गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी

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गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी part-1

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे की तंग गलियों में बसे एक साधारण से मकान में कोमल का बचपन बीता था। उसके पिता एक स्थानीय कपड़े की दुकान में मामूली मुनीम थे, जिनकी सीमित आय में छह सदस्यों के परिवार का गुजारा बमुश्किल हो पाता था। कोमल बचपन से ही शांत स्वभाव की थी, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा एक अजीब सी चमक और कुछ बड़ा करने की गहरी चाहत साफ दिखाई देती थी।

जब वह अपने फटे हुए बस्ते को सिलकर स्कूल जाती थी, तो रास्ते में मिलने वाले ताने उसे कमजोर करने के बजाय उसके इरादों को और अधिक मजबूत बना देते थे। घर में बिजली की कटौती आम बात थी, इसलिए वह अक्सर नगर निगम के स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर अपनी किताबें पढ़ा करती थी, जहाँ मच्छरों का आतंक भी उसकी एकाग्रता को डिगा नहीं पाता था।

कोमल की माँ हमेशा चाहती थी कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे, लेकिन समाज और रिश्तेदारों का दबाव कुछ और ही कहानी बुन रहा था। जब कोमल ने बारहवीं कक्षा में पूरे जिले में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया, तो घर में खुशी के बजाय चिंता का माहौल छा गया क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे।

पड़ोस के लोग कहने लगे थे कि लड़की को ज्यादा पढ़ाकर क्या करना है, आखिर जाना तो उसे दूसरे के घर ही है और चूल्हा-चौका ही संभालना है। कोमल ने अपनी माँ के चेहरे पर लाचारी और पिता की आँखों में मजबूरी के आँसू देखे, जिससे उसका दिल बुरी तरह कचोट उठा। उसी रात उसने चुपके से अपने कमरे में बैठकर यह फैसला किया कि वह परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेकेगी, बल्कि अपनी किस्मत खुद लिखेगी।

अपनी कॉलेज की फीस जुटाने के लिए कोमल ने सुबह-सुबह घरों में अखबार बांटने और दोपहर में छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू कर दिया। उसकी दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू होकर रात के बारह बजे तक चलती थी, जिसमें आराम शब्द के लिए कोई जगह नहीं थी।

कॉलेज के पहले ही दिन जब वह पुराने और साधारण कपड़ों में क्लास में दाखिल हुई, तो अमीर घर के बच्चों ने उसकी गरीबी का मजाक उड़ाया और उसे ‘अखबार वाली’ कहकर पुकारा। कोमल ने उन पर गुस्सा होने के बजाय अपनी नज़रें नीचे झुका लीं और मन ही मन कहा कि उसकी खामोशी का जवाब एक दिन उसकी सफलता खुद देगी। वह हर प्रोफेसर के व्याख्यान को इतनी ध्यान से सुनती थी कि जल्द ही वह सभी शिक्षकों की सबसे पसंदीदा और होनहार छात्रा बन गई।

कॉलेज के दूसरे वर्ष में कोमल के जीवन में एक ऐसा तूफान आया जिसने उसे पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया, जब उसके पिता अचानक दिल के दौरे के कारण चल बसे। घर की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी अब कोमल के कंधों पर आ गई थी और उसके सामने कॉलेज छोड़ने या भूखे मरने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी।

“कोमल बेटी, अब हमसे यह सब नहीं संभलेगा, तुम अपनी पढ़ाई छोड़ दो और कोई पक्की नौकरी ढूंढ लो,” उसकी माँ ने रोते हुए एक दिन रसोई में कहा था। कोमल ने अपनी माँ के कांपते हाथों को थामा, उनकी आँखों के आँसू पोंछे और बेहद शांत लेकिन दृढ़ लहजे में कहा, “माँ, बाबूजी का सपना था कि मैं बड़ी अफसर बनूं, अगर आज मैंने हार मान ली तो उनकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलेगी, तुम मुझ पर भरोसा रखो।”

अपनी पढ़ाई को जारी रखने और परिवार को संभालने के लिए कोमल ने एक स्थानीय कॉल सेंटर में नाइट शिफ्ट में काम करना शुरू कर दिया, जिससे उसकी रातों की नींद पूरी तरह गायब हो गई। दिन में कॉलेज की कक्षाएं, शाम को ट्यूशन और रात भर कॉल सेंटर की थकाऊ नौकरी ने उसके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालना शुरू कर दिया था। कई बार वह कमजोरी के कारण क्लास में ही बेहोश हो जाती थी, लेकिन होश आते ही वह फिर से अपनी किताबों में डूब जाती थी।

उसकी इस अटूट हिम्मत को देखकर कॉलेज के प्रिंसिपल ने उसकी पूरी फीस माफ कर दी और उसे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें भी उपहार में दीं। यही वह मोड़ था जहाँ से कोमल ने देश की सबसे कठिन परीक्षा, यानी यूपीएससी (UPSC) को पास करने का अपना अंतिम लक्ष्य निर्धारित कर लिया।

कोमल के पास महंगी कोचिंग क्लासेस में जाने के लिए न तो पैसे थे और न ही इंटरनेट का बड़ा डेटा पैक, इसलिए उसने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। वह हर दिन लाइब्रेरी में बैठकर पुराने अखबारों से नोट्स बनाती थी और सरकारी वेबसाइट्स से महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाकर अपनी डायरी में लिखा करती थी।

उसकी सहेलियाँ जब सप्ताहांत पर सिनेमा देखने या मॉल में घूमने जाती थीं, तब कोमल इतिहास और भूगोल के पन्नों में खोई रहती थी। उसके रिश्तेदारों ने इस बीच उसकी शादी के लिए कई रिश्ते भी भेजे और उसके मना करने पर उसे ‘घमंडी और कुलक्षणी’ तक कह डाला। इन सभी सामाजिक बंधनों और मानसिक प्रताड़नाओं को झेलते हुए भी कोमल का ध्यान अपने लक्ष्य से एक पल के लिए भी नहीं भटका।

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी part-2

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी

जब कोमल ने पहली बार सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा दी, तो उसे पूरा विश्वास था कि उसकी मेहनत रंग लाएगी, लेकिन परिणाम आने पर उसका नाम सूची में नहीं था। वह केवल दो अंकों से मुख्य परीक्षा में बैठने से चूक गई थी, जिसने उसकी उम्मीदों को एक पल के लिए पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया था।

उस रात वह अपने कमरे के कोने में बैठकर फूट-फूट कर रोई और उसे लगा कि शायद उसके आलोचक सही कह रहे थे कि यह परीक्षा उसके बस की बात नहीं है। उसकी माँ ने उसके पास आकर उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, “गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, कोमल, तूने तो लड़ना सीखा है, हारना नहीं, एक बार फिर कोशिश कर।” माँ के इन शब्दों ने कोमल के भीतर बुझती हुई उम्मीद की चिंगारी को एक बार फिर से एक धधकती हुई आग में बदल दिया।

अपने दूसरे प्रयास के लिए कोमल ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदला और अपनी पिछली कमियों को सुधारने के लिए दोगुनी ताकत से काम करना शुरू किया। उसने लिखने का अभ्यास इतना अधिक किया कि उसकी उंगलियों में गहरे छाले पड़ गए और उन पर पट्टियां बांधकर भी वह उत्तर लिखती रही।

इस दौरान घर की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई क्योंकि उसकी छोटी बहन की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी, जिसके इलाज में कोमल की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। रातों को जागकर बहन की तीमारदारी करना और दिन में परीक्षा की तैयारी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, लेकिन कोमल का इरादा फौलाद का बन चुका था। उसने अपनी नींद को केवल तीन घंटे तक सीमित कर दिया और हर एक सेकंड का उपयोग केवल और केवल पढ़ाई के लिए किया।

दूसरे प्रयास में कोमल ने न केवल प्रारंभिक परीक्षा पास की, बल्कि मुख्य परीक्षा में भी अपने बेहतरीन लेखन कौशल के दम पर शानदार सफलता हासिल की। अब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी दिल्ली जाकर साक्षात्कार (इंटरव्यू) बोर्ड के सामने उपस्थित होना, जिसके लिए उसके पास अच्छे कपड़े तक नहीं थे।

उसकी माँ ने अपनी शादी का आखिरी बचा हुआ सोने का कंगन बेचकर कोमल के लिए एक साधारण सी सूती साड़ी और दिल्ली का टिकट खरीदा था। दिल्ली के उस भव्य यूपीएससी भवन के बाहर खड़ी कोमल अंदर से थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन जैसे ही उसने अपने माता-पिता के संघर्षों को याद किया, उसका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। इंटरव्यू रूम का दरवाजा खोलते ही उसने वहां बैठे देश के सबसे अनुभवी अधिकारियों को बेहद शालीनता और मुस्कुराहट के साथ नमस्ते कहा।

इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष ने कोमल की पृष्ठभूमि को देखते हुए उससे एक बेहद तीखा और व्यावहारिक सवाल पूछा, “कोमल, आप एक बहुत ही गरीब परिवार से आती हैं, क्या आपको लगता है कि इस व्यवस्था में रहकर आप बिना बिके ईमानदारी से काम कर पाएंगी?”

कोमल ने बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे अध्यक्ष की आँखों में देखा और कहा, “सर, गरीबी ने मुझे समझौता करना नहीं, बल्कि अभावों में भी अपने स्वाभिमान को जिंदा रखना सिखाया है; जो इंसान भूख से लड़कर यहाँ तक पहुंच सकता है, उसे दुनिया की कोई भी दौलत खरीद नहीं सकती।” उसका यह बेबाक और सच्चाई से भरा जवाब सुनकर इंटरव्यू बोर्ड के सभी सदस्य मंत्रमुग्ध हो गए और पूरे कमरे में कुछ पलों के लिए गहरी खामोशी छा गई।

सफलता का अंतिम परिणाम घोषित होने वाले दिन कोमल का पूरा परिवार कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठा हुआ था और सभी के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। जैसे ही पीडीएफ फाइल खुली और कोमल ने अपना रोल नंबर सर्च किया, स्क्रीन पर लिखा था – ‘ऑल इंडिया रैंक 12, कोमल कुमारी’।

यह देखते ही उसकी माँ की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले और वह कोमल को गले लगाकर जोर-जोर से रोने लगीं, जबकि उसकी छोटी बहन घर के बाहर खुशी से नाचने लगी। पूरे कस्बे में यह खबर आग की तरह फैल गई कि मुनीम जी की बेटी आज देश की बड़ी प्रशासनिक अधिकारी (IAS) बन गई है। जो पड़ोसी कभी उसे ताने मारते थे, वे आज हाथों में मिठाई के डिब्बे लेकर उसके घर के बाहर बधाई देने के लिए कतारों में खड़े थे।

कोमल की यह अविश्वसनीय यात्रा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण थी कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके भीतर दृढ़ संकल्प और कभी न हार मानने वाला जज्बा हो, तो आप आसमान की ऊंचाइयों को भी छू सकते हैं। उसने समाज की उन रूढ़िवादी बेड़ियों को अपने कड़े परिश्रम से पिघला दिया था जो लड़कियों को हमेशा चारदीवारी के भीतर कैद रखना चाहती हैं।

अपनी पहली पोस्टिंग के रूप में जब कोमल ने अपने गृह जिले के कलेक्ट्रेट में कदम रखा, तो उसने सबसे पहले अपनी माँ के पैर छुए और उस स्ट्रीट लाइट को नमन किया जिसके नीचे उसने अपने जीवन के सबसे बड़े सपने बुने थे। कोमल की कहानी आज देश की लाखों उन लड़कियों के लिए प्रेरणा का एक ऐसा जलता हुआ दीया है, जो अपनी गरीबी और लाचारी को पीछे छोड़कर अपनी मेहनत के दम पर इतिहास रचना चाहती हैं।

क्षितिज की नई रेखा

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