बेताल पच्चीसी सबसे ज्यादा पुण्य किसका?

बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी: वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का एक प्रतापी राजा राज करता था। एक दिन उसके दरबार में वीरवर नाम का एक राजपूत नौकरी माँगने पहुँचा। राजा ने उससे पूछा कि उसे वेतन में क्या चाहिए। वीरवर ने बिना झिझक कहा कि उसे प्रतिदिन एक हज़ार तोले सोना चाहिए। यह सुनकर पूरा दरबार आश्चर्य … Read more

बेताल पच्चीसी की कहानियां

बेताल पच्चीसी

पापी कौन? बेताल पच्चीसी: काशी में प्रतापमुकुट नाम का एक राजा राज करता था। उसका बेटा वज्रमुकुट एक दिन दीवान के पुत्र के साथ शिकार खेलने जंगल गया। घूमते-घूमते दोनों एक सुंदर तालाब के पास पहुँचे, जहाँ कमल खिले थे और हंस तैर रहे थे। पास ही महादेव का मंदिर था। दोनों दर्शन करके बाहर … Read more

महाभारत अश्वत्थामा का अपराध

महाभारत

महाभारत कुरुक्षेत्र का महायुद्ध अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका था। अठारह दिनों तक चले इस भीषण युद्ध ने धरती को रक्त से लाल कर दिया था। कौरवों की विशाल सेना लगभग समाप्त हो चुकी थी और उनके सभी महान योद्धा एक-एक करके युद्धभूमि में गिर चुके थे। अब दुर्योधन अकेला रह गया था। अपने … Read more

महाभारत भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य का पतन

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महाभारत का युद्ध दिन-प्रतिदिन और भी अधिक भयानक होता जा रहा था। कुरुक्षेत्र की भूमि पर हर ओर रक्त, मृत्यु और विनाश का दृश्य दिखाई देता था। युद्ध के दसवें दिन कौरव सेना का नेतृत्व भीष्म पितामह कर रहे थे। वे इतने महान योद्धा थे कि उनके सामने कोई भी टिक नहीं पा रहा था। … Read more

महाभारत पाण्डवों का राज्य और श्रीकृष्ण

महाभारत

महाभारत: तेरह वर्षों का वनवास और अज्ञातवास पूर्ण करने के बाद पाण्डवों के जीवन में एक नया मोड़ आया। विराट नगर में रहते हुए उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखी थी, लेकिन जब राजा विराट के राज्य पर आक्रमण हुआ और अर्जुन ने अकेले ही कौरव सेना को पराजित कर दिया, तब पाण्डवों ने स्वयं को … Read more

महाभारत दुर्योधन की रक्षा और पाण्डवों की महानता

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महाभारत: वनवास के कठिन वर्षों में पाण्डव अनेक वन, पर्वत और तीर्थों में भटकते हुए अपना समय व्यतीत कर रहे थे। गन्धमादन पर्वत पर कुबेर के दिव्य महल में कुछ समय बिताने के बाद वे वहाँ से आगे बढ़े और अनेक आश्रमों में ऋषियों-मुनियों का सत्संग प्राप्त करते हुए अंततः द्वैतवन पहुँचे। अब उनके वनवास … Read more