स्वाभिमान की चौखट

स्वाभिमान की चौखट

स्वाभिमान की चौखट part-1 दिल्ली के एक प्रतिष्ठित इलाके में स्थित ‘अग्निहोत्री निवास’ बाहर से जितना शांत और भव्य दिखता था, उसके भीतर की दीवारें उतनी ही गहरे पारिवारिक अंतर्द्वंद्वों की गवाह थीं। इस घर की रीढ़ थीं अलका अग्निहोत्री, जो अपने पारंपरिक मूल्यों, सख्त अनुशासन और पारिवारिक प्रतिष्ठा को ही जीवन का एकमात्र ध्येय … Read more

टूटते धागे, जुड़ते अहसास

टूटते धागे, जुड़ते अहसास

टूटते धागे, जुड़ते अहसास part-1 उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर की सिविल लाइंस कॉलोनी में स्थित ‘मिश्रा निवास’ बाहर से जितना शांत दिखता था, भीतर से उसकी दीवारें उतनी ही भारी खामोशी से घिरी थीं। इस घर के मुखिया, रामशंकर मिश्रा, पीडब्ल्यूडी विभाग में एक कड़क और ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी थे, जिनकी हर बात पत्थर … Read more

दरकते रिश्ते: मिथिला की हवेली

दरकते रिश्ते

दरकते रिश्ते part-1 मिथिलांचल की गोद में बसा दरभंगा का वह पुराना पैतृक घर, जिसकी दीवारों पर समय की सिलवटें साफ़ देखी जा सकती थीं, आज भी अपनी गरिमा बचाए हुए था। आंगन के बीचों-बीच लगा वह बरगद का पेड़ न जाने कितनी पीढ़ियों के हंसी-मजाक और आंसुओं का गवाह रहा होगा। इसी हवेली में … Read more

विश्वास की राख से पुनर्जन्म

विश्वास की राख से पुनर्जन्म

विश्वास की राख से पुनर्जन्म part-1 आगरा की तपती दोपहरी में यमुना किनारे बसा ‘पांडेय निवास’ बाहर से जितना भव्य और शांत दिखता था, उसके भीतर का सन्नाटा उतना ही भारी था। हवेली के मुख्य दीवान पर बैठे सदानंद पांडेय अपनी कांपती उंगलियों से माला फेर रहे थे, लेकिन उनका ध्यान मंत्रों पर नहीं, बल्कि … Read more