पिंजरे में कैद परिंदे

पिंजरे में कैद परिंदे

पिंजरे में कैद परिंदे सुबह के चार बज रहे हैं और लैपटॉप की स्क्रीन की वह कृत्रिम नीली रोशनी मेरी आँखों में चुभ रही है, जैसे किसी ने सीधे रेटिना पर स्याही छिड़क दी हो। हाथ में ठंडी हो चुकी कॉफी का मग है और सामने खुला है वह एक्सेल शीट, जो मेरी पूरी ज़िंदगी … Read more