धूप की सिलवटों में छुपा आसमान

धूप की सिलवटों में छुपा आसमान

धूप की सिलवटों में छुपा आसमान Part 1 महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में बसे एक छोटे से कस्बे की सुबहें हमेशा एक जैसी होती थीं। सूरज उगता था, लोग अपने काम पर निकल जाते थे और सपने अक्सर घरों की चारदीवारी में ही दम तोड़ देते थे। लेकिन कुछ सपने ऐसे होते हैं जो परिस्थितियों … Read more

एक मुट्ठी आसमान

एक मुट्ठी आसमान

एक मुट्ठी आसमान part 1 विशाल और शालिनी की दोस्ती कॉलेज के उन शुरुआती दिनों में हुई थी जब दोनों के पास भविष्य के बड़े-बड़े सपने और जेब में महज कुछ सिक्के हुआ करते थे। वे दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे; जहाँ विशाल शांत, गंभीर और हमेशा अपनी ही दुनिया में खोया रहने वाला … Read more

ज़हरीले प्रेम की इबारत

ज़हरीले प्रेम की इबारत

ज़हरीले प्रेम की इबारत part 1 दिल्ली की उमस भरी शाम में रिया अपनी बालकनी में खड़ी होकर नीचे सड़क पर दौड़ती लाल-पीली बत्तियों को देख रही थी। उसके हाथ में कॉफी का मग था, लेकिन वह कब की ठंडी हो चुकी थी, बिल्कुल उसके और राघव के उस रिश्ते की तरह जो अब सिर्फ … Read more

पांडे निवास | फैमिली ड्रामा कहानी

पांडे निवास

पांडे निवास | फैमिली ड्रामा कहानी part-1 आगरा के ताजगंज इलाके की तंग गलियों में बसा ‘पांडे निवास’ बाहर से भले ही सामान्य दिखता हो, लेकिन इसकी दीवारों के भीतर बीते दो दशकों से एक गहरी खामोशी दबी हुई थी। हरनाथ पांडे, जो शहर के एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त शिक्षक थे, अपनी साख और अनुशासन के … Read more

पिंजरे में कैद परिंदे

पिंजरे में कैद परिंदे

पिंजरे में कैद परिंदे सुबह के चार बज रहे हैं और लैपटॉप की स्क्रीन की वह कृत्रिम नीली रोशनी मेरी आँखों में चुभ रही है, जैसे किसी ने सीधे रेटिना पर स्याही छिड़क दी हो। हाथ में ठंडी हो चुकी कॉफी का मग है और सामने खुला है वह एक्सेल शीट, जो मेरी पूरी ज़िंदगी … Read more

खामोश गूँज

खामोश गूँज

खामोश गूँज part-1 सुबह की पहली किरण खिड़की से छनकर जब चेहरे पर पड़ती है, तो वह सुकून नहीं, बल्कि एक भारी अलार्म की तरह महसूस होती है। फोन की नोटिफिकेशन की वह अंतहीन लय, जो रात भर भी बंद नहीं हुई, किसी डिजिटल हथौड़े की तरह सिर में बजती रहती है। हम सब एक … Read more