यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब

यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब

यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब part-1 दिल्ली की गुनगुनी धूप और कड़कड़ाती ठंड के बीच बसा वह पुराना स्कूल, जहाँ हमारी ज़िंदगी के सबसे ख़ूबसूरत और मासूम साल बीते थे, आज भी मेरे ज़हन में पूरी तरह ताज़ा है। रोहित एक ऐसा लड़का था जिसे किताबों से ज़्यादा मैदान की धूल, क्रिकेट के बल्ले … Read more

खानदानी परिवार

खानदानी परिवार

खानदानी परिवार part-1 आगरा के पुराने शहर की तंग गलियों में बसा ‘खान विला’ कभी खुशियों का ठिकाना हुआ करता था। हाजी इनायत अली खान का परिवार शहर में अपनी शराफत और इत्र के कारोबार के लिए मशहूर था। आज वहां सन्नाटा पसरा था, जो बरसों से दबे हुए जख्मों की चुभन को और बढ़ा … Read more

अधूरी दस्तक का सन्नाटा

अधूरी दस्तक का सन्नाटा

अधूरी दस्तक का सन्नाटा part-1 आर्यन के लिए दफ्तर की वो पांचवीं मंजिल किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं थी, जहाँ हर सुबह वो अपने जज्बातों को एक छोटे से सूटकेस में बंद करके कदम रखता था। उसकी डेस्क खिड़की के बिल्कुल पास थी, जहाँ से बाहर का शहर धुंधला दिखाई देता था, लेकिन उसकी नजरें … Read more

अंतिम रहस्य,गुप्त रहस्य

अंतिम रहस्य

अंतिम रहस्य part-1 हिमालय की गोद में बसा काठमांडू शहर अपनी प्राचीन संस्कृति और आधुनिक जटिलताओं का एक अद्भुत संगम है। यहाँ की तंग गलियों में छिपी हुई कहानियाँ अक्सर अनसुलझी रह जाती हैं, और ऐसी ही एक रहस्यमयी कहानी का केंद्र था ‘इंडो-नेपाल ट्रेड हब’ का सुरक्षा घेरे वाला कॉर्पोरेट ऑफिस। एक ठंडी, धुंधली … Read more

अदृश्य जाल,साइकोलॉजिकल थ्रिलर

अदृश्य जाल

अदृश्य जाल part-1 आर्यन अपनी खिड़की के पास खड़ा होकर नीचे सड़क पर गिरती बारिश को देख रहा था। उसके हाथ में कॉफी का मग था, जो अब ठंडा हो चुका था, लेकिन उसका ध्यान उस तरफ नहीं था। उसे बार-बार ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई उसे देख रहा है, कोई है जो … Read more

शून्य का दर्पण

शून्य का दर्पण

शून्य का दर्पण part-1 आर्यन अपनी पुरानी हवेली के उस सुनसान कमरे में बैठा था, जहाँ धूल की परतें समय की गवाही दे रही थीं। उसने अपने सामने रखे एक प्राचीन आईने को साफ किया, जिसका फ्रेम किसी अजीब धातु से बना था, जो न पीतल जैसा था न चांदी जैसा। बाहर मूसलाधार बारिश हो … Read more