विश्वास की राख से पुनर्जन्म
विश्वास की राख से पुनर्जन्म part-1 आगरा की तपती दोपहरी में यमुना किनारे बसा ‘पांडेय निवास’ बाहर से जितना भव्य और शांत दिखता था, उसके भीतर का सन्नाटा उतना ही भारी था। हवेली के मुख्य दीवान पर बैठे सदानंद पांडेय अपनी कांपती उंगलियों से माला फेर रहे थे, लेकिन उनका ध्यान मंत्रों पर नहीं, बल्कि … Read more