रात

“उस रात मेरे कमरे में जो आदमी आया…वो मैं ही था।”

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“मेरी पत्नी तीन साल पहले मर चुकी थी… फिर पिछले छह महीनों से मेरे साथ कौन रह रहा था?”

बारिश उस रात कुछ ज़्यादा ही अजीब थी। सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि आरव के दिमाग के अंदर भी जैसे बूंदें गिर रही थीं। हर आवाज़ उसे बेचैन कर रही थी। घड़ी की टिक-टिक, बिजली की चमक, खिड़की पर पड़ती बारिश, और सबसे ज्यादा… उसके फोन पर बार-बार आने वाला वही Unknown Number। पिछले पंद्रह दिनों से रोज़ रात ठीक 2:17 पर फोन आता था। सामने वाला कभी कुछ बोलता नहीं था, सिर्फ सांसों की आवाज़ सुनाई देती थी। लेकिन आज पहली बार कॉल उठाते ही दूसरी तरफ से एक धीमी आवाज़ आई—

“तुम्हें अभी भी याद नहीं आया… तुमने उसके साथ क्या किया था?”

आरव का गला सूख गया। उसने तुरंत फोन काट दिया, लेकिन उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था जैसे किसी ने उसके सीने में बम फिट कर दिया हो। वह कई महीनों से एक ही समस्या से जूझ रहा था—याददाश्त के टूटे हुए टुकड़े। उसे कुछ चीज़ें याद रहती थीं और कुछ अचानक गायब हो जाती थीं। डॉक्टर इसे “ट्रॉमा बेस्ड मेमोरी डिसऑर्डर” कहते थे, लेकिन आरव को लगता था कि मामला सिर्फ बीमारी का नहीं है। उसके सपनों में हर रात एक लड़की चीखती थी, खून से सना एक कमरा दिखता था, और एक आदमी बार-बार कहता था—

“सच याद आ गया तो तुम बचोगे नहीं।”

उसने खुद को संभालने के लिए पानी पिया और कमरे की लाइट ऑन की। तभी उसकी नजर दीवार पर गई। सफेद दीवार पर लाल मार्कर से एक लाइन लिखी थी—

“तुम झूठ बोलते हो, आरव।”

उसके हाथ कांपने लगे। उसने कसम खाई थी कि सोने से पहले यह दीवार बिल्कुल साफ थी। वह अकेला रहता था। फ्लैट की चाबी सिर्फ उसके पास थी। फिर ये किसने लिखा? उसने घबराकर पूरा घर चेक किया, लेकिन अंदर कोई नहीं था। बालकनी बंद थी। मेन गेट अंदर से लॉक था। फिर भी उसे ऐसा लग रहा था कि कमरे में कोई मौजूद है… कोई उसे देख रहा है।

अचानक उसकी नजर टेबल पर रखी डायरी पर गई। यह वही डायरी थी जिसे उसने पिछले महीने खरीदा था ताकि अपनी भूलने वाली आदतों को रिकॉर्ड कर सके। लेकिन आज उसमें एक नया पन्ना खुला हुआ था। उस पन्ने पर उसकी ही हैंडराइटिंग में लिखा था—

“अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि उन्होंने फिर तुम्हारी याददाश्त मिटा दी।”

आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अगली लाइन पढ़ी—

“किसी पर भरोसा मत करना। खासकर डॉक्टर नीलिमा पर नहीं।”

नीलिमा उसका इलाज कर रही साइकेट्रिस्ट थी। वही पिछले छह महीनों से उसकी काउंसलिंग कर रही थी। वही जिसने उसे समझाया था कि उसकी टूटी हुई यादें सिर्फ मानसिक बीमारी हैं। लेकिन डायरी में आगे लिखा था—

“वो तुम्हें ठीक नहीं कर रही… वो तुम्हें कंट्रोल कर रही है।”

आरव के माथे पर पसीना आ गया। उसे अचानक याद आया कि हर सेशन के बाद उसे कई घंटे याद नहीं रहते थे। जैसे उसकी जिंदगी के कुछ हिस्से कोई काटकर फेंक देता हो। उसने तुरंत नीलिमा को कॉल किया, लेकिन फोन बंद था। उसी पल उसके फोन पर फिर वही Unknown Number चमका। इस बार उसने डरते हुए कॉल रिसीव की। दूसरी तरफ से एक महिला की फुसफुसाती आवाज़ आई—

“अगर सच जानना है… तो बेसमेंट नंबर 17 में जाओ। अभी।”

कॉल कट गई।

रात के ढाई बजे थे। सामान्य इंसान शायद पुलिस को कॉल करता, लेकिन आरव अब सामान्य मानसिक स्थिति में नहीं था। उसके भीतर डर से ज्यादा जिज्ञासा जाग चुकी थी। वह जल्दी से जैकेट पहनकर अपनी बिल्डिंग के बेसमेंट की तरफ गया। पूरा पार्किंग एरिया खाली था। ऊपर टिमटिमाती लाइटें और नीचे फैली अजीब सी खामोशी उसके दिमाग को और भारी कर रही थी। बेसमेंट नंबर 17 असल में एक पुराना स्टोर रूम था, जो सालों से बंद पड़ा था।

दरवाजा आधा खुला हुआ था। अंदर घुप अंधेरा था। आरव ने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की और धीरे-धीरे अंदर कदम रखा। कमरे में धूल जमी हुई थी, लेकिन बीच में एक लकड़ी की कुर्सी रखी थी। कुर्सी पर एक पुराना वीडियो कैमरा रखा था और उसके नीचे एक नोट।

नोट पर लिखा था—

“अब सच देखने की हिम्मत है?”

आरव ने कांपते हाथों से कैमरा ऑन किया। स्क्रीन पर रिकॉर्डिंग शुरू हुई। वीडियो में वही कमरा दिख रहा था… वही बेसमेंट। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि वीडियो में जो आदमी दिखाई दे रहा था, वो खुद आरव था। उसके कपड़े खून से सने हुए थे और सामने जमीन पर एक लड़की बंधी हुई थी। लड़की जोर-जोर से रो रही थी।

वीडियो वाला आरव कैमरे की तरफ देखकर बोला—

“अगर तुम ये देख रहे हो… तो इसका मतलब है कि उन्होंने फिर तुम्हारी मेमोरी मिटा दी। लेकिन याद रखना… वो लड़की मरी नहीं थी। मैंने उसे बचाने की कोशिश की थी।”

आरव की सांस रुक गई। उसके हाथ से कैमरा लगभग गिर गया। वीडियो आगे बढ़ा। अचानक स्क्रीन पर एक और आदमी आया। उसका चेहरा अंधेरे में छिपा था, लेकिन उसकी आवाज़ साफ थी—

“तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो, आरव। अगर उसे छोड़ दिया, तो हम सब खत्म हो जाएंगे।”

फिर वीडियो अचानक बंद हो गया।

आरव का दिमाग सुन्न पड़ चुका था। लड़की कौन थी? वो आदमी कौन था? और सबसे बड़ा सवाल—अगर ये सब सच था, तो उसे कुछ याद क्यों नहीं? तभी उसके पीछे किसी के कदमों की आवाज़ आई। वह तेजी से पलटा। सामने डॉक्टर नीलिमा खड़ी थी।

उसकी आंखों में घबराहट नहीं थी। बल्कि एक अजीब सी शांति थी। जैसे वो जानती हो कि यह पल आएगा। उसने धीरे से कहा—

“तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था।”

आरव चिल्लाया, “ये सब क्या है? मैं कौन हूं? वो लड़की कौन थी?”

नीलिमा कुछ सेकंड तक उसे देखती रही, फिर बोली—

“तुम सच जानना चाहते हो? ठीक है। लेकिन सच तुम्हें तोड़ देगा।”

वह धीरे-धीरे उसके करीब आई और बोली—

“तीन साल पहले तुम एक सीक्रेट न्यूरोसाइकोलॉजी प्रोजेक्ट का हिस्सा थे। तुम लोगों की याददाश्त बदलने पर रिसर्च कर रहे थे। लेकिन एक एक्सपेरिमेंट गलत हो गया। उस रात लैब में चार लोग थे… और सिर्फ दो जिंदा बचे।”

आरव की आंखें फैल गईं। उसके दिमाग में अचानक तेज दर्द उठा। कुछ धुंधली तस्वीरें चमकने लगीं—खून, चीखें, जलती हुई मशीनें, और वही लड़की।

नीलिमा ने आगे कहा—

“तुमने खुद अपनी यादें मिटाने की मांग की थी। क्योंकि तुम जो देख चुके थे… उसे सह नहीं सकते थे।”

“झूठ!” आरव चीखा। “अगर ऐसा था तो मुझे सब क्यों छुपाया गया?”

नीलिमा की आंखें अचानक नम हो गईं। उसने कांपती आवाज़ में कहा—

“क्योंकि तुमने उस रात किसी को मार दिया था।”

कमरे की हवा जैसे जम गई। आरव पीछे हट गया। उसके कानों में अजीब सी आवाज़ें गूंजने लगीं। उसे लगा उसका दिमाग फट जाएगा। तभी अचानक बेसमेंट की सारी लाइटें बंद हो गईं। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

और उसी अंधेरे में किसी आदमी की आवाज़ गूंजी—

“डॉक्टर… आपने फिर नियम तोड़ दिया।”

नीलिमा का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

मोबाइल की हल्की रोशनी में आरव ने देखा कि कमरे के कोने में कोई खड़ा था। लंबा, स्थिर, और पूरी तरह अंधेरे में छिपा हुआ। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसके हाथ में बंदूक थी।

फिर उसने रोशनी में कदम रखा।

आरव की सांस वहीं रुक गई।

क्योंकि सामने खड़ा आदमी… बिल्कुल उसी की तरह दिख रहा था। वही चेहरा। वही आंखें। वही आवाज़।

उस आदमी ने मुस्कुराकर कहा—

“तुम आखिरकार जाग गए, आरव। लेकिन दुख की बात ये है… असली आरव मैं हूं।”

और अगले ही सेकंड उसने बंदूक नीलिमा के सिर पर तान दी।

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उस रात का सच Part 2

बेसमेंट की ठंडी हवा अचानक और भारी लगने लगी। आरव की आंखें उस आदमी पर जमी थीं, जो बिल्कुल उसकी तरह दिख रहा था। सिर्फ चेहरा ही नहीं, उसकी आवाज़, चलने का तरीका, यहां तक कि माथे पर वही छोटा सा निशान भी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई आईना अचानक जीवित होकर उसके सामने खड़ा हो गया हो। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि डॉक्टर नीलिमा उस आदमी को देखकर कांप रही थी। उसकी आंखों में वही डर था जो इंसान मौत को सामने देखकर महसूस करता है।

उस आदमी ने बंदूक नीलिमा की कनपटी पर और मजबूती से टिकाई और धीमे स्वर में बोला, “मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी कि इसे सच मत बताना। इसकी यादें जितनी देर दबी रहेंगी, उतना हम सब सुरक्षित रहेंगे। लेकिन तुम हमेशा भावनाओं में गलती कर देती हो, डॉक्टर।” उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उस शांति के भीतर ऐसा जहर था जो धीरे-धीरे दिमाग में उतरता चला जाए। आरव ने महसूस किया कि उसके हाथ सुन्न पड़ चुके हैं। वह समझ नहीं पा रहा था कि सामने खड़ा आदमी कोई जुड़वां है, भ्रम है, या उसकी टूटी हुई यादों का कोई खेल।

नीलिमा ने कांपते हुए कहा, “तुम इसे फिर इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह पहले ही बहुत टूट चुका है।” लेकिन वह आदमी हल्का सा हंसा। उसकी हंसी इंसानी कम और किसी प्रयोगशाला में चल रही मशीन जैसी ज्यादा लग रही थी। उसने आरव की तरफ देखकर कहा, “तुम्हें लगता है तुम बीमार हो? नहीं। तुम एक प्रोजेक्ट हो। एक ऐसा प्रयोग जो इंसानी दिमाग को हथियार बनाने के लिए तैयार किया गया था। तुम्हारी यादें बीमारी से नहीं गईं… उन्हें बार-बार मिटाया गया।”

आरव के दिमाग में अचानक तेज झटके जैसे उठने लगे। कुछ बिखरी हुई तस्वीरें उसकी आंखों के सामने चमकने लगीं। एक बड़ी लैब। शीशे के कमरे। कंप्यूटर स्क्रीन पर उसका नाम—“Subject A-17।” फिर एक लड़की की चीख। और खून से सना उसका अपना हाथ। वह लड़खड़ाकर पीछे दीवार से टिक गया। उसे लग रहा था जैसे कोई उसके दिमाग के अंदर से ताले तोड़ रहा हो।

सामने खड़े आदमी ने जेब से एक छोटी सी धातु की चिप निकाली और उसे हवा में घुमाते हुए बोला, “तुम्हें पता है सबसे बड़ी समस्या क्या थी? तुम बहुत जल्दी इंसान बन गए। तुम्हें दर्द महसूस होने लगा। तुम्हें पछतावा होने लगा। जबकि हमें एक ऐसा दिमाग चाहिए था जो बिना भावनाओं के आदेश माने।” वह धीरे-धीरे आरव के करीब आया और फुसफुसाया, “लेकिन मैं वैसा बन गया जैसा उन्हें चाहिए था।”

आरव ने पहली बार गौर से उसकी आंखों में देखा। वहां कोई भावना नहीं थी। न गुस्सा, न डर, न दया। सिर्फ एक अजीब सी खालीपन भरी स्थिरता। तभी नीलिमा अचानक चिल्लाई, “इसकी बात मत सुनो! यह तुम्हारा भाई नहीं है… यह तुम्हारा क्लोन है!”

कमरे में जैसे समय रुक गया।

आरव ने अविश्वास से नीलिमा की तरफ देखा। उसके होंठ सूख चुके थे। “क…क्लोन?” उसके मुंह से मुश्किल से आवाज़ निकली। नीलिमा की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “तीन साल पहले सरकार के लिए एक गुप्त प्रोजेक्ट चल रहा था। उद्देश्य था—ऐसे इंसान बनाना जिनकी यादें बदली जा सकें, जिन्हें किसी भी मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा सके। तुम पहले सफल सब्जेक्ट थे। लेकिन जब तुम्हारे दिमाग ने भावनाएं विकसित करनी शुरू कीं, उन्होंने तुम्हारा दूसरा संस्करण बनाया… बिना किसी संवेदना के।”

सामने खड़ा आदमी मुस्कुराया। “गलत। मैं दूसरा संस्करण नहीं हूं। मैं बेहतर संस्करण हूं।” फिर उसने अचानक बंदूक नीलिमा के सिर से हटाकर आरव की तरफ तान दी। “असल समस्या यह है कि इसे अभी तक याद नहीं आया कि उस रात लैब में क्या हुआ था।”

आरव के सिर में फिर दर्द उठा। इस बार इतना तेज कि वह जमीन पर गिर पड़ा। उसके कानों में आवाजें गूंजने लगीं। कोई चिल्ला रहा था—“फायर कंट्रोल फेल हो गया!” कोई भाग रहा था। मशीनों में विस्फोट हो रहे थे। और फिर उसने खुद को देखा… वह एक कमरे में खड़ा था, जहां एक लड़की कुर्सी से बंधी हुई थी। वही लड़की जो वीडियो में दिखाई दी थी। उसकी आंखों में डर था, लेकिन वह बार-बार कह रही थी—

“आरव, तुम इन्हें रोक सकते हो… प्लीज़।”

अचानक याद टूट गई।

आरव हांफते हुए उठा। उसने कांपती आवाज़ में पूछा, “वो लड़की कौन थी?” कुछ सेकंड तक कमरे में सन्नाटा रहा। फिर नीलिमा ने धीमे स्वर में कहा, “उसका नाम सिया था। और… वो तुम्हारी पत्नी थी।”

यह सुनते ही जैसे आरव के भीतर कुछ टूट गया। उसकी सांसें रुकने लगीं। उसे कभी शादी याद नहीं थी। उसे कभी सिया नाम की कोई लड़की याद नहीं थी। लेकिन उसी पल उसके दिमाग में कुछ और दृश्य चमके। बारिश वाली सड़क। एक लड़की की हंसी। उसकी उंगली में पहनी हुई अंगूठी। और फिर वही लड़की खून में लथपथ जमीन पर पड़ी हुई।

“नहीं…” आरव बुदबुदाया। “नहीं, ये सच नहीं हो सकता…”

लेकिन सामने खड़े आदमी ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा, “सच हमेशा दर्द देता है। तुम उससे प्यार करते थे। इतना कि जब तुम्हें पता चला कि प्रोजेक्ट उसे खत्म करने वाला है, तुमने सिस्टम के खिलाफ जाने की कोशिश की। लेकिन फिर तुमने सबसे बड़ी गलती कर दी।”

आरव ने कांपती आंखों से उसकी तरफ देखा।

वह आदमी धीरे-धीरे बोला—

“तुमने खुद सिया को मार दिया।”

नीलिमा तुरंत चीखी, “झूठ! यह इसे तोड़ने की कोशिश कर रहा है!” लेकिन अब तक आरव के भीतर डर, भ्रम और यादों का तूफान उठ चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि किस पर भरोसा करे। तभी सामने वाले आदमी ने जेब से एक छोटा रिमोट निकाला और दीवार पर लगे पुराने प्रोजेक्टर को ऑन कर दिया।

स्क्रीन पर वीडियो चलने लगा।

वीडियो में आरव था। उसकी आंखें लाल थीं, जैसे किसी ड्रग के असर में हो। सामने सिया बंधी हुई बैठी थी और रो रही थी। वह बार-बार कह रही थी—“आरव, ये तुम नहीं हो… प्लीज़ लड़ो…” लेकिन अगले ही पल वीडियो वाले आरव ने बंदूक उठाई। गोली चली। स्क्रीन खून से भर गई।

आरव चीख पड़ा। उसका पूरा शरीर कांपने लगा। उसे लगा उसका दिमाग अब और सच नहीं झेल पाएगा। लेकिन तभी वीडियो में एक छोटी सी बात हुई जिसने सब बदल दिया। गोली चलने के ठीक पहले कैमरे के पीछे से किसी आदमी की आवाज़ आई—

“Excellent. Memory overwrite successful.”

आरव अचानक चुप हो गया।

उसने वीडियो दोबारा ध्यान से देखा। गोली चलाते वक्त वीडियो वाले उसके चेहरे पर एक अजीब सी खाली मुस्कान थी। बिल्कुल वैसी ही… जैसी अभी सामने खड़े उस आदमी के चेहरे पर थी। तभी उसके दिमाग में बिजली सी कौंधी।

“ये मैं नहीं था…” उसने धीरे से कहा।

सामने खड़ा आदमी पहली बार कुछ सेकंड के लिए शांत हो गया।

आरव धीरे-धीरे खड़ा हुआ। उसकी आंखों में अब डर कम और गुस्सा ज्यादा था। उसने भारी सांस लेते हुए कहा, “उन्होंने मेरी यादें नहीं मिटाईं… उन्होंने तुम्हारी यादें मेरे अंदर डाल दीं।”

नीलिमा की आंखें फैल गईं।

आरव अब तेजी से सब जोड़ रहा था। “इसलिए मुझे हमेशा अपने ही सपनों में कोई दूसरा आदमी दिखता था। इसलिए मुझे अपने किए हुए अपराध याद आते थे… क्योंकि वो मेरे नहीं, इसके थे!” उसने कांपती उंगली सामने वाले आदमी की तरफ उठाई।

कमरे में पहली बार उस आदमी के चेहरे की मुस्कान गायब हुई।

कुछ सेकंड तक खामोशी रही। फिर वह धीरे-धीरे ताली बजाने लगा। “इम्प्रेसिव,” उसने कहा। “तुम आखिरकार वहां पहुंच गए जहां मैं चाहता था।” उसकी आंखों में अब खतरनाक चमक थी। “क्योंकि असली प्रयोग यही था। अगर दो अलग इंसानों की यादें एक दिमाग में डाल दी जाएं… तो असली पहचान किसकी बचेगी?”

आरव का गला सूख गया।

वह आदमी आगे बोला, “तुम सोचते हो तुम आरव हो। लेकिन अगर तुम्हारी आधी यादें मेरी हैं, तुम्हारी भावनाएं बदली जा चुकी हैं, और तुम्हारे फैसले मैंने डिजाइन किए हैं… तो फिर तुम कौन हो?”

यह सवाल हवा में जहर की तरह फैल गया।

आरव कुछ बोल नहीं पाया। क्योंकि पहली बार उसे खुद पर शक होने लगा था। क्या वह सच में वही इंसान था जो खुद को समझता था? या सिर्फ किसी और की यादों से बना हुआ एक नकली व्यक्तित्व?

तभी अचानक बेसमेंट के बाहर सायरन की आवाजें गूंजने लगीं। पुलिस। लाल और नीली लाइटें दरवाजे के नीचे चमकने लगीं। नीलिमा ने राहत की सांस ली। लेकिन सामने खड़ा आदमी बिल्कुल शांत था। उसने धीरे से कहा, “खेल खत्म नहीं हुआ… अभी तो शुरू हुआ है।”

और अगले ही पल उसने अपनी बंदूक खुद के सिर पर तान दी।

आरव चीखा, “रुको!”

लेकिन गोली चल चुकी थी।

उस आदमी का शरीर जमीन पर गिर गया। खून धीरे-धीरे फर्श पर फैलने लगा।

कुछ सेकंड तक पूरा कमरा सन्नाटे में डूबा रहा।

फिर अचानक जमीन पर पड़ा उसका फोन बजने लगा। स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन चमक रही थी—

“Phase 2 Activated. Subject A-17 successfully transferred.”

और उसी क्षण आरव के चेहरे पर धीरे-धीरे वही खाली मुस्कान उभरने लगी… जो अभी कुछ मिनट पहले उस आदमी के चेहरे पर थी।

एक वसीयत… और पूरा परिवार दुश्मन बन गया। पढ़िए 👉 वसीयत

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