सिंहासन बत्तीसी: इक्कीसवीं पुतली – चन्द्रज्योति

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: इक्कीसवीं पुतली – चन्द्रज्योति ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है-एक बार राजा विक्रमादित्य एक विशाल यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। वे चाहते थे कि उस यज्ञ में चन्द्रदेव को भी आमंत्रित किया जाए। वे सोचने लगे कि चन्द्रदेव के पास निमंत्रण लेकर किसे भेजा जाए। बहुत विचार करने के बाद … Read more

सिंहासन बत्तीसी: सताइसवीं पुतली – मलयवती

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सिंहासन बत्तीसी: सताइसवीं पुतली – मलयवती नाम की सताइसवीं पुतली ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है:राजा विक्रमादित्य बड़े यशस्वी और प्रतापी राजा थे। राजकाज चलाने में उनका कोई सानी नहीं था। वे वीरता और विद्वता का अद्भुत संगम थे। उनके शस्त्र ज्ञान और शास्त्र ज्ञान की कोई सीमा नहीं थी। राजकार्य से समय … Read more

सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती

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सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है— राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में उज्जैन नगरी का यश दूर-दूर तक फैला हुआ था। उनके दरबार में अनेक विद्वान उपस्थित रहते थे और नौ श्रेष्ठ ज्ञानी उनके विशेष सलाहकार थे, जिनकी राय से ही राजा राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय … Read more

सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना

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सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य सभी राजाओं में श्रेष्ठ माने जाते थे। वे जितने न्यायप्रिय, दानी और त्यागी थे, उतने ही साहसी और पराक्रमी भी। उन्हें शिकार खेलने का विशेष शौक था और वे निहत्थे भी हिंसक पशुओं का सामना कर सकते थे। एक बार उन्हें … Read more

सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती

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सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग केवल न्याय पाने के लिए ही नहीं आते थे, बल्कि ऐसे कठिन प्रश्न भी लेकर आते थे जिनका उत्तर उन्हें कहीं और नहीं मिलता था। राजा विक्रम अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव से हर प्रश्न का … Read more

सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती

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सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है—राजा विक्रमादित्य गुणों के महान पारखी थे। वे विद्वानों और कलाकारों का अत्यंत सम्मान करते थे। उनके दरबार में देश-विदेश से विद्वान और कलाकार आते थे तथा अपनी योग्यता के अनुसार आदर और पुरस्कार प्राप्त करते थे। एक दिन उनके … Read more