मृगतृष्णा – रहस्य और भ्रम part-1
डॉ. अद्वैत कौल शहर के सबसे प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक थे, जिनकी ख्याति मानव मस्तिष्क की सबसे जटिल परतों को सुलझाने के लिए थी। उनका मानना था कि इंसान का दिमाग एक ऐसी तिजोरी है, जिसकी चाबी खुद उसके पास भी नहीं होती, बल्कि वह यादों के मलबे में कहीं खो जाती है।
अद्वैत का जीवन बेहद अनुशासित, शांत और रहस्यमयी था, लेकिन उनके इस शांत जीवन में भूचाल तब आया, जब एक शाम एक अजीब मरीज उनके क्लिनिक आया। उस मरीज का नाम कबीर था, जिसकी आँखों में एक अजीब सा खौफ, गहरी थकावट और एक डरावना सन्नाटा पसरा हुआ था। कबीर ने आते ही कमरे के सारे पर्दे गिरा दिए और अद्वैत के ठीक सामने बैठकर फुसफुसाते हुए कहा कि कोई उसका पीछा कर रहा है, जो बिल्कुल उसकी तरह दिखता है।
कबीर की हालत देखकर अद्वैत को लगा कि यह सिजोफ्रेनिया या गंभीर व्यामोह का एक साधारण मामला है, जिसे वह आसानी से ठीक कर सकते हैं। कबीर ने बताया कि पिछले एक महीने से उसे अपने ही घर में किसी तीसरे शख्स की मौजूदगी का अहसास हो रहा है, जो उसकी अनुपस्थिति में उसकी चीजें बदल देता है।
जब वह सुबह सोकर उठता है, तो आईने पर लिपस्टिक से कुछ अजीब से कोड लिखे होते हैं, जिन्हें वह कभी समझ नहीं पाता। कबीर का दावा था कि वह परछाईं कोई और नहीं, बल्कि उसका अपना ही एक हमशक्ल है, जो धीरे-धीरे उसकी जिंदगी पर कब्जा कर रहा है। अद्वैत ने कबीर की बातें बहुत ध्यान से सुनीं और अपने पैड पर कुछ नोट्स लिखते हुए उसे दिलासा दिया कि यह सब सिर्फ उसके दिमाग का वहम है।
अद्वैत ने कबीर को सम्मोहन चिकित्सा यानी हिप्नोथेरेपी देने का फैसला किया ताकि वे उसके अवचेतन मन में छिपे उस डर की थाह ले सकें। जैसे ही कबीर गहरी नींद में गया, अद्वैत ने उससे उसके अतीत के बारे में पूछना शुरू किया, लेकिन कबीर के मुंह से जो शब्द निकले, उन्होंने अद्वैत के पैरों तले से जमीन खिसका दी।
कबीर ने उन जगहों, तारीखों और घटनाओं का जिक्र करना शुरू कर दिया, जो केवल अद्वैत के निजी जीवन से जुड़ी थीं। कबीर ने उस कार दुर्घटना का जिक्र किया, जिसमें दस साल पहले अद्वैत की पत्नी अंतरा की मौत हो गई थी, जिसके बारे में दुनिया में कोई नहीं जानता था। अद्वैत का माथा ठनका, उनका दिल तेजी से धड़कने लगा और उन्होंने तुरंत कबीर को सम्मोहन से बाहर निकाल दिया।
उस रात अद्वैत अपने आलीशान लेकिन सुनसान बंगले पर लौटे, तो उनके दिमाग में कबीर की बातें घूम रही थीं कि कबीर को उनके अतीत के बारे में कैसे पता चला। जैसे ही उन्होंने अपने बेडरूम का दरवाजा खोला, उन्हें हवा में एक जानी-पहचानी खुशबू का अहसास हुआ, यह वही मोगरे का इत्र था जो अंतरा इस्तेमाल करती थी।
उन्होंने घबराकर चारों तरफ देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था, सिवाय उनके बेड पर रखी एक पुरानी डायरी के, जो अंतरा की थी और जिसे उन्होंने बरसों पहले जला दिया था। अद्वैत के हाथ कांपने लगे जब उन्होंने डायरी खोली, तो उसके पहले पन्ने पर ताजे खून से लिखा था कि खेल तो अब शुरू हुआ है, डॉक्टर साहब। अद्वैत को अपने ही घर में एक अजीब सा अजनबीपन महसूस होने लगा, जैसे कोई दीवारों के पीछे से उन पर नजर रख रहा हो।
अगले दिन जब कबीर दोबारा क्लिनिक आया, तो अद्वैत ने उस पर नजर रखने के लिए अपने केबिन में एक छुपा हुआ कैमरा लगा दिया था ताकि उसकी हर हरकत को रिकॉर्ड किया जा सके। कबीर आज बेहद शांत दिख रहा था, उसने अद्वैत की तरफ देखा और एक ठंडी मुस्कान के साथ कहा कि कल रात आपको मेरी डायरी कैसी लगी, डॉक्टर।
अद्वैत गुस्से से कांप उठे और उन्होंने कबीर का कॉलर पकड़कर चिल्लाते हुए पूछा कि तुम कौन हो और मेरे अतीत के साथ क्यों खेल रहे हो। कबीर ने बिना किसी डर के अद्वैत की आँखों में झांका और कहा कि मैं तो सिर्फ एक जरिया हूँ, असली कातिल तो आपके भीतर छुपा बैठा है। अद्वैत ने सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर कबीर को बाहर फिंकवा दिया, लेकिन उनका दिमाग अब पूरी तरह से उनके नियंत्रण से बाहर हो रहा था।
शाम को जब अद्वैत ने केबिन के छुपे हुए कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी, तो उनके होश उड़ गए और उनके जिस्म में एक बर्फीली सिहरन दौड़ गई। वीडियो में साफ दिख रहा था कि कबीर पूरे सत्र के दौरान बिल्कुल खामोश बैठा हुआ था, उसके होंठ तक नहीं हिले थे, बल्कि अद्वैत खुद से ही बातें कर रहे थे।
वीडियो में अद्वैत खुद ही चिल्ला रहे थे, खुद ही कॉलर पकड़ने का नाटक कर रहे थे और कुर्सी पर कोई कबीर नाम का शख्स था ही नहीं। अद्वैत को यकीन नहीं हो रहा था कि जो मरीज उनके सामने बैठा था, वह असल में था ही नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही आंखों का एक खौफनाक भ्रम था। अद्वैत ने घबराकर अपने सहायक से पूछा कि क्या आज कोई मरीज आया था, तो सहायक ने कहा कि डॉक्टर साहब, आज पूरे दिन आपसे मिलने कोई नहीं आया।
इस खौफनाक खुलासे ने अद्वैत को भीतर तक झंझोर कर रख दिया, वे सोचने लगे कि क्या वे खुद मानसिक रूप से बीमार हो चुके हैं या कोई उनके साथ बहुत बड़ा खेल खेल रहा है। वे अपने घर भागे और पागलों की तरह उन सभी सबूतों को ढूंढने लगे जो कबीर ने उन्हें दिए थे, लेकिन अंतरा की वह डायरी भी गायब थी जो कल रात बिस्तर पर रखी थी।
अद्वैत को हर तरफ बस अंतरा की हंसी और कबीर की तीखी मुस्कान की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जो उनके कानों के पर्दों को फाड़ रही थीं। उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और दीवारों पर अपने हाथ मारकर चिल्लाने लगे कि मैं पागल नहीं हूँ, यह सब सच है। तभी कमरे के कोने में रखी एक पुरानी संदूक से टिक-टिक की आवाज आने लगी, जैसे कोई बम फटने वाला हो।
अद्वैत ने कांपते हाथों से उस संदूक को खोला, तो उसके भीतर एक पुराना टेप रिकॉर्डर रखा हुआ था, जिस पर ‘प्ले’ का बटन दबा हुआ था। टेप से जो आवाज आ रही थी, वह किसी और की नहीं बल्कि खुद अद्वैत की थी, जो दस साल पहले अपनी पत्नी अंतरा से बहस कर रहे थे।
उस रिकॉर्डिंग में अंतरा रो रही थी और अद्वैत उस पर चिल्ला रहे थे कि अगर तुमने मुझे छोड़ने की कोशिश की, तो मैं तुम्हें जिंदा दफन कर दूंगा। फिर एक जोरदार चीख सुनाई दी, जिसके बाद सिर्फ सन्नाटा था और एक भारी सांस लेने की आवाज आ रही थी जो अद्वैत की ही थी। अद्वैत का सिर चकराने लगा, उनकी यादों के धुंधलके से एक भयानक सच बाहर आने की कोशिश कर रहा था, जिसे उन्होंने बरसों से दबा रखा था।
तभी कमरे की बत्ती गुल हो गई और अंधेरे में अद्वैत को अपने ठीक पीछे किसी के खड़े होने का अहसास हुआ, जिसकी सांसें उनकी गर्दन पर महसूस हो रही थीं। उन्होंने डरते-डरते पीछे मुड़कर देखा, तो मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में कबीर खड़ा था, जिसके हाथ में एक तेज धार वाला चाकू था।
कबीर ने अद्वैत से कहा कि तुमने मुझे भूलने की बहुत कोशिश की अद्वैत, लेकिन गुनाह कभी मरता नहीं है, वह साए की तरह पीछा करता है। अद्वैत ने चिल्लाकर कहा कि तुम कौन हो, तुम मेरे दिमाग की उपज हो, तुम सच नहीं हो सकते, तुम यहाँ कैसे आए। कबीर हंसा और उसकी आवाज धीरे-धीरे बदलकर खुद अद्वैत की आवाज जैसी हो गई, जिसने अद्वैत के भीतर के बचे-खुचे हौसले को भी तोड़ दिया।
कबीर ने चाकू को अद्वैत के गले पर टिका दिया और फुसफुसाया कि मैं तुम्हारी आत्मा का वह हिस्सा हूँ जिसे तुमने दस साल पहले अंतरा की लाश के साथ दफन कर दिया था। अद्वैत को याद आने लगा कि कार दुर्घटना कोई हादसा नहीं था, बल्कि उन्होंने खुद अंतरा की हत्या की थी क्योंकि वह उनके अवैध संबंधों के बारे में जान चुकी थी।
उन्होंने इस सच को छुपाने के लिए अपने ही दिमाग को इस कदर प्रोग्राम किया था कि वे खुद को बेगुनाह मानने लगे थे और इस बीमारी को ‘डिसोसिएटिव एम्नेशिया’ कहते थे। लेकिन उनका अवचेतन मन इस झूठ को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, इसलिए उसने कबीर नाम के एक छद्म चरित्र को जन्म दिया था। अद्वैत जमीन पर गिर पड़े, उनका रो-रोकर बुरा हाल था क्योंकि उनका अपना ही दिमाग उनका सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका था।
मृगतृष्णा – रहस्य और भ्रम part-2

सुबह जब सूरज की किरणें अद्वैत के कमरे में दाखिल हुईं, तो वे फर्श पर बदहवास हालत में पड़े थे, चारों तरफ दवाइयों की शीशियां और कागज बिखरे पड़े थे। उनका दिमाग अब दो हिस्सों में बंट चुका था, एक हिस्सा जो खुद को एक सम्मानित डॉक्टर मानता था और दूसरा जो खुद को एक बेरहम कातीली समझ रहा था। अद्वैत ने खुद को संभाला और आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे को देखा, जो अब पूरी तरह से पीला और डरावना लग रहा था।
आईने पर अभी भी वही कोड लिखे थे, जिन्हें उन्होंने ध्यान से देखा तो समझ आया कि वे उनकी पुरानी मेडिकल फाइलों के नंबर थे। उन्होंने तुरंत अपने क्लिनिक जाने का फैसला किया ताकि वे उन फाइलों को देख सकें और इस रहस्य की आखिरी कड़ी को सुलझा सकें।
जब वे क्लिनिक पहुंचे, तो पूरा स्टाफ उन्हें अजीब नजरों से देख रहा था, जैसे वे कोई भूत देख रहे हों, लेकिन अद्वैत ने किसी की परवाह नहीं की और सीधे रिकॉर्ड रूम में चले गए। उन्होंने उस कोड वाले नंबर की फाइल ढूंढी, जो दस साल पुरानी थी और जिस पर धूल की एक मोटी परत जमी हुई थी।
जैसे ही उन्होंने वह फाइल खोली, उनके पैरों के नीचे की जमीन एक बार फिर खिसक गई क्योंकि उस फाइल पर मरीज का नाम ‘अद्वैत कौल’ लिखा था। उस फाइल के मुताबिक, अद्वैत पिछले दस सालों से इसी क्लिनिक में एक मरीज के तौर पर भर्ती थे और उनका इलाज शहर के एक अन्य डॉक्टर कर रहे थे। अद्वैत को लगा कि यह कोई बहुत बड़ी साजिश है, क्योंकि वे तो खुद डॉक्टर थे, वे मरीज कैसे हो सकते थे।
तभी रिकॉर्ड रूम का दरवाजा खुला और अंदर एक बुजुर्ग डॉक्टर दाखिल हुए, जिनका नाम डॉ. समर था, जिन्हें देखकर अद्वैत ने राहत की सांस ली। अद्वैत ने समर से कहा कि डॉक्टर समर, देखिए किसी ने मेरे खिलाफ कितनी बड़ी साजिश रची है, मुझे मरीज दिखाया जा रहा है और कोई कबीर मुझे मारना चाहता है।
डॉक्टर समर ने बड़े ही शांत और दर्दभरे लहजे में अद्वैत के कंधे पर हाथ रखा और कहा कि अद्वैत, शांत हो जाओ, यहाँ कोई कबीर नहीं है और न ही कोई साजिश है। समर ने बताया कि दस साल पहले अंतरा की मौत के बाद अद्वैत का मानसिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया था और वे खुद को डॉक्टर समझने का नाटक करने लगे थे। इस क्लिनिक का यह केबिन अद्वैत का कमरा था, जिसे उनके भ्रम को बनाए रखने के लिए एक दफ्तर की तरह सजाया गया था।
अद्वैत ने चिल्लाकर कहा कि यह झूठ है, मैं कल रात ही अपने घर गया था, मैंने अंतरा की डायरी देखी, मैंने कबीर से बात की, मैं पागल नहीं हूँ। डॉक्टर समर ने उन्हें एक खिड़की के पास ले जाकर बाहर दिखाया, जहाँ एक ऊँची कंक्रीट की दीवार थी और चारों तरफ गार्ड तैनात थे, यह कोई क्लिनिक नहीं बल्कि एक हाई-सिक्योरिटी मेंटल असायलम था।
अद्वैत का आलीशान बंगला, उनका घर, उनकी गाड़ियां सब कुछ उनके दिमाग की एक काल्पनिक दुनिया थी, जिसे उन्होंने इस असायलम के कमरे में बैठकर बुना था। कबीर कोई और नहीं, बल्कि अद्वैत के भीतर का वह डॉक्टर था जो उनके असली कातिल वाले रूप को ठीक करने की कोशिश कर रहा था, यानी दोनों ही उनके दिमाग के हिस्से थे।
इस खौफनाक हकीकत को स्वीकार करना अद्वैत के लिए नामुमकिन था, उनका पूरा अस्तित्व, उनका वजूद, उनकी डिग्रियां सब कुछ एक पल में ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। वे पीछे हटे और जोर-जोर से हंसने लगे, उनकी हंसी में एक ऐसा पागलपन था जो रिकॉर्ड रूम की दीवारों से टकराकर और भयानक लग रहा था।
उन्होंने डॉक्टर समर को धक्का दिया और वहाँ से भाग निकले, असायलम के गलियारों में दौड़ते हुए उन्हें हर कमरे से अपनी ही परछाईं उनका मजाक उड़ाती हुई दिख रही थी। वे भागते हुए असायलम की छत पर पहुंच गए, जहाँ ठंडी हवा चल रही थी और नीचे गहरी खाई जैसी सड़क दिखाई दे रही थी। छत के कोने पर कबीर खड़ा था, जो मुस्कुराते हुए अद्वैत का इंतजार कर रहा था और उसके हाथ खुले थे।
कबीर ने अद्वैत से कहा कि अब खेल खत्म हो चुका है अद्वैत, तुम इस दिमागी जेल से कभी बाहर नहीं निकल सकते, सिवाय एक ही रास्ते के। अद्वैत ने कबीर की तरफ देखा और पूछा कि क्या सच में मैंने अंतरा को मारा था, या यह भी मेरे इस बीमार दिमाग का कोई नया भ्रम है जो मुझे मारना चाहता है।
कबीर ने कोई जवाब नहीं दिया, उसने बस अपनी उंगली से नीचे की तरफ इशारा किया, जहाँ असायलम के गार्ड और डॉक्टर समर अद्वैत को नीचे उतरने के लिए चिल्ला रहे थे। अद्वैत को अब समझ नहीं आ रहा था कि कौन सा सच है और कौन सा झूठ, क्या वे सचमुच एक कातिल थे या सिर्फ एक विक्षिप्त इंसान जो अपनी पत्नी की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाया था। उनका दिमाग विचारों के एक ऐसे बवंडर में फंस चुका था, जहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।
अद्वैत ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उन्हें अंतरा का चेहरा दिखाई दिया, जो मुस्कुरा रही थी और उनसे कह रही थी कि अद्वैत, मेरे पास आ जाओ। उन्होंने एक गहरी सांस ली और छत के छज्जे पर कदम रख दिया, तभी उनके पीछे से डॉक्टर समर और गार्ड्स ने उन्हें पकड़ने के लिए छलांग लगाई। लेकिन अद्वैत ने उससे पहले ही हवा में कदम बढ़ा दिए थे, उनका शरीर तेजी से नीचे की तरफ गिर रहा था, और उस गिरते हुए पल में उन्हें एक अजीब सी शांति का अहसास हुआ।
जब वे जमीन से टकराए, तो उनके सिर से खून का एक फव्वारा छूटा और उनकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतोषजनक मुस्कान तैर रही थी। डॉक्टर समर और उनकी टीम नीचे भागी, लेकिन तब तक अद्वैत की सांसें थम चुकी थीं और उनका मानसिक संघर्ष हमेशा के लिए शांत हो चुका था।
अगले दिन डॉक्टर समर अद्वैत के उसी केबिन में बैठे थे, जिसे अद्वैत अपना क्लिनिक समझते थे, और वे अद्वैत की केस फाइल बंद कर रहे थे। समर ने एक ठंडी सांस ली और फाइल पर लिखा कि मरीज अद्वैत कौल की अपनी ही बनाई मानसिक मृगतृष्णा में फंसकर आत्महत्या के कारण मौत हो गई।
तभी अचानक केबिन का दरवाजा खुला और एक नया वार्ड बॉय अंदर आया, जिसके हाथ में एक चाय का कप था और उसने डॉक्टर समर के सामने रख दिया। उस वार्ड बॉय का चेहरा बिल्कुल कबीर जैसा था, उसने डॉक्टर समर की तरफ देखा और एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा कि डॉक्टर साहब, आपकी चाय। डॉक्टर समर ने चाय का कप उठाया और उस वार्ड बॉय को देखते हुए मुस्कुराए, जैसे दोनों के बीच कोई बहुत बड़ा और गहरा राज छुपा हुआ हो।
वार्ड बॉय कमरे से बाहर चला गया और डॉक्टर समर ने अपने केबिन की दराज खोली, जिसके भीतर अंतरा की वही असली डायरी रखी हुई थी, जिसे अद्वैत ढूंढ रहे थे। उस डायरी के आखिरी पन्नों पर डॉक्टर समर और अंतरा के अवैध संबंधों की पूरी कहानी लिखी थी, और यह भी लिखा था कि कैसे उन दोनों ने मिलकर अद्वैत को पागल बनाने की साजिश रची थी।
कार दुर्घटना असल में समर और अंतरा ने अद्वैत को मारने के लिए प्लान की थी, लेकिन उसमें अंतरा खुद मारी गई और अद्वैत बच गए, पर उनका मानसिक संतुलन खो गया। समर ने पिछले दस सालों से अद्वैत को ऐसी दवाइयां दी थीं जिससे वे कभी ठीक न हो सकें और खुद को ही अंतरा का कातिल मानते रहें ताकि समर कभी पकड़े न जाएं।
डॉक्टर समर ने डायरी को बंद किया और उसे एक लाइटर से आग लगा दी, देखते ही देखते वह डायरी और उसके साथ अद्वैत की जिंदगी का आखिरी सच भी राख में बदल गया। समर ने केबिन की खिड़की से बाहर देखा, जहाँ आसमान में काले बादल छाए हुए थे और एक नई साजिश की बू हवा में तैर रही थी। उन्होंने खुद से फुसफुसाते हुए कहा कि मानव मस्तिष्क सचमुच एक अजीब तिजोरी है, और उसकी चाबी हमेशा मेरे पास ही रहेगी। इस तरह अद्वैत कौल एक ऐसे चक्रव्यूह में मर गए जो उनके अपने दिमाग ने नहीं, बल्कि उनके सबसे भरोसेमंद दोस्त ने उनके चारों तरफ बुना था, जिसे वे कभी समझ ही नहीं पाए।
अनकहा दर्द – एकतरफा प्यार,अधूरी मोहब्बत
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