सिंहासन बत्तीसी कहानियां

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: तीसवीं पुतली – जयलक्ष्मी सिंहासन बत्तीसी: तीसवीं पुतली जयलक्ष्मी ने राजा भोज से कहा— “हे राजन्! यदि तुममें भी राजा विक्रमादित्य जैसी तपस्या, त्याग, दानशीलता और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा है, तभी इस सिंहासन पर बैठने का साहस करना।” इसके बाद उसने यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य जितने महान सम्राट थे, उतने … Read more

बेताल पच्चीसी सर्वश्रेष्ठ वर कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: चम्मापुर नाम के नगर में चम्पकेश्वर नाम का राजा राज्य करता था। उसकी रानी सुलोचना थी और उनकी पुत्री त्रिभुवनसुन्दरी अत्यंत रूपवती और गुणवान थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो राजा-रानी उसके योग्य वर को लेकर चिंतित हो गए। अनेक राजाओं ने अपने-अपने पुत्रों के चित्र भेजे, पर राजकुमारी को कोई भी … Read more

बेताल पच्चीसी अपराधी कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी : बनारस में देवस्वामी नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसके पुत्र हरिदास की पत्नी लावण्यवती अत्यंत सुंदर थी। एक रात वे दोनों महल की छत पर सो रहे थे। आधी रात को एक गंधर्व कुमार आकाश मार्ग से वहाँ आया और लावण्यवती के सौंदर्य पर मोहित होकर उसे उठा ले गया। सुबह … Read more

बेताल पच्चीसी अधिक साहसी कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: चन्द्रशेखर नगर में रत्नदत्त नाम का एक सेठ रहता था। उसकी पुत्री उन्मादिनी अत्यंत सुंदर थी। सेठ ने राजा को विवाह का प्रस्ताव दिया, लेकिन राजा ने दासियों से उसकी जाँच करवाई। दासियाँ उसके रूप से प्रभावित तो हुईं, लेकिन ईर्ष्या के कारण उसे “कुलक्षिणी” बताकर राजा से विवाह रोक दिया। बाद में … Read more

बेताल पच्चीसी सबसे ज्यादा प्रेम में अंधा कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: विशाला नाम की नगरी में पदमनाभ नाम का राजा राज करता था। उसी नगर में अर्थदत्त नाम का एक साहूकार रहता था। उसकी पुत्री अनंगमंजरी का विवाह मणिवर्मा नामक धनी साहूकार के पुत्र से हुआ। मणिवर्मा पत्नी को बहुत प्रेम करता था, पर पत्नी उसे प्रेम नहीं करती थी। इसी बीच मणिवर्मा के … Read more

बेताल पच्चीसी असली वर कौन?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: उज्जैन नगरी में महाबल नाम का एक प्रतापी राजा राज्य करता था। उसके दरबार में हरिदास नाम का एक विश्वसनीय दूत था। हरिदास की महादेवी नाम की एक अत्यंत सुंदर कन्या थी। जब वह विवाह योग्य हुई तो हरिदास उसकी शादी को लेकर बहुत चिंतित रहने लगा। उसी समय राजा ने हरिदास को … Read more