रियाँ बनी तितलियाँ (परी कथा)
परिस्तान एक बहुत ही सुंदर और जादुई दुनिया थी, जहाँ केवल परियाँ रहती थीं। वहाँ हर जगह खुशियाँ थीं, न कोई दुख था, न कोई चिंता। फूल हमेशा खिले रहते थे, बादल धीरे-धीरे तैरते रहते थे और तारे रात में ऐसे चमकते थे जैसे आसमान में किसी ने मोती बिखेर दिए हों। लेकिन परियों को धरती के बारे में बहुत उत्सुकता थी। वे अक्सर सुनती थीं कि धरती पर भी बहुत सुंदरता है, इसलिए एक दिन सात परियों ने धरती पर जाने का निश्चय किया।
जब वे धरती पर पहुँचीं, तो दृश्य देखकर बहुत खुश हो गईं। चारों तरफ हरियाली थी, ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे, रंग-बिरंगे फूलों से भरे बगीचे थे और झरनों की मीठी आवाज़ वातावरण को और भी सुंदर बना रही थी। खुले आसमान में पक्षी उड़ रहे थे और खेतों में सुनहरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। यह सब देखकर परियों को धरती किसी सपनों की दुनिया जैसी लगी।
परियों को सबसे अधिक एक सुंदर बगीचा आकर्षित कर रहा था। वहाँ हर रंग के फूल खिले हुए थे और उनके चारों ओर रंग-बिरंगी तितलियाँ उड़ रही थीं। उन तितलियों की हल्की उड़ान और सुंदर रंग देखकर परियाँ बहुत प्रसन्न हुईं। उन्हें भी तितलियों के साथ खेलने का मन हुआ और उन्होंने जादू से अपने रूप को बदलकर तितलियों का रूप ले लिया।
अब सातों परियाँ तितलियों के रूप में फूलों के बीच उड़ने लगीं। कोई नीली तितली बनी थी, कोई लाल, कोई पीली और कोई हरी। वे फूलों पर बैठतीं, हवा में उड़तीं और आनंद से गुनगुनातीं। यह उनका रोज़ का खेल बन गया था कि वे धरती पर आतीं और तितली बनकर प्रकृति के साथ खुशियाँ मनातीं।
एक दिन उस बगीचे में एक छोटा सा बच्चा आया, जिसका नाम हरजोध था। वह बहुत जिज्ञासु और मासूम बच्चा था। वह फूलों के बीच खेल रहा था, तभी उसकी नजर एक बहुत सुंदर चमकदार तितली पर पड़ी। वह तितली असल में एक परी थी, लेकिन हरजोध को यह पता नहीं था। उसने उत्सुकता में उस तितली को पकड़ लिया।
तितली के रूप में मौजूद परी डर गई। उसे लगा कि अगर वह पकड़ में रही तो वह वापस परिस्तान नहीं जा पाएगी। लेकिन वह कुछ बोल नहीं सकती थी, क्योंकि वह तितली के रूप में थी। फिर भी उसकी आँखों और पंखों की हलचल से ऐसा लग रहा था जैसे वह आज़ादी चाहती हो।
हरजोध ने ध्यान से उस तितली को देखा और उसे कुछ अलग महसूस हुआ। उसने धीरे से पूछा कि क्या वह आज़ाद होना चाहती है। तितली ने अपने पंख हिलाए, जैसे वह हाँ कह रही हो। यह देखकर हरजोध को समझ आ गया कि तितली को स्वतंत्रता चाहिए। उसने मुस्कुराकर उसे छोड़ दिया और कहा कि उसे उड़ने की आज़ादी मिलनी चाहिए।
जैसे ही हरजोध ने तितली को छोड़ा, वह खुशी से उड़ गई। थोड़ी ही देर बाद उसने आसमान में एक चमकदार गोला बनाया और धीरे-धीरे गायब हो गई। यह देखकर हरजोध को आश्चर्य भी हुआ और खुशी भी। उसे ऐसा लगा जैसे उसने किसी खास चीज़ की रक्षा की हो।
उसी रात हरजोध को एक सुंदर सपना आया। उसके सामने वही तितली प्रकट हुई, लेकिन अब वह एक सुंदर परी में बदल चुकी थी। उसके चमकदार पंख थे और चेहरा बहुत शांत और सुंदर था। परी ने मुस्कुराकर कहा कि हरजोध ने उसे आज़ाद किया है, इसलिए वह उसे धन्यवाद देने आई है।
परी ने अपने जादू से हरजोध को अपने साथ परिस्तान ले जाने का निर्णय लिया। वे दोनों हवा में उड़ते हुए एक चमकदार रास्ते से होकर परियों की दुनिया में पहुँच गए। वहाँ हर जगह रोशनी, फूल और खुशियाँ थीं। हरजोध को वहाँ जादुई फल खाने को मिले और एक चमकदार दूध पीने को मिला, जिससे उसे बहुत खुशी और ऊर्जा महसूस हुई।
हरजोध ने वहाँ परियों के साथ बहुत समय बिताया। वह उनके साथ खेला, हँसा और जादुई दुनिया का आनंद लिया। फिर परी ने उसे बताया कि अब उसे वापस जाना होगा, लेकिन उसने यह भी वादा किया कि जब भी कोई किसी को आज़ादी देगा या किसी की मदद करेगा, तो परियाँ हमेशा उसके साथ रहेंगी।
सुबह जब हरजोध की नींद खुली, तो वह अपने बिस्तर पर था। उसे लगा कि शायद यह एक सपना था, लेकिन उसके पास एक चमकदार पंख रखा हुआ था। यह देखकर वह समझ गया कि यह सपना नहीं बल्कि एक सच्चा अनुभव था। उस दिन के बाद हरजोध बदल गया। वह हर तितली, पक्षी और जानवर को प्यार और सम्मान देने लगा। वह अब तितलियों को पकड़ता नहीं था, बल्कि उन्हें उड़ते हुए देखता और उनकी सुंदरता का आनंद लेता था।
चाँद की परी और सरगम की उड़ान (परी कथा)

सरगम हर रात अपने घर की छत पर जाकर चाँद को देखा करती थी। चाँद की दूधिया रोशनी उसके चेहरे पर पड़ती तो उसे लगता जैसे कोई अपना उसे पुकार रहा हो। वह देर तक चाँद को निहारती रहती और उसके मन में अनगिनत सवाल और सपने जन्म लेने लगते थे। उसे चाँद किसी साधारण आकाशीय पिंड जैसा नहीं, बल्कि एक जीवित साथी जैसा लगता था, जो उसकी हर खामोशी को समझता था।
उसकी दादी-माँ अक्सर उसे चाँद की परी की कहानियाँ सुनाया करती थीं। वे कहती थीं कि चाँद पर एक सुंदर परी रहती है, जो रात में चाँदी के धागों से रोशनी की चादर बुनती है और उसे धरती पर भेजती है। सरगम इन कहानियों को सुनकर सो जाती, लेकिन उसके मन में हमेशा यह इच्छा बनी रहती कि क्या सच में चाँद पर कोई परी रहती है।
धीरे-धीरे चाँद उसके लिए केवल एक गोला नहीं रह गया, बल्कि एक ऐसा द्वार बन गया जहाँ से वह अपने सपनों की दुनिया में प्रवेश कर सकती थी। वह अक्सर सोचती कि अगर उसे कभी उड़ने की शक्ति मिल जाए, तो वह पूरी धरती को ऊपर से देखेगी—नदियाँ, पहाड़, जंगल और आसमान के सारे रहस्य समझेगी।
एक रात जब सरगम गहरी नींद में थी, उसे एक अद्भुत सपना आया। आसमान शांत था और चाँद अपने पूरे सौंदर्य में चमक रहा था। अचानक चाँद की रोशनी में से एक उजली आकृति नीचे उतरने लगी। वह चाँद की परी थी—चमकदार पंखों वाली, शांत मुस्कान लिए हुई, जैसे स्वयं चाँद की आत्मा धरती पर आ गई हो।
परी ने धीरे से कहा कि वह सरगम को लंबे समय से देख रही है और उसके मन की इच्छाएँ सुन रही है। सरगम ने उत्साह से कहा कि वह उड़ना चाहती है, ताकि वह पूरी दुनिया को नए दृष्टिकोण से देख सके। लेकिन परी ने समझाया कि उड़ने की शक्ति केवल शरीर से नहीं, बल्कि मन के गुणों से जुड़ी होती है—जैसे सच्चाई, धैर्य, विनम्रता, साहस और करुणा।
सरगम ने बिना किसी हिचक के वादा किया कि वह इन गुणों को हमेशा अपनाएगी। यह सुनकर परी मुस्कुराई और अपनी चाँदी जैसी छड़ी सरगम के माथे से स्पर्श की। उसी क्षण सरगम को महसूस हुआ कि उसका शरीर हल्का हो गया है और वह धीरे-धीरे हवा में उठने लगी।
वह आसमान में ऊपर उठती गई और नीचे उसका गाँव धीरे-धीरे छोटा होता गया। खेत, घर और पेड़ खिलौनों जैसे दिखने लगे। हवा में एक मधुर संगीत गूंज रहा था, जैसे आसमान खुद उसके स्वागत में गीत गा रहा हो। सरगम को ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी नए संसार में प्रवेश कर रही हो।
कुछ ही देर में वह बादलों के बीच पहुँच गई। बादल मुलायम और सफेद रूई जैसे थे, जिन्हें वह छू सकती थी। वह हँसते हुए उनके बीच खेलने लगी, कभी किसी बादल के पीछे छिपती, तो कभी उसके ऊपर बैठ जाती। बादलों का संसार उसके लिए एक अद्भुत खेल का मैदान बन गया था।
उड़ते-उड़ते उसकी मुलाकात दो चमकीले पक्षियों से हुई, जिन्होंने खुद को आसमान के रक्षक बताया। वे उसे एक ऐसे स्थान पर ले गए जहाँ एक विशाल इंद्रधनुष चमक रहा था। सरगम उसके ऊपर से गुज़री और हर रंग ने उसे एक नया अनुभव दिया—लाल ने साहस, हरा ने शांति, नीला ने गहराई और जामुनी ने कल्पना का एहसास कराया।
इंद्रधनुष के पार एक सुनहरा तैरता हुआ द्वीप दिखाई दिया, जहाँ हर चीज़ जीवंत और संगीत से भरी हुई थी। वहाँ सरगम को एक जादुई जीव मिला, जिसने बताया कि यह द्वीप केवल उन्हीं को मिलता है जिनके दिल सच्चे और निडर होते हैं। यह सुनकर सरगम के भीतर आत्मविश्वास और बढ़ गया।
द्वीप पर उसने कई जादुई अनुभव किए—एक जंगल जहाँ आवाज़ें गूँजकर सचाई को उजागर करती थीं, एक झील जो करुणा की शक्ति दिखाती थी और एक पहाड़ जहाँ विश्वास के आधार पर अदृश्य सीढ़ियाँ दिखाई देती थीं। हर अनुभव ने सरगम को और मजबूत और समझदार बना दिया।
इन सभी परीक्षाओं के बाद सरगम चाँद की चोटी पर पहुँच गई, जहाँ चाँद की परी उसका इंतज़ार कर रही थी। परी ने मुस्कुराकर कहा कि सरगम ने अपने गुणों से स्वयं को योग्य साबित कर दिया है। यह सुनकर सरगम बहुत खुश हुई और उसे गर्व महसूस हुआ।
परी ने उसे एक चमकदार किताब दी, जिसमें ज्ञान, कहानियाँ और जादुई गीत थे।
उसने कहा कि यह किताब उसके मन को हमेशा उजला और मजबूत बनाए रखेगी। फिर धीरे-धीरे परी मुस्कुराकर गायब हो गई और सरगम अपने बिस्तर पर लौट आई। सुबह जब सरगम जागी, तो उसे समझ नहीं आया कि यह सपना था या सच, लेकिन उसके पास वह चमकदार किताब मौजूद थी।
अब वह जान चुकी थी कि सपने केवल कल्पना नहीं होते, बल्कि वे हमें बेहतर इंसान बनने की दिशा दिखाते हैं।
उस दिन के बाद सरगम चाँद को पहले से भी अधिक प्रेम से देखने लगी, क्योंकि उसे विश्वास था कि कहीं न कहीं उसकी परी हमेशा उसे देख रही है।
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बालकथाएँ बच्चों के लिए रोचक, सरल और प्रेरणादायक कहानियाँ होती हैं। ये उनकी कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्यों, भाषा कौशल और रचनात्मक सोच को विकसित करती हैं। मनोरंजन के साथ-साथ जीवन की महत्वपूर्ण सीख भी प्रदान करती हैं।
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प्रस्तुति: Saying Central Team