर्जा का नुकसान होता था। टेस्ला ने इस गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए एडिसन को अल्टरनेटिंग करंट यानी AC करंट का क्रांतिकारी विचार सुझाया।
एडिसन से टकराव और वैचारिक युद्ध की शुरुआत
एडिसन ने टेस्ला के AC करंट के इस जादुई और क्रांतिकारी विचार को सिरे से खारिज कर दिया क्योंकि एडिसन पहले ही DC सिस्टम के इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके पेटेंट्स में भारी मात्रा में अपना पैसा निवेश कर चुके थे।
एडिसन को लगा कि अगर टेस्ला का यह नया सिस्टम बाजार में आ गया, तो उनका पूरा का पूरा साम्राज्य पूरी तरह तबाह हो जाएगा। इसी बीच एक दिन एडिसन ने टेस्ला के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती रखी कि यदि टेस्ला उनकी कंपनी के पुराने और अक्षम हो चुके DC जनरेटरों की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार कर देंगे, तो वे टेस्ला को इनाम के तौर पर 50,000 डॉलर की भारी रकम देंगे। टेस्ला ने दिन-रात एक करके महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उन जनरेटरों को बिल्कुल नए जैसा और पहले से कहीं ज्यादा कुशल बना दिया।
लेकिन जब टेस्ला ने एडिसन से अपनी वादे के मुताबिक इनामी राशि मांगी, तो एडिसन हंस पड़े और बोले कि ‘टेस्ला, तुम हमारे अमेरिकी मजाक को अभी ठीक से नहीं समझते हो।’
इस गहरे धोखे और अपने आत्मसम्मान को लगी भारी ठेस के कारण निकोला टेस्ला ने उसी पल एडिसन की कंपनी से हमेशा के लिए इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद टेस्ला के जीवन का सबसे कठिन और अंधकारमय दौर शुरू हुआ, जहाँ उन्हें अपना पेट भरने और जीवित रहने के लिए न्यूयॉर्क की सड़कों पर गड्ढे खोदने और मजदूरी करने का काम तक करना पड़ा।
लेकिन टेस्ला का इरादा और उनका हौसला अंदर से बेहद मजबूत था, वे शारीरिक रूप से थकने के बाद भी रात में अपने दिमाग में केवल AC सिस्टम को बेहतर बनाने की योजनाएं बुनते रहते थे।
आखिरकार साल 1887 में उनकी मुलाकात कुछ ऐसे बड़े निवेशकों से हुई जो उनके असाधारण टैलेंट को पहचानते थे, और उन्होंने टेस्ला को अपनी खुद की एक नई प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद दी, जहाँ टेस्ला ने अपने जीवन का सबसे बड़ा आविष्कार, यानी AC इंडक्शन मोटर, तैयार किया।
करंट का युद्ध: AC बनाम DC का महासंग्राम
टेस्ला के इस नए और चमत्कारी AC इंडक्शन मोटर के पेटेंट्स को मशहूर उद्योगपति जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने एक बहुत बड़ी रकम और भारी रॉयल्टी के वादे पर खरीद लिया। वेस्टिंगहाउस यह भली-भांति समझते थे कि टेस्ला का अल्टरनेटिंग करंट ही दुनिया का भविष्य है क्योंकि इसे ट्रांसफॉर्मर की मदद से लाखों वोल्ट तक बढ़ाया जा सकता था और बेहद पतले तारों के जरिए हजारों मील दूर तक बिना किसी खास नुकसान के भेजा जा सकता था।
इसके बाद इतिहास का सबसे प्रसिद्ध व्यावसायिक युद्ध शुरू हुआ जिसे ‘करंट का युद्ध’ (War of Currents) कहा जाता है। एडिसन ने AC करंट को बदनाम करने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया; उन्होंने सड़कों पर सरेआम बेकसूर जानवरों को AC करंट देकर मार डाला ताकि आम जनता के मन में यह खौफ बैठ सके कि AC करंट बेहद खतरनाक और जानलेवा है, और लोग इसे अपने घरों में लगाने से डरें।
एडिसन की इस डरावनी और नकारात्मक मुहिम के बावजूद, टेस्ला और वेस्टिंगहाउस ने कभी भी हिम्मत नहीं हारी और लगातार वैज्ञानिक तर्कों के साथ आगे बढ़ते रहे।
साल 1893 में शिकागो में आयोजित ‘वर्ल्ड कोलंबियन एक्सपोजिशन’ के दौरान वेस्टिंगहाउस की कंपनी को पूरे मेले को बिजली से रोशन करने का ऐतिहासिक टेंडर मिला, क्योंकि उनकी AC तकनीक एडिसन की DC तकनीक के मुकाबले बहुत ज्यादा सस्ती और बेहद कुशल थी।
जब उस विशाल और भव्य मेले का उद्घाटन हुआ, तो एक साथ लाखों चमचमाते AC बल्बों की रोशनी से पूरा शहर जगमगा उठा, जिसने वहाँ मौजूद दुनिया भर के वैज्ञानिकों और लाखों लोगों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह टेस्ला के जीवन की सबसे पहली और सबसे बड़ी सार्वजनिक जीत थी, जिसने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया कि भविष्य केवल और केवल AC करंट का ही है।
नियाग्रा फॉल्स का चमत्कार और वैश्विक विजय

शिकागो मेले की शानदार सफलता के तुरंत बाद, टेस्ला और वेस्टिंगहाउस को दुनिया का सबसे पहला और ऐतिहासिक हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनाने का काम सौंपा गया, जो नियाग्रा फॉल्स के विशाल और शक्तिशाली बहते पानी के झरने पर बनना था।
एडिसन और उनकी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए भी कई तरह की मुश्किलें खड़ी कीं और दावे किए कि नियाग्रा के झरने से इतनी भारी मात्रा में बिजली बनाकर उसे दूर शहरों तक भेजना पूरी तरह नामुमकिन है। लेकिन निकोला टेस्ला को अपनी गणनाओं और अपने आविष्कारों पर अटूट और पूरा भरोसा था।
साल 1896 में जब नियाग्रा फॉल्स के इस ऐतिहासिक पावर प्लांट के विशाल स्विच को ऑन किया गया, तो वहाँ से पैदा हुई भारी बिजली पलक झपकते ही करीब 26 मील दूर स्थित बफ़ेलो शहर तक पूरी सुरक्षा के साथ पहुंच गई और पूरा शहर रोशनी से नहा उठा।
नियाग्रा फॉल्स की इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता ने दुनिया भर में थॉमस एडिसन के डायरेक्ट करंट (DC) के साम्राज्य का हमेशा-हमेशा के लिए अंत कर दिया।
इसके बाद पूरी दुनिया ने बहुत तेजी से अल्टरनेटिंग करंट (AC) सिस्टम को अपनाना शुरू कर दिया क्योंकि यह न केवल उद्योगों को चलाने के लिए बल्कि हर एक आम इंसान के घर तक सस्ती बिजली पहुंचाने का एकमात्र जरिया बन चुका था।
निकोला टेस्ला रातों-रात दुनिया के सबसे अमीर इंसानों में से एक बन सकते थे क्योंकि वेस्टिंगहाउस के साथ हुए समझौते के मुताबिक उन्हें हर एक यूनिट बिजली की बिक्री पर भारी रॉयल्टी मिलनी थी।
लेकिन जब वेस्टिंगहाउस की कंपनी आर्थिक संकट में फंसी और दिवालिया होने की कगार पर आई, तो टेस्ला ने बिना एक पल सोचे अपना वह ऐतिहासिक रॉयल्टी कॉन्ट्रैक्ट फाड़ दिया ताकि कंपनी बच सके और उनका AC सिस्टम दुनिया की सेवा करता रहे।
टेस्ला की अनमोल विरासत और अंतिम विदाई
निकोला टेस्ला पैसों के पीछे भागने वाले पारंपरिक और व्यावसायिक बिजनेसमैन नहीं थे, वे एक सच्चे और शुद्ध मानवतावादी वैज्ञानिक थे जिनका एकमात्र उद्देश्य विज्ञान के जरिए पूरी मानव सभ्यता के जीवन को सरल और बेहतर बनाना था।
जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्होंने वायरलेस एनर्जी यानी बिना तारों के पूरी दुनिया में मुफ्त बिजली भेजने के प्रोजेक्ट ‘वार्डनक्लिफ टॉवर’ पर भी काम किया, लेकिन फंड की भारी कमी और निवेशकों के पीछे हटने के कारण उनका यह अद्भुत सपना उनके जीते-जी कभी पूरा नहीं हो सका।
टेस्ला ने अपने जीवन में कुल मिलाकर 300 से भी ज्यादा पेटेंट हासिल किए, जिनमें आज के समय की आधुनिक तकनीकें जैसे कि रेडियो, रिमोट कंट्रोल, एक्स-रे, रोबोटिक्स और नियॉन लाइटिंग की बुनियादी नींव पूरी तरह से शामिल थी।
साल 1943 में 7 जनवरी को न्यूयॉर्क के एक साधारण से होटल के कमरे में इस महान और निस्वार्थ वैज्ञानिक ने अंतिम सांस ली, जहाँ वे बिल्कुल अकेले और कर्ज में डूबे हुए थे।
उनकी मृत्यु के बाद दुनिया को यह गहराई से अहसास हुआ कि आज हम जिस आधुनिक, तकनीकी और बिजली से जगमगाती दुनिया में सांस ले रहे हैं, उसे बनाने में सबसे बड़ा और अमूल्य योगदान केवल निकोला टेस्ला का ही था।
आज जब भी हम अपने घरों का कोई भी पंखा चालू करते हैं, एयर कंडीशनर चलाते हैं या दीवार के किसी स्विच से बिजली का इस्तेमाल करते हैं, तो हम अनजाने में निकोला टेस्ला के उसी महान आविष्कार और उनकी उसी अद्भुत दिमागी कल्पनाशक्ति का शुक्रिया अदा कर रहे होते हैं जिसने पूरी मानव सभ्यता को हमेशा के लिए एक नई और अनंत रोशनी से भर दिया।
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प्रस्तुति: Saying Central Team