यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब

यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब

यादों के गलियारे और अधूरे ख़्वाब part-1 दिल्ली की गुनगुनी धूप और कड़कड़ाती ठंड के बीच बसा वह पुराना स्कूल, जहाँ हमारी ज़िंदगी के सबसे ख़ूबसूरत और मासूम साल बीते थे, आज भी मेरे ज़हन में पूरी तरह ताज़ा है। रोहित एक ऐसा लड़का था जिसे किताबों से ज़्यादा मैदान की धूल, क्रिकेट के बल्ले … Read more

खानदानी परिवार

खानदानी परिवार

खानदानी परिवार part-1 आगरा के पुराने शहर की तंग गलियों में बसा ‘खान विला’ कभी खुशियों का ठिकाना हुआ करता था। हाजी इनायत अली खान का परिवार शहर में अपनी शराफत और इत्र के कारोबार के लिए मशहूर था। आज वहां सन्नाटा पसरा था, जो बरसों से दबे हुए जख्मों की चुभन को और बढ़ा … Read more

कॉलेज वाला प्यार

कॉलेज वाला प्यार

कॉलेज वाला प्यार part-1 दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में नार्थ कैंपस की वह पुरानी लाइब्रेरी, मानो किसी दूसरी दुनिया का हिस्सा थी। वहां की हवाओं में किताबों की महक के साथ-साथ अधूरी प्रेम कहानियों और भविष्य के सपनों का अजीब सा मेल था। अद्वैत, जो आर्किटेक्चर का फाइनल ईयर स्टूडेंट था, अपनी ड्राइंग टेबल पर … Read more

फासलों के दरमियां,एक रात ने सब बदल दिया

फासलों के दरमियां

फासलों के दरमियां part-1 शाम की धुंधलके में खिड़की के बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देखना हमेशा से सुकून देता था, लेकिन उस दिन हवा में एक अजीब सी भारीपन महसूस हो रहा था। कॉफ़ी के मग्गे से उठता हुआ धुआं कमरे के सन्नाटे में धीरे-धीरे विलीन हो रहा था, ठीक उसी तरह जैसे … Read more

अधूरी दलीलें: प्यार और दर्द

अधूरी दलीलें

अधूरी दलीलें Part-1 नोएडा के सेक्टर-62 में स्थित “वर्मा एंड एसोसिएट्स” नाम की प्रतिष्ठित लॉ फर्म बाहर से जितनी साधारण दिखती थी, अंदर उतनी ही तेज़ रफ्तार दुनिया बसती थी। कांच की दीवारों, लगातार बजती कॉल्स और करोड़ों के कॉर्पोरेट मामलों के बीच हर कोई अपनी पहचान बनाने की दौड़ में था। उसी फर्म में … Read more

दरकते रिश्ते: मिथिला की हवेली

दरकते रिश्ते

दरकते रिश्ते part-1 मिथिलांचल की गोद में बसा दरभंगा का वह पुराना पैतृक घर, जिसकी दीवारों पर समय की सिलवटें साफ़ देखी जा सकती थीं, आज भी अपनी गरिमा बचाए हुए था। आंगन के बीचों-बीच लगा वह बरगद का पेड़ न जाने कितनी पीढ़ियों के हंसी-मजाक और आंसुओं का गवाह रहा होगा। इसी हवेली में … Read more