समय की मार

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समय की मार भाग 1

एक शांत शहर के किनारे बने उस पुराने दफ्तर में जब भी कोई नया प्रोजेक्ट आता, तो वहां काम करने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो जाती थीं। इस जगह पर सालों से कई लोग अपनी किस्मत चमकाने आए थे, लेकिन हर किसी के हिस्से में कामयाबी नहीं आती थी।

इस दफ्तर में चार लोग ऐसे थे जिनकी जिंदगी एक-दूसरे से इतनी गहराई से जुड़ी थी कि उन्हें खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं था। काम का दबाव और आगे बढ़ने की होड़ अक्सर इंसानों के असली चेहरे को बाहर ले आती है, और यहाँ भी कुछ ऐसा ही होने वाला था।

इस दफ्तर के सबसे वरिष्ठ कर्मचारियों में से एक थे प्रशांत, जो हमेशा अपनी ईमानदारी और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपनी जिंदगी के बीस साल इसी कंपनी को दिए थे और हर काम को पूरी निष्ठा के साथ किया था। उनके ठीक बगल वाले केबिन में बैठता था नील, जो बेहद महत्वाकांक्षी, चालाक और किसी भी हद तक जाकर कामयाबी हासिल करने में यकीन रखता था।

नील के लिए रिश्ते और नीतियां सिर्फ कागजी बातें थीं, उसका असली मकसद सिर्फ और सिर्फ तरक्की की सीढ़ियां चढ़ना था। उसी टीम में रितिक नाम का एक नया लड़का भी था, जो अभी-अभी कॉलेज से निकला था और दुनियादारी से पूरी तरह अनजान था, उसके दिल में बस अपने काम के प्रति एक अजीब सा उत्साह था। इन सब के बीच एक और किरदार थी अरम्या, जो प्रशांत की बेटी जैसी थी और उसी दफ्तर में इंटर्नशिप कर रही थी, वह बेहद दयालु और हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने वाली लड़की थी।

एक दिन कंपनी के बड़े बॉस ने एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की, जो कंपनी के भविष्य को बदल सकता था। इस प्रोजेक्ट को जो भी सफलतापूर्वक पूरा करता, उसे सीधे डायरेक्टर के पद पर प्रमोट किया जाना था। प्रशांत ने इस प्रोजेक्ट के लिए दिन-रात एक कर दिए। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी का अनुभव उस फाइल में डाल दिया। रितिक ने प्रशांत की बहुत मदद की, क्योंकि वह प्रशांत को अपना गुरु मानता था।

अरम्या भी देर रात तक रुककर फाइलों को व्यवस्थित करने में प्रशांत का हाथ बंटाती थी। प्रशांत की मेहनत रंग ला रही थी और उनका प्लान वाकई बेजोड़ था। लेकिन नील की नजरें उस पूरे प्लान पर टिकी हुई थीं, वह जानता था कि अगर प्रशांत का यह प्रोजेक्ट पास हो गया, तो वह हमेशा के लिए पीछे छूट जाएगा।

नील के मन में लालच और ईर्ष्या का ऐसा जहर घुला कि उसने एक बहुत बड़ी साजिश रचने का फैसला किया। उसने देखा कि रितिक बहुत सीधा है और उस पर आसानी से भरोसा किया जा सकता है। नील ने रितिक को अपने केबिन में बुलाया और झूठी तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि वह उसे इस कंपनी का अगला स्टार देखना चाहता है। नील ने रितिक से बातों-बातों में प्रशांत के कंप्यूटर का पासवर्ड और उस मुख्य फाइल की लोकेशन पता कर ली। रितिक को लगा कि नील सच में उसका भला चाहता है, इसलिए उसने बिना सोचे-समझे सब कुछ बता दिया।

उस रात जब दफ्तर में कोई नहीं था, नील ने प्रशांत के कंप्यूटर से वह पूरा प्रोजेक्ट चुरा लिया और उसमें कुछ ऐसी कमियां डाल दीं जिससे प्रशांत पर कंपनी का डेटा लीक करने का शक जाए। इतना ही नहीं, नील ने वह असली प्रोजेक्ट अपने नाम से बॉस के सामने पेश कर दिया।

अगले दिन जब मीटिंग हुई, तो प्रशांत के पैरों तले जमीन खिसक गई। बॉस ने प्रशांत पर धोखा देने और कंपनी का डेटा बेचने का आरोप लगाया। प्रशांत ने अपनी बेगुनाही साबित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन सारे सबूत उनके खिलाफ प्लांट किए गए थे। नील ने इस तरह जाल बुना था कि सारा दोष प्रशांत और अनजाने में रितिक पर आ गया।

प्रशांत को कंपनी से बेइज्जत करके निकाल दिया गया। उनकी सालों की ईमानदारी पर एक ऐसा दाग लग गया जिसे धोना नामुमकिन था। रितिक को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, और उसे इस बात का गहरा सदमा लगा कि उसकी एक छोटी सी लापरवाही ने उसके गुरु को बर्बाद कर दिया।

नील को उसका मनचाहा प्रमोशन मिल गया, वह अब डायरेक्टर बन चुका था। अपनी इस कामयाबी पर वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था और सोच रहा था कि दुनिया में सिर्फ चालाकी ही काम आती है। अरम्या ने प्रशांत का साथ नहीं छोड़ा, उसने प्रशांत से कहा कि अंकल, भगवान के घर देर है अंधेर नहीं, जिसने जो बोया है, उसे वही काटना पड़ेगा। प्रशांत ने बस एक गहरी सांस ली और कहा कि समय का पहिया घूमता जरूर है, बस हमें सब्र रखना चाहिए।

समय की मार भाग 2

समय की मार
समय की मार

इस घटना को बीते पूरे पांच साल हो चुके थे। इन पांच सालों में बहुत कुछ बदल चुका था। नील अब सफलता के सातवें आसमान पर था, उसने खूब पैसा कमाया और एक आलीशान जिंदगी जी रहा था। लेकिन कहते हैं कि गलत तरीके से कमाई गई सफलता की नींव बहुत कमजोर होती है। नील के भीतर का घमंड इस कदर बढ़ चुका था कि वह अपने नीचे काम करने वाले लोगों को इंसान ही नहीं समझता था।

दूसरी तरफ, प्रशांत ने उस सदमे से उबरकर एक छोटी सी सामाजिक संस्था शुरू की थी, जहां वे गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते थे। रितिक ने भी अपनी गलती से सीख ली थी और अब वह एक दूसरी कंपनी में कड़ी मेहनत करके ईमानदारी से आगे बढ़ रहा था। अरम्या उस संस्था को संभालने में प्रशांत का पूरा साथ दे रही थी।

तभी एक दिन नील की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उसकी पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। नील की इकलौती बेटी एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी की चपेट में आ गई। डॉक्टरों ने कहा कि इसका इलाज बेहद महंगा है और इसके लिए एक विशेष प्रकार के बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत है, जो बहुत मुश्किल से मिलता है।

नील ने अपनी सारी दौलत पानी की तरह बहा दी, लेकिन कोई भी डोनर मैच नहीं कर रहा था। उसकी पूरी संपत्ति धीरे-धीरे इलाज में खत्म होने लगी थी, और उसका वह घमंड अब लाचारी में बदलने लगा था। जिस पद और पैसे के लिए उसने अपनों को धोखा दिया था, वह पैसा भी उसकी बेटी की जान नहीं बचा पा रहा था।

उसी दौरान, नील को पता चला कि शहर की एक छोटी सी संस्था है जो ऐसे दुर्लभ मामलों में मुफ्त में डोनर्स की तलाश करने और इलाज का खर्च उठाने में मदद करती है। नील अपनी सारी अकड़ भूलकर उस संस्था के दफ्तर पहुंचा। जैसे ही उसने दफ्तर के अंदर कदम रखा, उसके सामने जो चेहरा आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए। सामने कुर्सी पर प्रशांत बैठे थे, और उनके बगल में अरम्या और रितिक खड़े थे।

नील को लगा कि अब उसकी बेटी की मौत तय है, क्योंकि उसने इन लोगों के साथ जो किया था, उसके बाद ये लोग कभी उसकी मदद नहीं करेंगे। नील की आंखों से आंसू बहने लगे, वह प्रशांत के पैरों में गिर गया और रोते हुए अपने पुराने गुनाहों की माफी मांगने लगा।

नील को लगा था कि प्रशांत उससे बदला लेंगे या उसे धक्के मारकर बाहर निकाल देंगे। लेकिन प्रशांत ने नील को उठाया और शांत आवाज में कहा कि नील, कर्म अपना रास्ता खुद ढूंढ लेता है, तुमने जो मेरे साथ किया था उसका फैसला तो समय ने कर दिया, लेकिन इस मासूम बच्ची का कोई कसूर नहीं है। अरम्या ने तुरंत फाइलों की जांच की और एक बहुत बड़ा चमत्कार हुआ।

रितिक का बोन मैरो नील की बेटी के साथ पूरी तरह मैच कर गया। रितिक ने बिना एक पल गंवाए कहा कि वह उस बच्ची की जान बचाने के लिए अपना बोन मैरो डोनेट करने को तैयार है। रितिक ने कहा कि पांच साल पहले मेरी वजह से प्रशांत सर को दुख पहुंचा था, आज अगर मैं किसी की जान बचा सकूं, तो शायद मेरा वह पाप धुल जाए।

ऑपरेशन सफल रहा और नील की बेटी पूरी तरह ठीक हो गई। इस घटना ने नील के भीतर के इंसान को पूरी तरह बदल दिया। उसे समझ आ गया कि जिस पैसे और ताकत के पीछे वह भाग रहा था, वह वक्त आने पर एक तिनके के बराबर भी काम नहीं आई। जिस प्रशांत को उसने बर्बाद किया था, उसी प्रशांत की दयालुता ने उसकी दुनिया उजड़ने से बचा ली।

कर्म का न्याय इतना अनोखा था कि नील को सजा भी मिली, उसका सारा झूठा घमंड और दौलत चली गई, लेकिन उसे अपनी बेटी की जिंदगी और एक जीवन बदलने वाला सबक उपहार में मिला। उसने अपनी बाकी की जिंदगी उसी संस्था की सेवा में लगाने का फैसला किया, और इस तरह किस्मत के तराजू ने हर किसी को उसका असली हक दे दिया।

माटी की महक और कंक्रीट का शोर

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प्रस्तुति: Saying Central Team


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