अपनी गलतियों से उजड़ता एक आदमी- मुंशी प्रेमचंद
अपनी गलतियों से उजड़ता एक आदमी- मुंशी प्रेमचंद आज जब मैं अपनी टूटी हुई जिंदगी के पन्ने पलटता हूँ, तो हर पन्ने पर केवल पछतावा दिखाई देता है। कभी मैं सम्मानित, शिक्षित और सुखी व्यक्ति माना जाता था। धन, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य मेरे कदमों में बिछे रहते थे। ऊँचा खानदान, अच्छी शिक्षा और आकर्षक व्यक्तित्व—ईश्वर … Read more