राख का फूल और बहती गंगा
राख का फूल और बहती गंगा part-1 गाज़ीपुर की सुबहों में एक अजीब सा ठहराव होता है, जहाँ गंगा की लहरें घाटों से इस तरह टकराती हैं जैसे कोई पुराना दोस्त कान में धीमे से कोई राज़ कह रहा हो। राघव अपने घर की छत पर खड़ा होकर अक्सर इसी मंज़र को देखा करता था, … Read more