दादी माँ की कहानियाँ-झूठ
दादी माँ की कहानियाँ-झूठ एक बड़े राज्य के बीचों-बीच हर सप्ताह एक विशाल बाज़ार लगता था। दूर-दूर के गाँवों से किसान, व्यापारी और दुकानदार वहाँ आया करते थे। बाज़ार हमेशा लोगों की आवाज़ों, जानवरों की आवाज़ों और गाड़ियों की खड़खड़ाहट से भरा रहता था। कहीं सब्जियाँ बिक रही थीं, कहीं कपड़े, तो कहीं खिलौनों और … Read more