सिंहासन बत्तीसी: ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचनी
सिंहासन बत्तीसी: ग्यारहवीं पुतली त्रिलोचनी ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य अपनी प्रजा से अत्यंत प्रेम करते थे। उन्हें हर समय अपने राज्य की सुख-समृद्धि और जनता के कल्याण की चिंता बनी रहती थी। एक बार उन्होंने संपूर्ण राज्य की मंगलकामना के लिए एक भव्य महायज्ञ कराने का निर्णय लिया। इस महायज्ञ … Read more