सिंदूरी हवेली का अंतिम दीप – मृणालिनी और आर्यदीप के अधूरे प्रेम और बिछड़ने की दर्दनाक कहानी

सिंदूरी हवेली का अंतिम दीप

सिंदूरी हवेली का अंतिम दीप Part-1 सन् 1960 का बंगाल अपने भीतर एक अजीब-सी शालीनता समेटे हुए था। कोलकाता की चौड़ी सड़कों पर ट्रामें अपनी धीमी लय में चलती थीं, पुराने ज़मींदार घरानों की प्रतिष्ठा अब भी लोगों के मन में जीवित थी, और संगीत, साहित्य तथा संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा माने जाते थे। … Read more

मायाजाल: अंधेरे का सच

मायाजाल अंधेरे का सच

मायाजाल: अंधेरे का सच Part-1 मुंबई की गगनचुंबी इमारतों के बीच स्थित ‘नेब्युला टेक’ कंपनी के चौदहवें माले पर सन्नाटा पसरा हुआ था। रात के ठीक दो बजे, सुरक्षा गार्ड राम सिंह अपनी अंतिम राउंड पर था, तभी उसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कबीर मल्होत्रा के केबिन से कांच टूटने की आवाज सुनाई दी। जब … Read more

सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: सोलहवीं पुतली सत्यवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है— राजा विक्रमादित्य के शासनकाल में उज्जैन नगरी का यश दूर-दूर तक फैला हुआ था। उनके दरबार में अनेक विद्वान उपस्थित रहते थे और नौ श्रेष्ठ ज्ञानी उनके विशेष सलाहकार थे, जिनकी राय से ही राजा राज्य के महत्वपूर्ण निर्णय … Read more

सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: चौदहवीं पुतली सुनयना ने राजा भोज को यह कथा सुनाई— राजा विक्रमादित्य सभी राजाओं में श्रेष्ठ माने जाते थे। वे जितने न्यायप्रिय, दानी और त्यागी थे, उतने ही साहसी और पराक्रमी भी। उन्हें शिकार खेलने का विशेष शौक था और वे निहत्थे भी हिंसक पशुओं का सामना कर सकते थे। एक बार उन्हें … Read more

सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: बीसवीं पुतली – ज्ञानवती ने जो कथा सुनाई वह इस प्रकार है- राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग केवल न्याय पाने के लिए ही नहीं आते थे, बल्कि ऐसे कठिन प्रश्न भी लेकर आते थे जिनका उत्तर उन्हें कहीं और नहीं मिलता था। राजा विक्रम अपनी बुद्धिमत्ता और अनुभव से हर प्रश्न का … Read more

सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती

सिंहासन बत्तीसी

सिंहासन बत्तीसी: अठारहवीं पुतली तारामती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई, वह इस प्रकार है—राजा विक्रमादित्य गुणों के महान पारखी थे। वे विद्वानों और कलाकारों का अत्यंत सम्मान करते थे। उनके दरबार में देश-विदेश से विद्वान और कलाकार आते थे तथा अपनी योग्यता के अनुसार आदर और पुरस्कार प्राप्त करते थे। एक दिन उनके … Read more