प्रतिबिंब कक्ष

प्रतिबिंब कक्ष

प्रतिबिंब कक्ष एक मनोवैज्ञानिक रहस्य कहानी है, जिसमें डॉ. नीरज सहगल अपनी यादों और एक अदृश्य अपराधी के बीच उलझ जाता है। यह कहानी अंत तक रहस्य और रोमांच बनाए रखती है।

एक परछाईं जो कभी थी ही नहीं

एक परछाईं जो कभी थी ही नहीं

एक परछाईं जो कभी थी ही नहीं Part 1 कोलकाता की बरसाती रातों में कुछ घर ऐसे होते हैं जिनकी खामोशी बाहर गिरती बारिश से भी ज्यादा शोर करती है। पार्क सर्कस इलाके की एक पुरानी लेकिन आधुनिक इमारत की सातवीं मंजिल पर रहने वाला सलीम अंसारी पिछले तीन महीनों से उसी तरह की खामोशी … Read more

साये का गणित | याददाश्त, पहचान और मनोवैज्ञानिक षड्यंत्र की कहानी |

साये का गणित

साये का गणित part-1 आर्यन खन्ना के जीवन में सब कुछ एक सधी हुई घड़ी की सुइयों की तरह चलता था। वह शहर का सबसे सफल न्यूरोसाइंटिस्ट था, जिसका काम मस्तिष्क की उलझनों को सुलझाना था, लेकिन खुद उसके जीवन की उलझनें किसी अंधेरी भूलभुलैया जैसी थीं। वह एक ऐसे आलीशान पेंटहाउस में रहता था … Read more