राख का फूल और बहती गंगा

राख का फूल और बहती गंगा

राख का फूल और बहती गंगा part-1 गाज़ीपुर की सुबहों में एक अजीब सा ठहराव होता है, जहाँ गंगा की लहरें घाटों से इस तरह टकराती हैं जैसे कोई पुराना दोस्त कान में धीमे से कोई राज़ कह रहा हो। राघव अपने घर की छत पर खड़ा होकर अक्सर इसी मंज़र को देखा करता था, … Read more

एक नई सुबह की गूंज

एक नई सुबह की गूंज

एक नई सुबह की गूंज part-1 झारखंड के छोटे से शहर हजारीबाग की सुबह जब अंगड़ाई लेती थी, तो महुआ अपने आंगन में लगे महुआ के पेड़ से गिरते फूलों की भीनी खुशबू से अपनी आंखें खोलती थी। चौबीस साल की महुआ के पास न केवल उस पेड़ का नाम था, बल्कि उसकी जड़ें भी … Read more

अवनि की दास्तां

अवनि की दास्तां

अवनि की दास्तां part-1 यह कहानी केरल के एक छोटे से तटीय गांव मुंडकयम की है, जहां समंदर की लहरें रोज़ सुबह सूरज की पहली किरण के साथ साहिल से टकराती थीं। इसी गांव के एक बेहद साधारण और गरीब मछुआरे परिवार में अवनि का जन्म हुआ था, जिसके पिता भास्करन रोज़ अपनी जर्जर नाव … Read more

कागज़ी कश्तियाँ

कागज़ी कश्तियाँ

कागज़ी कश्तियाँ part-1, आदित्य की सुबह हमेशा की तरह अलार्म की कर्कश आवाज़ से नहीं, बल्कि उसके फोन की लगातार बजती हुई नोटिफिकेशन टोन से हुई। उसने अपनी भारी आँखें खोलीं और सबसे पहले इंस्टाग्राम खोला, जहाँ उसकी पिछली रात की ‘लेट नाइट स्टडी वाइब्स’ वाली रील पर पाँच सौ से ज़्यादा लाइक्स आ चुके … Read more

कंक्रीट के जंगल

कंक्रीट के जंगल

कंक्रीट के जंगल part-1 सत्रह साल की उम्र में जब कबीर ने अपने छोटे से शहर आजमगढ़ को अलविदा कहा था, तो उसकी आँखों में दिल्ली के बड़े कॉलेजों के सुनहरे सपने और जेब में पिता की जीवन भर की जमा-पूंजी थी। उसे लगता था कि वह कोई असाधारण प्रतिभा है, जिसे बस एक बड़े … Read more

अधूरा सच

अधूरा सच

अधूरा सच part-1 बात आज से ठीक तीन साल पहले की है, जब मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहा था। मेरा नाम रोहित है, और उस वक्त मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सच सिर्फ एक कमरे और कुछ किताबों तक ही सीमित था। दिल्ली की वो कड़कड़ाती … Read more