सुनहरी यादें

सुनहरी यादें

सुनहरी यादें part-1 शिवेंद्र, दीपक और अनुज, ये तीनों नाम दसवीं कक्षा के गलियारों में किसी पहचान के मोहताज नहीं थे। तीनों एक ही बेंच पर बैठते थे, लेकिन तीनों की दुनिया अपनी-अपनी धुरी पर घूमती थी। शिवेंद्र के पिता डॉक्टर थे, जो उम्मीद करते थे कि उनका बेटा भी ‘नीट’ की तैयारी में दिन-रात … Read more

यादों का कारवां

यादों का कारवां

यादों का कारवां part-1 लंदन की ठंडी और धुंध भरी हवाओं में पिछले सात साल बिताने के बाद, जब अद्वैत ने दिल्ली एयरपोर्ट की गर्म और उमस भरी हवा में सांस ली, तो उसे लगा जैसे वह किसी दूसरी दुनिया में उतर आया है। उसके हाथ में एक महंगा लेदर का सूटकेस था, जिसमें उसके … Read more

वो धुंधली रात और अधूरी चिट्ठी

वो धुंधली रात और अधूरी चिट्ठी

वो धुंधली रात और अधूरी चिट्ठी part-1 हम पाँचों—शाश्वत, अंजलि, करण, सुष्म और अंतरा—बचपन से ही इस छोटे से कस्बे की गलियों में साथ पले-बढ़े थे। हमारी दोस्ती किसी फिल्मी कहानी जैसी नहीं थी, बल्कि यह उन टूटी हुई साइकिलों, गर्मियों की दोपहर में चोरी की हुई आम की मिठास, और स्कूल के पीछे वाली … Read more

अटूट रिश्तों की एक नई दास्तां,

अटूट रिश्तों की एक नई दास्तां

अटूट रिश्तों की एक नई दास्तां part-1 गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट पर शाम की ठंडी हवाएं चल रही थीं, जहां खुशी और अर्णव बचपन से ही अपने सुख-दुख साझा करते आए थे। दोनों की दोस्ती स्कूल के उस पहले दिन से शुरू हुई थी जब खुशी ने अपना टिफिन बॉक्स अर्णव के साथ शेयर किया … Read more

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी

गरीब लड़की की IAS बनने की कहानी part-1 उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे की तंग गलियों में बसे एक साधारण से मकान में कोमल का बचपन बीता था। उसके पिता एक स्थानीय कपड़े की दुकान में मामूली मुनीम थे, जिनकी सीमित आय में छह सदस्यों के परिवार का गुजारा बमुश्किल हो पाता था। … Read more

ढलती दोपहरें

ढलती दोपहरें

ढलती दोपहरें part-1 पवन को हमेशा से लगता था कि अठारह का होते ही ज़िंदगी अचानक से किसी सिनेमा के पर्दे जैसी रंगीन और साफ़ हो जाएगी। लेकिन दिल्ली के एक तंग किराए के कमरे में, उमस भरी दोपहर को सीलिंग फैन की चरचराहट सुनते हुए, उसे अहसास हुआ कि वयस्कता कोई जादुई दरवाज़ा नहीं, … Read more